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अधिकारियों के लिए दुधारू हुई रोडवेज बसें

Rising At 8am | 10-Mar-2018 | Posted by - Admin

 

  • वसूली के नाम पर चल रहा है गोरखधंधा

  • कहीं दौड़ रही खाली बसें, तो कहीं बिक रहा डीजल

   
Reality of Roadways Buses in Lucknow

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

रोडवेज की बसें भले ही आम लोगों की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही है और विभाग के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही हैं लेकिन अधिकारियों के लिए दुधारू पशु साबित हो रही है। एक तरफ बसों का डीजल चोरी हो रहा है तो दूसरी तरफ उसकी निगरानी के नाम पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।

 

रोडवेज में करीब तीन हजार अनुबंधित बसें चल रही है लेकिन उनमें प्रावधान से अधिक भुगतान का मामला सामने आ चुका है और उसकी जांच भी अधिकारियों की मिलीभगत के कारण बेहद सुस्त रफ्तार से चल रही है। केवल इतना ही नहीं, अनुबंधित बसों से प्रशानिक शुल्क के नाम पर वसूली की आड़ में बस अड्डों से खाली बसों की दौड़ाया जा रहा है।

दरअसल रोडवेज बसें विभाग के लिए नहीं मगर अधिकारियों के मोटी कमाई का जरिया बन चुकी है। शनिवार को रंगे हाथ डीजल चोरी का मामला पकड़े जाने के बाद भी अधिकारी किलोमीटर मानीटरिंग के जरिए वसूली का दम भरते रहें लेकिन सवाल यह है कि कितनी बसों से अब तक इस तरह की वसूली की गई। यह जवाब किसी के पास नहीं है। जबकि हर बस में वीटीएस (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) लगा होने का दम अधिकारी जरूर भरते हैं। इलेक्ट्रानिक टिकटिंग और वीटीएस के नाम पर प्रति सवारी करीब 36 पैसा कार्यदायी एजेंसी को अदा भी किया जा रहा है लेकिन सवाल यह है कि जब खाली बसें दौड़ाई जा रही है तो इसका मतलब क्या है। हैरतंगेज यह है कि वीटीएस के आधार पर अभी एक भी बस में कटौती नहीं की जा रही है यानी बसों में डीजल बेचने का धंधा बड़े आराम से चल रहा है।

 

रोडवेज मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक वीटीएस के जरिए तैयार होने वाली रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रों को भेज दी जाती है लेकिन उसके बाद कार्रवाई क्या होती है, इसकी जानकारी किसी को नहीं रहती है। मुख्य महाप्रबंधक संचालन एचएस गाबा के मुताबिक मुख्यालय से रिपोर्ट भेजी जाती है और उस पर रिकवरी करने या कार्रवाई क्षेत्र को करनी होती है। ये रिपोर्ट नियमित भेजी जाती है और अब तेल चोरी का मामला सामने आने के बाद यह तस्दीक की जाएगी कि कितने मामलों में अबतक  कार्रवाई की गई है।

हकीकत निकाल रही दावों की हवा

रोडवेज बसों में डीजल की खपत अधिक होने पर वीटीएस ट्रैकिंग के जरिए किलोमीटर के हिसाब से कटौती किए जाने का दावा अधिकारी जरूर करते हैं लेकिन क्या चालकों को नहीं मालूम है कि डीजल ज्यादा खर्च होने पर उनके भुगतान से कटौती होगी। मालूम है तो फिर तेल क्यों निकाला जा रहा है। दरअसल हकीकत में फिलहाल कोई कटौती वीटीएस पर की ही नहीं जा रही है।

फिलवक्त बसों में वीटीएस द्वारा रिकार्ड किलोमीटर के आधार पर भुगतान में कोई कटौती नहीं की जा रही है। जो लोग ऐसा कह रहे हैं, वे गलत हैं। वीटीएस से केवल बस की स्पीड, पैसेंजर आदि ही रिकार्ड किए जा रहे हैं।

जयदीप वर्मा

मुख्य महाप्रबंधक रोडवेज

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