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दि राइजिंग न्यूज

फोटो/वीडियो – कुलदीप सिंह

लखनऊ। 

 

मड़ियांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे स्कूल के प्रांगण पर नजर पड़ी तो अचानक अटपटा सा लगा। स्कूल प्रांगण (मैदान) में करीब दर्जन भर बच्चे घास खोद रहे थे। वह स्कूल की वर्दी पहन कर। पास जाकर बच्चों से पूछा गया तो पता चला कि टीचर जी ने मैदान में लगी घास खोदने और सफाई करने को कहा है। हालांकि इस दौरान टीचर कहीं दिखाई नहीं दीं। बात चल रही थीं। बच्चों की फोटो खिंच रही थी, लिहाजा एक शिक्षिका भागती हुई पहुंचीं। पहले तो रौब गालिब करते हुए कहा कि बच्चे श्रमदान कर रहे हैं तो खराबी क्या है। मगर पढ़ने के वक्त बच्चों के श्रमदान और बिना किसी की शिक्षक–शिक्षिका पर तो वह सकपका गई। पहले तो उन्होंने बच्चों के काम करने की तमाम दलीलें दीं और खुद भी इसी तरह का श्रमदान करने के कसीदे पढ़े लेकिन यह नहीं बता सकीं कि आखिर बच्चों के हाथों में खुरपी–कुदाल क्यों थमा दिए गए।

दरअसल, यह तस्वीर राजधानी के मड़ियांव क्षेत्र के सरकारी स्कूल में देखने को मिली। प्रदेश में शिक्षा की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। सरकार एक तरफ बच्चों के लिए स्कूल भेजो अभियान चला रही है। करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। मंत्री, विधायक से लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों को बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का दायित्व दिया गया है लेकिन जिन लोगों को बच्चों को पढ़ाना है, वे उनसे श्रमदान करा रहे हैं। बच्चों के काम करने के बारे में जब वहां मौजूद शिक्षिका से पूछा गया तो वह कन्नी काटती दिखीं। यहां तक उन्होंने अपना नाम तक बताने से इंकार कर दिया।

 

सवालों में शिक्षा व्यवस्था

राजधानी के मड़ियांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की तस्वीर प्रदेश में स्कूलों की दशा बयां कर देती है। खास बात यह है कि प्राथमिक स्कूलों को लेकर प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक तमाम दावें कर रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने तथा शिक्षा के प्रति जागरुक करने के लिए कहा जा रहा है लेकिन हकीकत जो बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, उनसे शिक्षा के अलावा तमाम कार्य कराए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार  और मुख्यमंत्री भले ही बच्चों की शिक्षा को बेहद संजीदा नजर आते हैं लेकिन अफसरशाही और शिक्षा विभाग के घाघ अधिकारियों इस तरफ पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना रवैया अख्तियार किए हुए हैं। नतीजा यह है कि प्राथमिक स्कूल केवल कमाई का जरिया बन कर रह गए हैं।

कराई जाएगी जांच

दूसरी तरफ मड़ियांव में बच्चों से कुदाल –खुरपी से घास खोदवाने तथा सफाई कराए जाने पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जांच कराने का दावा किया है। हालांकि बेसिक शिक्षा अधिकारी उपलब्ध नहीं थे लेकिन विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी टीचर को दंडित किया जाएगा।

 

 

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