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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

आगामी लोकसभा चुनाव में केंद्र में सत्तारुढ़ भाजपा को शिकस्त देने के लिए विपक्षियों के संयुक्त गठबंधन की जमीन पुख्ता नजर आने लगी है। विपरीत और परस्पर विरोधी रहें दल एक दूसरे लिए कुर्बानी देने को भी तैयार दिख रहे हैं। मकसद सिर्फ भाजपा को सत्ता से दूर करना भर है। इसके लिए समाजवादी पार्टी बहुजन समाजपार्टी को ज्यादा सीटें देने पर भी तैयार है। यानी गठबंधन में किसी तरह का खलल न आने पाएं और सारे सहयोगी एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करें।

 

दरअसल प्रदेश में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना संसदीय सीट पर उपचुनावों में जीत से खुश विपक्षी गठबंधन अब लोकसभा चुनाव में भी इसे जीत को बनाए रखना चाहता है। लिहाजा सभी दल एकजुट होकर गठबंधन को लेकर गंभीरता के साथ मंथन कर रहे हैं। राजनैतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि विपक्षी एक जुट होकर भाजपा के सामने आते हैं तो भाजपा के लिए 2019 में अपनी पूरी जीत को कायम रख पाना मुश्किल होगा। इसका कारण है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी बड़ा काडर वोट है। पिछले चुनावों में अगर इन वोटों को जोड़ कर देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी से कहीं ज्यादा हैं। इन दोनों पार्टियों के एक हो जाने से वोट भी बढ़ेंगे। इसमें कुछ प्रतिशत वोट नहीं भी मिला तो भी भाजपा के लिए जीत हासिल करना मुश्किल होगा।

सूत्रों के मुताबिक विपक्ष के एकजुट होने से भाजपा खेमे में सब कुछ सामान्य नहीं है। दरअसल भाजपा के ही तमाम नेता सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। पार्टी की दलित सांसद सावित्री बाई फुले तो सरकार के खिलाफ लगातार बयान दे रही है। केंद्र सरकार संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ का आरोप लगा रही है। वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर छह –छह महीने के लिए हर जाति से मुख्यमंत्री बनाए जाने की दलील दे रहे हैं। ऐसे में भाजपा के लिए विपक्षियों से निपटने से कहीं ज्यादा अपने ही नेताओं को अनुशासित करना है। राम मंदिर को लेकर संत समाज की नाराजगी भी आने वाले समय में भाजपा पर भारी पड़ सकती है।

 

ध्रुवीकरण को हवा

लोकसभा चुनाव अगले साल होने हैं लेकिन इसके लिए वोटों के ध्रुवीकरण की कवायद अभी से शुरू हो गई है। दलितों को लुभाने के लिए भाजपा ने प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था लागू करने का दावा किया। वहीं आरक्षण में भी वर्गीकरण कर अति दलित लोगों को फायदा देने की भी कवायद शुरु हो चुकी है। दूसरी तरफ विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की कवायद में लगा है। प्रमोशन में आरक्षण दोबारा लागू करने की बात कहकर भाजपा ने अपने ही वोट बैंक (जनरल कटेगरी) को आहत कर दिया है और उसकी मुखालफत भी शुरू हो गई है। हालांकि भाजपा नेता इसे बेबुनियाद करार देते हैं। भाजपा प्रवक्ताओं के मुताबिक जो पार्टियां सालों से एक दूसरे की मुखालफत करती हैं, उनका गठबंधन कैसा होगा, यह समझा जा सकता है। उनके मुताबिक उपचुनाव को देखते हुए नई रणनीति के साथ 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा। विपक्ष के किसी भी पैंतरें को सफल नहीं होने दिया जाएगा।  

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