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वफादारी छूटी, गुनाह न छूटे

     
  
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  • सपा छोड़ने के बावजूद बुक्कल नवाब को नहीं मिली रियायत
  • तीस दिन में तोड़ने होंगे तीनों अवैध अपार्टमेंट

Order: Illegal Property will be Destroyed by Bukkal Nawab in 30 Days

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

  

चिरपरचित कहावत है धोबी का..., घर का न घाट का। कुछ यही हालत समाजवादी पार्टी से अपनी वफादारी का हिसाब किताब कर भाजपा में शामिल होने वाले पूर्व एमएलसी मजहर अली खां उर्फ बुक्कल नवाब का है। घंटाघर के नजदीक बंधे किनारे बनाए गए तीन अपार्टमेंट के अवैध बेसमेंट व आवासीय अपार्टमेंट को उन्हें खुद तीस दिन में तोड़ना है। मंडलायुक्त ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।

वहीं, फर्जीवाड़ा कर गोमती नदी की डूब की जमीन का मुआवजे की वापसी की तलवार भी उनके ऊपर लटकी हुई है। इसके लिए दी गई मियाद पूरी हो चुकी है और अब प्रशासन का चाबुक उन पर कभी भी चल सकती है।

 

 

दरअसल, बुक्कल नवाब ने समाजवादी पार्टी में एमएलसी रहते हुए अपने प्रभाव के बूते हुसैनाबाद में बंधे किनारे तीन अपार्टमेंट बना लिए। सत्ता के नजदीकी होने की वजह से उन पर कार्रवाई करने से एलडीए भी चुप्पी साधे रहा। सरकार बदली तो आवास मंत्री सुरेश पासी ने हुसैनाबाद के निरीक्षण के दौरान इन अपार्टमेंट की जांच के आदेश दे दिए थे और जांच में यह मानकों के विपरीत एवं अवैध पाए गए। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने तीनों अपार्टमेंट को सील कर दिया और ध्वस्तीकरण के आदेश दे दिए थे।

 

 

इसके खिलाफ बुक्कल नवाब ने मंडलायुक्त के यहां अपील की थी। मंडलायुक्त एके गर्ग के समक्ष सुनवाई में बुक्कल ने अवैध निर्माण को स्वीकार करते हुए रियायत की दरयाफ्त की थी लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। मंडलायुक्त ने तीस दिन में बुक्कल नवाब को खुद ही अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। ऐसा न होने पर उनके निर्माण एलडीए ध्वस्त करेगा। उधर, एलडीए वीसी पीएन सिंह ने भी कहा कि तीस दिन में अवैध निर्माण स्वंय ध्वस्त न होने पर एलडीए द्वारा उसे गिराया जाएगा।

 

 

फर्जी मुआवजे की प्रतिपूर्ति की तलवार

गोमती नदी की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी मिल्कियत करार दे, पिछले सरकार में करीब आठ करोड़ रुपये मुआवजे के मामले की तलवार भी बुक्कल नवाब पर लटकी हुई है। उन्हें 6.94 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कराने का नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके लिए उन्हें करीब एक महीने का वक्त भी दिया गया था। अब वह मियाद भी पूरी हो चुकी है लेकिन फिलवक्त पैसा जमा नहीं हुआ है। प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में जल्द रिमांइडर जारी किया जाएगा और उसके बाद कुर्की द्वारा उनसे राजस्व वसूली की जाएगी।

 

 

काम न आई गद्दारी

बुक्कल नवाब की समाजवादी पार्टी से गद्दारी की मुख्य वजह सरकारी राजस्व की वसूली और अवैध निर्माणों को बचाना था लेकिन अब वह उसमें कामयाब नहीं होते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि एमएलसी पद छोड़ कर मुख्यमंत्री के प्रति अपना समर्पण दिखाने का उनका ड्रामा भी चलता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा के नेताओं के मुताबिक बुक्कल नवाब ने पार्टी में आने के वक्त भी इस तरह की कोई मांग नहीं रखी थी और न ही सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया था। ऐसे में उन्होंने गलत किया है तो उसमें कानून अपना काम करेगा।



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