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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

सभी सियासी दल दलित और पिछड़ों के लिए आज दम भरते नजर आ रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन पार्टियों की कथनी करनी का प्रमाण किसी भी विभाग में देखा जा सकता है। बिजली विभाग को ही लीजिए। विभाग में दर्जनों अभियंता पिछले एक दशक से सम्बद्ध हैं। उनकी कार्यप्रणाली पर कोई सवाल नहीं है लेकिन वह दूसरी जातियों के हैं। लिहाजा पिछली सरकार के समय से ही समबद्ध हैं। जबकि तमाम ऐसे जुगाड़ू अभियंता जो जेल तक गए।

कई जांचे उनके खिलाफ हैं, वे मुख्य अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता पद तक पहुंच गए। सवाल यह है कि क्या योग्यता भी जाति देखकर ही आंकी जाती है।

उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिशएन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक हकीकत यही है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तक के कार्यकाल में जो कुछ हुआ, कहीं छिपा नहीं है। आज दलितों का आक्रोश फूट रहा है तो सब दलितों को अपना कहने को आतुर हो रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि जो लोग योग्य है, उन्हें काम तक तो दिया नहीं जा रहा है। उन्होंने बिजली विभाग, रोडवेज, सिंचाई विभाग जैसे सभी विभागों में कमोबेश हालात ऐसे ही हैं।

तमाम अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता जीवन भर अटैत पोस्ट पर दफ्तरों मे तैनात रहें और दो चार साल में इनका रिटायरमेंट भी हो जाएगा। सवाल यह है कि आखिर इनका दोष क्या है। अब माहौल बदला है और दलित-पिछड़ों रिझाने में सभी लगे हैं लेकिन यह भी केवल वक्ती और सियासी है।

अब जरा गौर करें। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में ही करीब एक दर्जन पिछड़े-दलित जाति के अभियंता सालों से अटैच पोस्ट पर हैं। इन्हें फील्ड में तैनाती क्यों नहीं दी गई, इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। प्रबंधन भी इस सवाल पर चुप्पी साध लेता है मगर दागी और जुगाड़ू मनचाही पोस्टिंग पा रहे हैं।

फिर निकला प्रमोशन में आरक्षण का जिन्न

प्रमोशन में आरक्षण का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। दलित और पिछड़े वोटों को साधने के लिए एक बाऱ सियासी दल इसकी पैरवी करते दिख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रमोशन में आरक्षण को बहुजन समाज पार्टी सरकार के दौरान हरी झंडी मिली थी और उसके बाद पिछड़े व दलित अभियंता परिणामी ज्येष्ठता का लाभ पाकर उच्च पदों पर प्रोन्नत कर दिए गए थे, लेकिन बाद में न्यायालय में यह मामला पहुंचा और उसे लेकर अभियंताओं का ही एक धड़ा इसके विरोध में था।

समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान यह इसे खारिज कर दिया और  प्रोन्नत हुए अभियंताओं का डिमोशन भी हुआ। कुछ समय तक मुख्य महाप्रबंधक और मुख्य अभियंता जैसे पदों पर आसीन अधिकारी फिर सेवा प्रबंधक या अधीक्षण अभियंता पदों पर पहुंच गए। इसके अलावा माहौल बदलने पर जो लोग फील्ड में तैनात थे वह खड्डी लाइन पर पहुंच गए। यानी दफ्तर से सम्बद्ध  हो गए।

यह हालात अभी जारी है। अब वोटों बैंक की सियासत ने इसे फिर हवा दे दी है। नतीजा यह है कि एक बार फिर अभियंता का एक समूह आंदोलन की राह पर चल पड़ा है।

सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

सव्रजना हिताय समिति ने बदले सियासी हालातों को देखते हुए सरकार को चेतावनी तक दे डाली है कि सरकार ने अगर प्रोन्नति में आरक्षण को दोबारा बहाल करने का प्रयास किया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। समिति ने इसके विरोध में 17को दिल्ली में राष्ट्रव्यापी रैली करने की घोषणा कर दी है।

समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में कहा गया कि 17 जून 1995 को पहला बार पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए पहली पार संविधान संशोधन किया गया था। इसलिए 17 जून को काला दिवस मनाया जाएगा। इसके खिलाफ सांसदों और जन प्रतिनिधियों को को ज्ञान दिया जाएगा। उसके बाद संसद के मानसून सत्र के के दौरान दिल्ला में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा।

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