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बिना टैक्स-परमिट के ही चल रही हैं सिटी बसें

| Last Updated : 2018-04-07 10:14:29

 

  • आठ साल में नहीं लिए गए परमिट, न भरा टैक्स

  • करोड़ों रुपए का राजस्व बकाया, सीएजी आडिट में लगाई गई आपत्ति


Reality of City Buses Running on Roads of Lucknow


दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

राजधानी सहित प्रदेश के शहरों चल रहीं सिटी बसें बिना परमिट ही फर्राटा भर रही हैं। जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूवल मिशन के तहत वर्ष 2010 में शुरू हुई सिटीं बसें अभी भी बिना परमिट ही चल रही है। इन सिटी बसों पर करोड़ों रुपये का टैक्स भी बकाया है। खास बात यह है कि इन बसों के परमिट न लेने से परिवहन विभाग को भी लाखों रुपये के राजस्व की हानि हुई और हर साल इस पर लेखा महापरीक्षक (सीएजी) द्वारा आपत्ति भी की गई। बावजूद इसके पिछले पांच साल में आश्वासन के अलावा कुछ नहीं किया गया। इसे लेकर एक बार फिर परिवहन विभाग ने नगर विकास विभाग को पत्र भेज कर परमिट शुल्क तथा बकाया टैक्स अदा जमा कराने को कहा है।

 

दरअसल सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि सिटी बसों के परमिट न लेने से विभाग को करीब 12 लाख रुपये के राजस्व की हानि हुई है। इस संबंध में वर्ष 2013 और 2014 में भी सीएजी ने आपत्ति उठाई थीं। लोक लेखा समिति की बैठक में इन बिन्दुओं पर दी गई आख्या में अधिकारियों ने नगर विकास विभाग के अंतर्गत सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा संचालित इन बसों के परमिट का शुल्क जमा कराने का आश्वासन दिया गया था लेकिन करीब चार साल बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। शासन के समक्ष प्रस्तुत सीएजी द्वारा उठाई गई आपत्तियों में एक बार फिर इस प्रकरण को उठाया गया है। इस संबंध में पीएसी (लोक लेखा कमेटी) की बैठक अगले सप्ताह प्रस्तावित है। लिहाजा परिवहन विभाग ने राजस्व हानि के इस बिंदु पर नगर विकास विभाग तथा सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी को पत्र जारी कर बकाया राजस्व अदाकर परमिट लेने को कहा है।

फिटनेस को लेकर भी सवाल

सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा संचालित बसें जब बिना परमिट के चल रही हैं तो फिर उन्हें परमिट कैसे मिल रहा है, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। खास बात यह है कि सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी के अधिकारी बसों के फिट होने की दलील देते नहीं थकते। पिछले दिनों में ही सिटी बसों कई हादसे हुए। कई लोगों की मृत्यु हुई। यात्री परेशान हुए लेकिन अधिकारी बसों के फिट होने की दलील देते रहें। वहीं संभागीय परिवहन अधिकारी का कहना है कि इस बात की जांच कराई जा रही है कि आखिर सिटी बसों का फिटनेस कैसे हो रही है। अगर परमिट नहीं है तो फिर बसों को फिटनेस किस आधार पर जारी की जा रही है। हालांकि परिवहन अधिकारियों का कहना है कि सिटी बसें अर्ध सरकारी है, लिहाजा उनका फिटनेस हो रहा था। हालांकि इस संबंध में पूरे दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।

 

नहीं लिए गए परमिट

सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रबंध निदेशक अरिफ सकलैन ने बताया कि सिटी बसों के परमिट का शुल्क तथा टैक्स अदा नहीं किया गया है। इस प्रकरण को शासन के संज्ञान में लाया गया है। इसके भुगतान के लिए धनावंटन करने की मांग की गई है। जल्द परमिट शुल्क जमा कर दिया जाएगा। इस संबंध में आडिट आपत्ति  प्राप्त हो चुकी है और इस दिशा में काम चल रहा है। जल्द ही इसका निस्तारण कराया जाएगा।



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