Actress Neha Dhupia on Her Pregnancy

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

  • हजरतगंज चौराहा। समय करीब एक बजे। सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत यहां पर पुलिस को वाहन चालकों की हेलमेट-सीटबेल्ट की जांच करनी थी। उन्हें जागरुक करना था लेकिन यहां पर पुलिस वाले इलाहाबाद बैंक के गेट के किनारे लगे पेड़ों की छांव में आटो वालों के साथ मसरूफ रहे। वाहन चालक आते जाते रहे लेकिन पुलिस की नजर उन पर नहीं गई। हालांकि कुछ समय के लिए परिवहन अधिकारी व कैडेट पहुंचे तो जांच की औपचारिकता हुई और फिर वहीं उदासीनता।

 

  • सोमवार को शुरु हुए सड़क सुरक्षा सप्ताह में यातायात निदेशालय ने अपने प्रेजेनटेशन में पहली बात सड़क पर अतिक्रमण, रांग साइड से आवागमन, अवैध वाहन और कब्जों को हादसे का कारण बताया गया। वाहन चलाते समय मोबाइल बात करने को हादसे का सबसे बड़ा कारण करार दिया गया लेकिन हकीकत में चौराहे पर पुलिस को इसकी फिक्र रहती ही नहीं है। डालीगंज पुल पर पुलिस ने चौराहे पर एक गुमटी बनवा कर रखा दी है। गुमटी के बाहर की दारोगा जी से लेकर इधर से गुजरने वाले अधिकारियों के लिए कुर्सी रखी जाती है। वहीं सड़क पर रोक तक वाहनों की जांच होती है। मुख्यमार्ग पर रांग साइड ( कंवेनशन सेंटर) की ओर वाहन आते जाते रहते हैं। जाम लगता है तो पुलिस खुद ही रांग साइड से ट्रैफिक चलवाना शुरू कर देती है।

 

दरअसल ये उदाहरण है हर साल सड़क सुरक्षा जागरुकता के नाम पर होने वाली औपचारिकता का। एक तरफ छोटे जिलों में पुलिस व ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी अभियान चला रहे हैं। तमाम कार्यक्रम हो रहे हैं लेकिन वही दूसरी ओर राजधानी में ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह से उदासीन है। खास बात यह है कि परिवहन विभाग ने दस चौराहों पर पुलिस द्वारा जांच किए जाने व जागरुकता के लिए अभियान चलाने का दम भरा था लेकिन हकीकत में वहां केवल औपचारिकता भर हुई। ट्रैफिक पुलिस रोजाना की तरह से ही ड्यूटी करती दिखाई दीं। जबकि परिवहन विभाग के अधिकारी इससे पल्ला झाड़ते दिखें।

 

औपचारिकता बनी जागरुकता

परिवहन विभाग का 29 वां सड़क सुरक्षा सप्ताह महज जागरुकता अभियान बनकर रह गया है। सुबह जरूर बीकेटी के विधायक जागरुकता अभियान शुरू करने पहुंचे लेकिन मुख्य कार्यक्रम के बाद सारा अभियान औपचारिकता भर बनकर रह गया। इतना जरूर रहा है कि परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कई स्थानों पर बिना हेलमेट सीट बेल्ट वालों की जांच की। उन्हें सुरक्षित वाहन ड्राइविंग के लिए स्टीकर –पैम्फलेट दिए मगर पुलिस के लिए यह सब केवल रस्मी ही दिखा। ट्रैफिक पुलिस अपने हिसाब से ड्यूटी करती दिखीं।

 

सड़क सुरक्षा का मकसद लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने के प्रति जागरुक करना है। इसमें चालान- जुर्माने से ज्यादा अहमियत लोगों को सतर्क व जागरुक करने की है ताकि वह हादसे से बचें। सुरक्षित रहें। इसके लिए सभी वर्गों के लोगों को लोगों को जागरुक किया जा रहा है। रही बात प्रवर्तन की तो स्कूलों से लेकर वाहन चालकों तक को जागरुक किया जा रहा है। उसके बाद सघन प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।

अरविंद कुमार पांडेय

अपर परिवहन आयुक्त

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement