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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

विकास की बयार चलने के दावों को प्रदर्शित करने के लिए मंगलवार को पुलिस प्रशासन दिन भर यातायात व्यवस्था पर मशक्कत करता नजर आया। प्रधानमंत्री के आगमन से लेकर इंवेस्टर सम्मिट के आयोजन के मद्देनजर बुधवार को राजधानी में हजारों मेहमान पहुंच रहे हैं। दरवाजे पर मेहमानों के पहुंचने का समय सिर पर आया तो राजधानी पुलिस व प्रशासन को अचानक ही अवैध वाहन भी दिखने लगें। सुबह से ही कई थानों की पुलिस सक्रिय हो गई और धड़ाधड़ आटो रिक्शा –टेंपो बंद किए जाने लगे।

 

खास बात यह है कि आदेश अवैध वाहनों को बंद करने के थे लेकिन गुडवर्क दिखाने की होड़ में पुलिस कुछ ऐसी सक्रिय हुई कि वैध –अवैध सारे वाहन बंद होने लगे। पुलिस की दहशत का कमाल था कि मड़ियांव, पीजीआई और इंजीनियरिंग कालेज आदि क्षेत्रों में आटो रिक्शा व टेंपो अचानक ही दिखना बंद हो गए। कई इलाकों में पुलिस ने बैट्री रिक्शा तक पकड़ने शुरू कर दिए जिसके चलते सड़क पर उनकी गिनती भी बहुत कम हो गई। चौराहे भी चमकने लगे। चौराहों पर बन वाहन स्टैंड गायब हो गए। मुख्य  चौराहों पर फूलों के गमले दिखने लगें।

पुलिस की तेजी का आलम यह रहा कि अपरान्ह दो बजे तक सौ से अधिक आटो रिक्शा –टेंपो बंद किए जा चुके थे। सामान्य दिनों में थाने में जब्त वाहन खड़ा करने के लिए स्थान न होने की दलील देने वाले थानों में भी दर्जनों की संख्या में जब्त वाहन दिखने लगे। खास बात यह है कि हमेशा से ही आटो टेंपो पर कार्रवाई में संसाधन से लेकर नियम तक हवाला देने वाले यातायात पुलिस अधीक्षक रविशंकर ने इसे नियमित कार्रवाई करार दिया। हालांकि इसके पहले कब ऐसे वाहन बंद किए गए, इसकी जानकारी वह नहीं दे सकें। उधर, पुलिस की इस सक्रियता के आटो रिक्शा–टेंपो चलाने वाले लोगों के लिए अगले दिन संकट जरूर खड़ा हो गया है।

 

लखनऊ आटो रिक्शा महासंघ के अध्यक्ष पंकज दीक्षित के मुताबिक आदेश केवल डीजल चालित वाहनों को बंद कराने के दिए गए थे लेकिन पुलिस ने पीजीआई, मोहनलालगंज व इंजीनियरिंग कालेज पर सभी वाहनों को बंद करना शुरू कर दिया था। इससे डरे तमाम वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियां कर दीं। इससे सबसे ज्यादा परेशान वे लोग हुए  जो सुबह आटो –टेंपो से अपने दफ्तर पहुंचे थे लेकिन शाम को वे पैदल हो गए।

चौराहे पर बन गया यार्ड

पालीटेक्निक चौराहे पर पुलिस ने जब्त वाहनों का यार्ड बना दिया। यहां पर दर्जनों वाहन पुलिस ने जब्त किया और उन्हें ओवरब्रिज के किनारे ही खड़ा दिया। इसके चलते चौराहे की काफी सड़क घिर भी गई। ऐसा तब था जब मंगलवार को केवल इंवेस्टर सम्मिट के मद्देनजर ट्रैफिक व्यवस्था का रिहर्सल हो रहा था। अगले दो दिन अब स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। 

 

वही पुलिस, वही चौराहा मगर नया नजारा

राजधानी का व्यस्त डालीगंज पुल। मगर मंगलवार को एकदम बदला हुआ। चौराहे पर तैनात पुलिस कर्मी को नियमित रूप से लगने वाले थे लेकिन खासियत यह थी दोपहर से ही एक भी टेंपो चौराहे व आसपास न दिखाई दिया। इक्का दुक्का टेंपो रुके भी तो वह रिवरबैंक कार्सिंग या फिर पुल के एक छोर पर। उन्हें भी चौराहे से खदेड़ दिया। हालांकि एसपी यातायात संसाधन सीमित होने की हमेशा ही दावा करते रहे लेकिन सवाल यह है कि उन्हीं संसाधनों से मंगलवार को व्यवस्था कैसे दुरुस्त हो गई। इससे प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस की मंशा का फेर जरूर सामने आ गया।

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