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हमारे आंबेडकर, उनके आंबेडकर

Rising At 8am | 14-Apr-2018 | Posted by - Admin

 

  • सियासी दांव पेंच का जरिया बने बाबा साहेब डा. बीआर आंबेडकर 
  • पिछड़ों की हिमायत में दिख रहा है हर दल
   
Reality of Celebrating Ambedkar Jyanti By Indian Politicians

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

भारत रत्न बाबा साहेब बीआर आंबेडकर की जयंती, मगर इस बार माहौल कुछ अलग तरीके का। इस बार आंबेडकर के अनुयायी कुछ इतने प्रेरित दिख रहे हैं कि हर दल ने अपने हिसाब से आंबेडकर की व्याख्या तक कर डाली। कहीं पिछड़े वोटों को लुभाने की सियासत और कहीं पर हाथ से फिसल गए वोट बैंक को दोबारा अपने प्रभाव में लाने की मशक्कत। बहुजन समाज पार्टी से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक सभी दल बाबा साहेब के सबसे बड़े अनुयायी बनने की होड़ में दिखने लगें। यह अलग बात है कि इसी की आड़ में समाज को बांटने या यूं कहे कि भ्रमित करने में भी सभी पार्टियां लगी दिख रहीं है।

 

पिछड़े और दलित वोटों के जरिए अपनी राजनैतिक जमीन को मजबूत करने में जुटी बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भाजपा के आंबेडकर प्रेम को केवल वोटों पाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक दलितों की बात कर रहे हैं। मगर यह सब दिखावा भर है। उन्होंने कहा कि आंबेडकर के नाम पर पांच स्थलों को विकसित करने की दलील देकर भाजपा दलितों की हितैषी बनने की कोशिख कर रही है लेकिन भाजपा की दलितों के सबसे खिलाफ है। मायावती ही नहीं, इस बार समाजवादी पार्टी भी आंबेडकर कुछ ज्यादा गुणगान करती दिखीं।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि डा. आंबेडकर का बलिदान कोई भुला नहीं सकता है। प्रदेश सरकार में दलितों के साथ अन्याय बढ़ा है। प्रदेश की पुलिस उत्पीड़न करन वालों और अपराधियों को संरक्षण दे रही है। यही नहीं, उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के दौरान घटनाओं पर पत्र दिखने वाले राज्यपाल पर भी निशाना साधा और कहा कि शायद राज्यपाल ने उन्नाव की घटना पर भी पत्र लिखा हों। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा डा. आंबेडकर के बनाए गए संविधान के मुताबिक ही चली और आगे भी उसी पर चलेगी। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों हुए दलित आंदोलन के लिए सरकार कुछ जाति विशेष लोगों को इरादतन निशाना बना रही है। प्रदेश में दलित उत्पीड़न के मामलों में बहुत इजाफा हुआ है मगर सरकार केवल अपराधियों को पोस रही है। 

 

वहीं सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी भी इस मौके कहां चूकने वाली थीं। आंबेडकर जयंती के मौके पर आंबेडकर महासभा ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को दलित मित्र सम्मान दिया तो महासभा के संस्थापक सदस्यों में एक एसआर दारापुरी ही विरोध में उतर आए। हजरतगंज में विरोध करते वक्त उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश व केंद्र सरकार हर वर्ग – हर तबके के विकास के लिए काम कर रही है। अपराधियों से कड़ाई से निपटा जा रहा है और अपराधी चाहे जो हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो रही है। उन्होंने भी विपक्षियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो विपरीत स्वभाव के लोग केवल सत्ता हासिल करने के लिए एक साथ दिख रहे हैं। यह केवल मौका परस्ती है और उसका उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने जा रहा है।

ध्रुवीकरण की राजनीति

लोकसभा चुनाव 2019 होने में अभी करीब एक साल का समय है लेकिन इसके लिए सियासी जमीन अभी तैयार होने लगी है। पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनावों में जिस तरह से भाजपा को मत मिले और कांग्रेस –बसपा हाशिए पर पहुंच गई, उसके बाद अब नए सिरे से वोटों के ध्रुवीकरण की तैयारी हो रही है। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में सपा –बसपा गठबंधन का प्रदर्शन नए ध्रुवीकरण का आधार बन रहा है। दरअसल नए समीकरण में समाजवादी पार्टी के परंपरागत यादव - मुस्लिम वोट बैंक में बसपा का दलित –पिछड़ा वोट मिल रहा है तो वह जीत की गारंटी बन रहा है। उपचुनाव में यह बात भी साफ हो गई कि बसपा सुप्रीमो मायावती अपने काडर वोट पर काफी हद तक नियंत्रण रखे हुए हैं और अगर इसी समीकरण के तहत दोनों पार्टियां चुनाव में उतरी तो 2019 में भाजपा को भारी मुश्किल उठानी पड़ सकती है।

 

यही नहीं, पिछले दिनों हुए राष्ट्रव्यापी दलित आंदोलन के बाद भाजपा के खिलाफ पिछड़े संगठनों और दलों का आक्रोश भी मुखर हुआ है। अपने द्वारा ही सवाल उठाए जाने से भाजपा के लिए अब इससे उबरना कहीं ज्यादा मुश्किल दिख रहा है। जबकि विपक्ष इसी बहाने सरकार के खिलाफ माहौल तैयार में जुटा है।

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