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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

परिवहन विभाग द्वारा मनाया जा रहा 29वां सड़क सुरक्षा सप्ताह इस बार महकमों को सालों याद रहेगा। 13 मासूमों सहित करीब 40 लोगों की जान इसी सप्ताह गई। दो हादसे इतने भीषण रहे कि परिवहन विभाग ही नहीं प्रदेश व देश की सरकार पर भी सवाल खड़े हो गए। इससे इतर अधिकारी लोगो को जागरुक करने के बजाए केवल शासन की नजरों में अपने योग्यता साबित करने और नंबर बढ़ाने की कवायद में व्यस्त रहें। यही वजह रही कि इस बार सड़क सुरक्षा के छह दिनों में कोई काम नहीं हुआ। खास बात यह भी रही कि इस पूरे आयोजन में कहीं जिलाप्रशासन दिखाई दिया न ही पुलिस। ऐसा तब रहा जबकि रेगुलेशन के नाम पर सारा ठीकरा पुलिस पर ही फोड़ दिया जाता है।

 

दरअसल सड़क सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत गत 23 अप्रैल से हुई और रोडवेज सभागार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस निदेशालय, लोक निर्माण विभाग आदि ने अपने प्रेजेनटेशन दिए। ट्रैफिक निदेशालय के अधिकारियों ने हादसों की बड़ी वजह मोबाइल को करार दिया और इससे होने वाले हादसों पर चिंता जताई। मगर प्रेजेनटेशन में कहीं इस पर लगाम लगाने की बात नहीं हुई और न ही दिखाई दीं। इसका असर तीसरे दिन यानी 25 अप्रैल को दिखा जब कुशीनगर के दुदही में एक स्कूली वैन सिवान पैसेंजर की चपेट में आ गई।

13 मासूमों की मौके पर मौत हो गई। दर्दनाक घटना के बाद मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी लोगों का विरोध झेलना पड़ा। आनन फानन स्कूली वाहनों की जांच के आदेश हुए। ओवर लोडिंग रोकने के दावे होने लगें लेकिन कार्रवाई ऐसी थी कि 28 अप्रैल सुबह एनएच 24 पर लखीमपुर के नजदीक टाटा मैजिक ट्रक में घुस गई। इस घटना में भी 12 लोगों की मौत हो गई। सात सीटर टाटा मैजिक में इतने लोग कैसे सफर कर रहे थे, इसका जवाब तक पूछने की जहमत किसी ने उठाई। जबकि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री. प्रमुख सचिव परिवहन से लेकर तमाम परिवहन अधिकारी जागरुकता फैला रहे थे। जागरुकता के नाम पर वाकाथन का आयोजन जरूर किया गया लेकिन उसके लिए बच्चों की भीड़ काकोरी और रायबरेली से बुलाई गई। सवाल यह है कि क्या उन स्थानों पर जागरुकता की जरूरत नहीं है। वहां पर आयोजन क्यों नहीं हुआ।

 

नहीं दिखा पुलिस – परिवहन तालमेल

राजधानी या फिर पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी पुलिस व परिवहन विभाग के बीच किसी तरह का तालमेल नहीं दिखा। राजधानी में ही हुए विभिन्न आयोजन में ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी केवल वीआईपी आगमन या उद्घाटन के मौके पर दिखे। जिला सड़क सुरक्षा इकाई के अधिकारी के तौर जिलाधिकारी होते हैं लेकिन परिवहन विभाग ने जिला प्रशासन को इस जागरुकता कार्यक्रम में शामिल करने की जहमत तक नहीं उठाई। खास बात यह है कि मंडलायुक्त – डीएम के बजाए परिवहन विभाग सत्तारुढ़ पार्टी नेताओं को बुलाने में ज्यादा आतुर दिखा। यही कारण था कि  राजधानी में दो आयोजनों में विधायकों को ही मुख्य अतिथि बना दिया गया। जबकि जिन लोगों को जागरुक करना है उन्हें उन्हें दरकिनार कर दिया गया।

मुख्य सचिव की नसीहत भी गई बेकार

परिवहन अधिकारियों के मुताबिक सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव ने बैठक कर सभी संबंधित विभागों को इसमें सक्रिय योगदान करने के निर्देश दिए थे। इसमें परिवहन से लेकर पुलिस तक अधिकारी थे लेकिन कम से जागरुकता सप्ताह में कोई दिखाई नहीं दिया। कुशीनगर हादसा और मुख्यमंत्री की तल्खी के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी हरकत में दिखें, वर्ना उसके पहले के मुख्यालय से सुविधा अनुसार सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा था।

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