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इंतजाम नाकाम, खतरनाक हुई राजधानी की आबोहवा

Rising At 8am | 21-Dec-2017 | Posted by - Admin

 

  • 426 पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स

  • प्रदूषण रोकने के नाम पर केवल खानापूरी

   
Pollution Level increases in Lucknow City

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

प्रदूषण रोकने के लिए केवल वीआईपी इलाकों में पानी का छिड़काव। खास कर मुख्यमंत्री आवास से लेकर राजभवन के बीच। वर्ना बाकी शहर में हर जगह कूड़ा, धूल और अवैध निर्माण। नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण की इस कार्यप्रणाली के चलते तीसरे दिन लगातार लखनऊ प्रदूषण में देश भर में दूसरी पायदान पर कायम रहा। खास बात राजधानी में प्रदूषण के स्तर को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा सदन में दस पुराने वाहनों पर पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों को सड़क पर फर्राटा भर रहे प्रतिबंधित वाहन नहीं दिख रहें।

केंद्रीय प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सर्दियों में ठंड के कारण हवा में धूल – घुएं के कण जमा हो जाते हैं और वातावरण भारी होने की वजह से यह  ऊपर नहीं जाते। इस कारण से स्माग रहता है  और उससे प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसे रोकने के लिए कई बार गाइड लाइन जारी की गईं। जिलाधिकारी से लेकर नगर निगम –लखऩऊ विकास प्राधिकरण तक को गाइड लाइन भेजी जा चुकी है। मगर इस गाइड लाइन  जारी हुए महीना भर हो रहा है लेकिन हकीकत में कोई विभाग सक्रिय नहीं हो पाया है। नगर निगम में धूल रोकने के लिए छिड़काव का प्रावधान किया गया है लेकिन यह छिड़काव केवल राजभवन व मुख्यमंत्री आवास के इर्द गिर्द ही सिमटा है। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण क्रमवार सभी क्षेत्रों में पानी डाले जाने की बात करते हैं लेकिन हकीकत में उन्हें खुद नहीं मालूम कि पिछले तीन दिन में हजरतगंज के अलावा कहां छिड़काव हुआ।

केवल इतना ही नही, पुराने शहर के चौक क्षेत्र में पूरा इलाका मिट्टी के ढेर में तब्दील है। भूमिगत बिजली लाइनें डालने के बेतरतीब तरीके से खोदाई कर दी गई है। जाम के कारण हर वक्त धूल उड़ा करती है लेकिन किसी अधिकारी ने इसे दुरुस्त कराने की कोशिश तक नहीं कीं। यही हाल परिवहन विभाग का है। सड़क हादसों में इजाफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हर बुधवार को सीट बेल्ट और हेलमेट जांच के अलावा परिवहन विभाग आंख मूंद कर प्रतिबंधित वाहनों का संचालन करा रहा है। जबकि प्रदूषण विभाग ने शहीद पथ पर भवन निर्माण सामग्री वाले वाहनों, डीजल चालित अवैध वाहनों को  बंद करने के निर्देश दिए थे। मगर परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्तों तक महीने भर पुराने आदेश पहुंचे ही नहीं।

एलडीए और भी आगे

राजधानी में खतरनाक स्तर (सीवियर) तक प्रदूषित आबोहवा का मुख्य कारण हर इलाके में हो रहा अवैध निर्माण –खनन बताया जाता है लेकिन एलडीए ने अब तक एक भी नोटिस जारी नहीं किया है। जिम्मेदार अधिकारी उसमें भी सत्तारुढ़ पार्टी के नेताओं का वरदहस्त बताकर चुप्पी साध लेते हैं। नतीजा यह है कि गली कूचों से लेकर मुख्य मार्गों तक पर धड़ल्ले से भवन निर्माण सामग्री ढेर हैं। नगर निगम को यह दिखाई नहीं देती और एलडीए के अभियंता कर्मचारी अपनी सुविधा शुल्क लेकर कुछ देखते नहीं। 

“शहर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है तो इसे जिला प्रशासन को खुद संज्ञान में लेना चाहिए। प्रदूषण विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है लेकिन वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य आदि पर कार्रवाई करना अधिकार क्षेत्र के बाहर है। इसके लिए जिला प्रशासन को खुद सक्रिय होना पड़ेगा। इसकी कोई जानकारी दे और उसके बाद कार्रवाई हो यह तो हास्यास्पद बात है।”

डा. अखलाक

क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी

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