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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदेश भर में फर्राटा भर रहीं रोडवेज की हजारों बसें बिना बीमा के ही चल रही हैं। खस्ता हाल खटारा बसें और उनमें रोज जान जोखिम में डालकर सफर करते मुसाफिर। मगर हादसा हो तो केवल रोडवेज का निर्धारित मुआवजा। खास बात यह है कि दोपहिया वाहन से लेकर व्यावसायिक वाहनों तक का बीमा होना नियमानुसार अनिवार्य है लेकिन रोडवेज में बसों का बीमा करीब पंद्रह साल पहले हुआ था और उसके बाद से बीमा हुआ ही नहीं। यानी बसें बिना किसी बीमे की ही संचालित हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि बसों का बीमा कराए जाने के कारण हर वर्ष प्रीमियम करोड़ों रुपये देने होते हैं जबकि बसों में डैमेज से ज्यादा आपरेशनल गड़बड़ियां होती है और उनकी प्रतिपूर्ति क्षेत्र की आय से कर ली जाती है।

 

रोडवेज मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक बसों का बीमा करीब 15 साल पहले वर्ष 2003 में हुआ था। उसके बाद किसी तरह का बीमा नहीं कराया गया। इसकी मुख्य वजह प्रीमियम पर हर वर्ष होने वाला व्यय ही था। घाटे से बचने के लिए बीमे के प्रावधान को ही समाप्त करा दिया गया। उसके बाद बसों का बीमा नहीं कराया जा रहा है। रोडवेज के मुख्य महाप्रबंधक एचएस गाबा के मुताबिक बसों का बीमा कराने पर उसका प्रीमियम काफी ज्यादा होता है। यह राशि करोड़ों रुपये में पहुंचती है। इसके अलावा अन्य मदों में भी प्रीमियम लगता है। बसों के संचालन में आपेरशनल डैमेज ही ज्यादा होता है यानी टूट –फूट आदि। हादसें में किसी मौत या फिर पूरी बस डैमेज होने पर भी ज्यादा प्रतिपूर्ति राशि की अदायगी करनी पड़ती है। इसी से बचने के लिए बसों में बीमा नहीं कराया जा रहा है। बसों के संचालन में होने वाली खामियों को दूर करने के लिए बस अथवा संबंधित क्षेत्र -डिपो की आय से ही उसकी प्रतिपूर्ति कर ली जाती है। इससे निगम पर वित्तीय बोझ भी कम हो जाता है।

एक महकमा दो व्यवस्था

रोडवेज प्रबंधन भले ही अपनी बसों का बीमा न होने की दलील देता है लेकिन वहां पर ही संचालित अनुबंधित बसें बीमित हैं। खास बात यह है कि अनुबंध के समय के निजी बस संचालकों से वाहनों के बीमे की प्रति ली जाती है। सवाल यह है कि एक विभाग में दो तरह की बसों में दो तरह नियम कैसे लागू हो रहे हैं। अनुबंधित संचालन से जुड़े जसपाल सिंह के मुताबिक ठेके पर अनुबंधित वाहनों के लिए बीमा अनिवार्य रहता है। यह राशि निजी बस मालिक अदा करता है जबकि रोडवेज यात्रियों से प्रति टिकट / किमी के आधार पर थर्ड पार्टी बीमा राशि की वसूली करता है। हादसे अथवा दुर्घटना के वक्त उसी से पीड़ित को भुगतान कर दिया जाता है।

 

वाहन का बीमित होना अनिवार्य

परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मोटरयान नियमावली के मुताबिक किसी भी वाहन का बीमा होना अनिवार्य है। वाहन का बीमा होने पर उसके ऊपर जुर्माने का भी प्रावधान है। अधिकारियों के मुताबिक रोडवेज बसों का बीमा नहीं है, यह अपने आप में जांच का विषय है। किस आधार पर वाहनों को बीमे से मुक्त किया गया है। इस बावत रोडवेज प्रबंधन से जानकारी ली जाएगी। 

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