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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सुभाष मार्ग स्थित रकाबगंज चौराहे के आसपास पर दर्जनों परचून की दुकानों पर सड़क पर ही सजी हल्दी, धनिया-मिर्च टब दिखाई देती है। यह सारे मसाले दिन भर खुले में रहते हैं और इन्हीं की बिक्री हो रही है। इसी तरह से नेहरू क्रास पर सजी रंग की सीजनल दुकानों पर दस रुपये किलो से लेकर सौ रुपये किलो तक दाम वाला अबीर-गुलाल बिक रहा है। इनमें कई रंग बालू आदि डालकर तैयार किए गए हैं। पानी वाले रंग भी इसी तरह से बिक रहे हैं लेकिन प्रशासन को दिखाई दे रहा है न खाद्य सुरक्षा विभाग को। 

दरअसल होली के पर्व पर दूध-खोवा से लेकर घी-वनस्पति तेल आदि की मांग एकदम से बढ़ जाती है। इस कारण से इस सीजन में जमकर मिलावटी सामान खपाया जाता है। आलू, मैदा –आरारोट से तैयार खोवा, केमिकल –यूरिया से तैयार दूध की बिक्री धड़ल्ले से मंडियों में हो रही है। लाखों लीटर दूध राजधानी में खपाया जा रहा है। बाजार में खोये के दाम भी मिलावट के आधार पर ही तय हो रहे हैं। सबसे ज्यादा बिक्री खाद्य तेल, वनस्पति और खाद्य तेलों की है। दरअसल रंग खेलने से पहले सरसों का तेल लगाने का प्रचलन बहुत पुराना है। इस कारण से सरसों के तेल की मांग भी बहुत बढ़ जाती है। यही कारण है कि सस्ते के चक्कर में बाजारो में बड़े पैमाने पर मिलावटी तेल, वनस्पति आदि खपाया जा रहा है।

नाश्ते के सामान की गुणवत्ता पर सवाल

होली के बाजार में चिप्स, कचरी, स्नैक्स आदि 80 रुपये से सवा सौ रुपये किलो तक बिक रहा है। दुकानों के आगे बोरियां सजी है और उसी से बिक्री भी हो रही है। यही हाल हल्दी, मिर्चा, धनिया आदि मसालों की है। इनमें तमाम उत्पादों की खुली बिक्री पर ही प्रतिबंध है लेकिन प्रसासन की उपेक्षा के कारण बाजारों में जमकर इनका कारोबार हो रहा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी टीआर रावत के मुताबिक  यह सही है कि होली में मांग ज्यादा होने के कारण तमाम वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है और लोग भी कुछ पैसा बचाने के चक्कर में घटिया –मिलावटी सामान खरीद लेते है। इसके मद्देनजर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही इन वस्तुओं की भी जांचकी जाएगी।

सेहत के लिए नुकसानदायक

रंग बिरंगे चटकीले दिखे वाले नाश्ते के सामान व रंग आपकी सेहत के लिए नुकसान दायक साबित हो सकते हैं। दरअसल कई बार सामने आ चुका है कि लाभ प्रतिशत बढ़ाने के चक्कर में इनमें खाने वाले रंगों के बजाए कैमिकल युक्त रंग का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में ऐसे रंग जब हमारे शरीर में ज्यादा मात्रा में पहुंचते हैं तो बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इससे बचने के लिए लोगों को खरीदारी के बाद बिल जरूर लेना चाहिए। इससे दुकानदार की जिम्मेदारी फिक्स होती है। दुकानदार भी गड़बड़ सामग्री बेचने से बचता है।

 

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