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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

 

किसानों की आय दोगुना करने और उन्हें फसल के बढियां दाम दिलाने के सरकार के दावों की कलई एक बार फिर खुल गई है। आलू किसान तो अपनी बेहाली, तंगी और अभाव का रोना रो रहा है लेकिन बिचौलिए अब माटी के मोल खरीदे गए आलू को मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। डेढ़ महीना पहले किसान को आलू की उतनी कीमत भी नहीं मिल रही थी कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने का भाड़ा खर्च निकल पाएं। लिहाजा पूरे प्रदेश में आलू किसान आक्रोशित थे। सरकार ने समर्थन मूल्य में वृद्धि तो कर दी लेकिन किसान की फसल खरीदने का इंतजाम पूरी तरह से नहीं हुआ।

 

नतीजा यह है कि किसानों का आलू कोल्ड पहुंच गया। बिचौलिए और कोल्ड स्टोरेज मालिकों की मिलीभगत के बाद अब यह आलू बीस से 25 रुपये किलो बिक रहा है और आने वाले दिनों में इसके दाम और बढ़ने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। नरही, महानगर, अलीगंज, गोमतीनगर में आलू 25 रुपये किलो बिक रहा है जबकि डालीगंज, चौक, रकाबगंज, टूडियागंज आदि क्षेत्रों में आलू बीस रुपये किलो के भाव बिक रहा है।

अब जरा बाजार पर नजर डालें। अप्रैल अंतिम सप्ताह में आलू के दाम 12 से 15 रुपये किलो थे। बड़ी मंडियों में आलू बीस रुपये का डेढ़ से दो किलो तक बिक रहा था। मगर मई पहले सप्ताह में आलू के दाम बढ़ना शुरु हुए। एक हफ्ते गुजरते ही आलू की कीमत बीस रुपये किलो पहुंच गई। दरअसल, अप्रैल में किसानों का आलू भी मंडियों में पहुंच रहा था, इस कारण से दामों में ज्यादा अंतर नहीं आ पा रहा था। अब किसानों का आलू खत्म हो चुका है। बड़े आढ़ती और कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने जरूर गोदाम भर रखे हैं। अब वही आलू कोल्ड स्टोरेज से निकल कर बाजारों में पहुंच रहा है और उसके मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक आलू के दाम अब कोल्ड स्टोरेज के दामों से ही तय हो रहे हैं और इस कारण से आने वाले दिनों में यह और महंगा हो सकता है।

 

भारतीय किसान यूनियन के नेता हरनाम सिंह वर्मा के मुताबिक आलू दाम में आयी तेजी की मुख्य वजह सरकार की शिथिल मंशा का परिणाम है। इस कारण से किसान तो बेहाल हैं। सारी मेहनत के बाद उन्हें फसल के औने पौने दाम मिले। सरकारी खरीद की खामियों के कारण किसानों को बहुत कम कीमत पर आलू बेचना पड़ा। अब उनसे सस्ता आलू खरीदने वाले ही उसे ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं और जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। इनके ऊपर सरकार का कोई नियंत्रण भी नहीं है। सरकार हर बार इसी तरह के दावे जरूर करती है लेकिन कभी उसके प्रभावी अमल को लेकर गंभीर नहीं होती। लिहाजा हर साल यह स्थिति देखने को मिलती है। उनके मुताबिक अभी पब्लिक जब विरोध पर उतरेगी और प्रशासन –शासन का रुख बदलेगा, यही आलू आधी कीमत पर आ जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इंतजार क्यों किया जाता है।

खाने की थाली में आलू शो-पीस

आलू की बढ़ी कीमतों के बाद अब घर में खाने की थाली में आलू शोपीस बनकर रह गया है। दरअसल इस समय बाजार में मौसमी सब्जियां भी आलू से भी कम कीमत पर हैं। जबकि खाने में सर्वप्रिय आलू की कीमत लगातार बढ़ रही है, लिहाजा अब आलू केवल जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल हो रहा है। मध्यम व निम्न वर्ग के लोगों की थाली से आलू गायब हो चुका है।

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