Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल    

लखनऊ।

 

  • रेडियो पर ट्रांसगोमती के एक जेवर विक्रेता प्रतिष्ठान पर अक्षय तृतीया पर सोने के दाम बाजार भाव से करीब साढ़े चार हजार रुपये कम होने का प्रचार किया जा रहा है। वह भी खुलेआम।

  • चौक के एक कारोबारी के यहां अक्षय तृतीया पर दस ग्राम सोने के दाम 29 हजार 400 रुपये बताकर प्रचारित किया गया। जबकि बाजार का भाव करीब 34 हजार 400 रुपये था।

सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोने के भाव तय हो रहे हैं तो फिर इनता अंतर कैसे। दामों में इतने अंतर के कारण ग्राहक भी कंफ्यूज हो रहे हैं। खास बात यह है कि दामों के इस भ्रम में बाजार में जमकर कालाबाजारी भी हो रही है। लखनऊ सराफा एसोसिएशन भी दामों में इतना फर्क न होने की बात कहता है। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि स्टैंडर्ड सोना 72 प्रतिशत शुद्ध होता है।

 

उस पर मेकिंग चार्ज आदि लगाने के बाद भी दाम अधिकतम दस फीसद तक होते हैं। मगर सीधे तौर दस से पंद्रह फीस दाम कैसे कम हो सकते हैं। इससे सीधा सवाल सोने की क्वालिटी पर उठता है। लखनऊ सराफा एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप अग्रवाल के मुताबिक इस तरह से विज्ञापन करने वाले कारोबारी लोगों के साथ धोखा कर रहे हैं और उनसे सावधान रहने की जरूरत है।

हालमार्किंग में धोखाधड़ी

महानगर के एक सराफा कारोबारी के मुताबिक हाल मार्किंग के नाम पर भी जमकर धोखाधड़ी हो रही है। कई लोग साठ फीसद से कम शुद्धता वाले सोने पर भी 22 व 18 कैरेट की हालमर्किंग कर रहे रहे हैं। सोने की शुद्धता कम हो जाने के कारण उसके दाम अपने आप कम हो जाते हैं मगर कुछ स्थानों पर लोगों के साथ ठगी की जा रही है। महानगर के कारोबारी अजय अग्रवाल के मुताबिक कोई भी ब्रांडेड अथवा बड़ा कारोबारी कभी सोने की कीमत कम होने की बात नहीं करता। वहां शुद्धता की बात होती है लेकिन कुछ बाजारों में जमकर पाउडर से तैयार सोने तथा गलत हाल मर्किंग वाले जेवरों की बिक्री की जा रही है।

हाल मार्किंग होने के कारण लोग भी सहजता से बेवकूफ बन रहे हैं। खास बात यह है कि लखनऊ सराफ एसोसिएशन के महामंत्री प्रदीप अग्रवाल के मुताबिक यह दुकानदार व ग्राहक के बीच का मामला है। सोने के दाम इतने कम नहीं हो सकते हैं और ऐसे सामान बेचा जाने का मतलब है कि सोने की क्वालिटी खरी नहीं है। इस तरह का माल बेचने वाले दुकानदार बिल तक नहीं दे रहे हैं। इस कारण से जिन लोगों को क्वालिटी घटिया होने की बात पता भी चलती है, वह भी कुछ नहीं कर पाते हैं।

बिल लेन में ही समझदारी

आप अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा जेवर आदि की खरीद में खर्च करते हैं। ऐसे में कुछ पैसा बचाने के लिए बिल से पल्ला न झाड़िए। बल्कि जो सामान खरीदें उसका बिल जरूर खरीदें। इस बिल के जरिए आपको सामान की गुणवत्ता और क्वालिटी की गारंटी भी मिलती है और उसे आप पुलिस से लेकर उपभोक्ता अदालत तक में चैलेंज कर सकते हैं। ऐसे में दुकानदार भी आपसे ठगी या धोखा करने से परहेज करेंगे। मामूली से बचत के लिए लोग हजारों रुपये दांव पर लगा देते हैं। इस कारण से जेवर आदि की खरीदारी हमेशा बिल पर करनी चाहिए। उपभोक्ता अदालत के अधिवक्ता के मुताबिक बिल देने के बाद कोई दुकानदार सामान बेचने से मुकर नहीं सकता है। अगर उसने घटिया या कम शुद्धता का सामान दिया है तो न केवल प्रतिपूर्ति राशि बल्कि जुर्माना भी उससे वसूला जा सकता है।

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