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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

आदेश एक- सवारी वाहनों में ओवर लोडिंग और फिटनेस की नियमित और सख्त जांच की जाए।

आदेश दो- चौपहिया वाहनों से क्रैश बेरियर हटवाए जाएं।

आदेश तीन- वाहनों की नंबर प्लेट मानक के अनुरूप हों। कलात्मक नंबर प्लेट पर चालान हों।

 

 

ये तीन आदेश परिवहन विभाग में पिछले दिनों में जारी किए हैं। नंबर प्लेट के आदेश को छोड़ दें तो बाकी  आदेशों को महीनों बीत चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग के अधिकारियों के पास बताने को कुछ नहीं है। कहने को सरकार सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुकता बढ़ाने तथा प्रवर्तन कार्रवाई को सख्त करने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत में अधिकारी ढेला भर काम नहीं कर रहे हैं।

प्रवर्तन के नाम पर केवल हफ्ते में एक दिन (बुधवार) को हेलमेट सीट बेल्ट जांची जा रही है और शासन के निर्देश आने के बाद खनन ओवर लोडिंग। इसके अलावा प्रवर्तन के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है।

 

इससे भी आगे परिवहन विभाग के अधिकारी हैं। अब जरा राजधानी की सम्‍भागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन विदिशा सिंह का तर्क सुनिए। उनका कहना है कि राजधानी व्‍यापक क्षेत्र है। कर्मचारियों की कमी के चलते हर जगह अभियान चलाना मुश्किल होता है। बावजूद इसके कार्यवाही होती रहती है। व्‍यापक स्‍तर पर चेकिंग अभियान चलाने के लिए पुलिस विभाग से मदद ली जायेगी, लेकिन पिछले डेढ़ साल में परिवहन विभाग पुलिस से मदद नहीं ले पाया।

एक-आध बार पुलिस ने सहयोग करने में तत्परता दिखाई तो मुस्तैद अधिकारियों ने पुलिस के साथ काम करने में अपनी व्यस्तता का हवाला दे दिया।

 

 

अब विभाग ने वाहनों पर तरह-तरह की नंबर प्लेट पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अधिकारियों के पास कार्य योजना है न समय। कर्मचारियों की कमी तो लगातार बताई जा रही है और साथ ही इसमें चालान राशि बहुत कम होने के कारण अधिकारी भी सुध नहीं रहे हैं।

 

 

चलते-फिरते बंकर बन गए हैं टेंपो

राजधानी में फर्राटा भरने वाले अधिसंख्य टेंपो चलते-फिरते बंकर नजर आते हैं। फ्रंड ग्लास के सामने बड़े-बड़े एंगल, बॉडी पर तीन तरफ भारी एंगल। चपेट में कोई आए तो वैसे ही घायल हो जाए। मगर परिवहन विभाग को दिखाई नहीं देता। अंदर सवारियां सात के बजाए कम से कम 12। मगर मजाल है इनका चालान हो जाए। नियमों की बात करने वाले अधिकारी केवल अपनी जेब की फिक्र में ज्यादा व्यस्त रहते हैं जबकि सड़क पर इनका शिकार आम लोग बन रहे हैं।

 

 

 

नंबर प्लेट बन गई इश्तहार

वाहनों में नंबर प्लेट का रंग सफेद और उस पर काले रंग से स्पष्ट नंबर लिखवाने का नियम है लेकिन फैशन में नंबर प्लेट अब इश्तहार बन गई। तमाम वाहनों पर नंबर प्लेट सफेद या काले रंग के बजाए भाजपा के रंग में रंगी दिखाई देती हैं। पंजीयन नंबर 214 राम बन गया है तो 8055 बास। 571 नंबर झा हो गया है तो 4061 योगी। मगर इस पर रोक लगाने वाले ही ढुलमुल हों तो फिर कार्रवाई की उम्मीद भी नहीं दिखाई देती है।

 

 

बस सौ रुपये का चालान

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) बीके सिंह के मुताबिक नंबर प्लेट दोषपूर्ण होने पर चालान महज सौ रुपये का है। चालान बहुत कम राशि का होने के कारण लोगों में डर नहीं रहता है। इस कारण से इस प्रवृत्ति पर लगाम नहीं पा रही है।

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