Ali Asgar Faced Molestation in The Getup of Dadi

दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ।

 

राजधानी में फर्राटा भर रहीं सिटी बसों के रखरखाव 11 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पहिए से सीएनजी तक की किल्लत बरकरार है। कर्मचारियों को भी वेतन के लाले हैं मगर अधिकारी संसाधनों का ही रोना रो रहे हैं। दरअसल सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी पर बसों के रखरखाव को लेकर लगातार ही सवाल उठते रहे हैं। दर्जनों बसें पहिए न होने के कारण खड़ी है जबकि तमाम बसें उपकरण के अभाव में। खास बात यह है कि शहरी नगरीय परिवहन निदेशालय के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में बसों की स्थिति ज्यादा खराब हुए हैं।

 

प्राधिकरण के मुताबिक बसों के पहिए, सीएनजी की आपूर्ति के लिए धन मुहैया कराया जाता रहा है। इनकी आपूर्ति भी बहाल रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं लेकिन इसके बावजूद धन के अभाव में पहिए तक नहीं मिल रहे हैं। जबकि सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रबंध निदेशक अरिफ सकलैन इस दावे को सिरे खारिज कर देते हैं। वह साफ तौर पर कहते हैं कि निदेशालय द्वारा धन का आवंटन निर्धारित मद के लिए किया जाता है और उसी मद में खर्च होता है। रही बात भुगतान करने की पिछले आठ महीने से निदेशालय से पैसा नहीं दिया था। जो पैसा मिला,उससे बकायेदारी अदा कर दी गई।

उधर नगरीय निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार बीते कुछ महीनों में सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस प्रबंधन को मेटिेंनेस एवं संचालन पर होने वाले अन्य  खर्चो के लिए कई करोड रूपये दिये गये है। बावजूद इसके राजधानी के विभिन्नो मार्गो पर दौडनी वाली सिटी बसें किसी न किसी तकनीकी खामी की वजह से बीच रास्ते  में खड़ी हो रहीं  है।  करोड़ों रूपये मिलने के बाद भी सिटी बसों की हालत समें कोई सुधार नही हुआ है।

 

बीते कुछ दिनों में अलग-अलग जगहों पर बीच रास्ते  में बसें खडी हो गयी। कहीं टायर फट गया तो कहीं कोई अन्यग खामी हो गयी। जबकि अक्टूबर से फरवरी के बीच नगरीय निदेशालय के द्वारा करोडो रूपये दिये गये। नगरीय परिवहन निदेशालय के संयुक्ता निदेशक अजीत सिंह ने बताया कि सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस प्रबंधन की मांग पर स्पे यर पार्ट,गैस एवं कर्मचारियों के वतेन के लिए धन आवंटित किया जाता है। उन्होनने बताया कि अक्टूेबर में सिटी ट्रांसपोर्ट प्रबंधन को दस करोड,जनवरी में 55 लाख एवं फरवरी में 57 लाख रूपये दिये गये।  

स्पेयर पार्टस पर भी सवाल

सिटी बसों की मरम्मत में इस्तेमाल होने वाले स्पेयर्स पर भी सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक अब घटिया स्पेयर तथा ईंजन –मोबिल आयल इस्तेमाल हो रहा है और इस कारण से बसों में दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। बसों को कमी के बावजूद स्टेशन से निकालने के लिए कर्मियो पर दबाव बनाया जाता है और इसी कारण से बसें बीच रास्ते खराब हो रही हैं। इसकी तमाम शिकायतें हुई लेकिन जांच नहीं कराई जाती है।

 

आ सकती हैं हर महीने तीन बसें

सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी के अधिकारियों की मानें तो जितना पैसा रखरखाव पर खर्च किया जा रहा है, उतने में हर महीने तीन नई बसें हर महीने आ सकती हैं। मगर यहां पुरानी बसें ठीक हो पा रही है न नई ही आ रही है। बसों की बदहाल स्थिति के मद्देनजर मरम्मत के नाम पर अंधाधुंध पैसा खर्च हो रहा है और बसें भी बीच रास्ते खड़ी हो रही है।

भुगत रहें लोग

सिटी बसों के खराब होने तथा कम होती संख्या के चलते सबसे ज्यादा परेशानी राजधानी वासियों को झेलना पड़ रहा है। दरअसल राजधानी के ट्रांसगोमती क्षेत्र में सिटी बसें आवागमन का मुख्य साधन हैं। इनकी कमी के चलते कई इलाकों में अवैध वाहनों की भरमार होती जा रही है। दरअसल राजधानी में टेंपो व आटो रिक्शा की संख्या भी सीमित है। इस कारण बिना परमिट वाले वाहन संसाधनों की कमी के कारण तेजी से बढ़ रहे हैं।

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