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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

राजधानी के चिकन उद्योग को भले ही दुनिया भर में शोहरत हासिल है लेकिन सरकारी स्तर पर जमान  से उपेक्षा का पात्र है। हालांकि विश्व पटल पर लखनऊ की पहचान यहां के चिकन वस्त्रों से ही मिलती है लेकिन इस व्यवसाय में लगे लोगों को कभी सरकारी प्रोत्साहन मिला न तवज्जो। यही कुछ हाल मुरादाबाद के पीतल उद्योग और अलीगढ़ के ताला उद्योग  का भी है। मगर अब सरकार इन उद्योगों की ब्रांडिंग की तैयारी कर रही है। यानी जिले को उसके कुटीर उद्योग के जरिए अलग पहचान की तैयारी का जारी है। मकसद इसका देश के सबसे बड़े सूबे को विकास की मुख्यधारा में जोड़ना है। इसके लिए जिलों के किसी एक प्रचलित उद्योग काम की ब्रांडिंग करना और उसके लिए बाजार तैयार करना है।

शासन के सूत्रों के मुताबिक गुजरात की तर्ज पर ही उत्तर प्रदेश में भी विकास को गति देने के लिए सरकार  वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना सरकार तैयार कर रही है। दरअसल देश में 16 फीसद आबादी वाला उत्तर प्रदेश विकास के मामले में कहीं पिछड़ा है। यहां पर प्रति व्यक्ति आय गुजरात के मुकाबले एक तिहाई ही है। आबादी के सापेक्ष में प्रदेश का देश की जीडीपी में योगदान भी बहुत कम है। विकास के लिए बन रही योजना में प्रतापगढ़, अमेठी से लेकर सहारनपुर, रामपुर तक सभी जिले शामिल हैं। सरकार जिलों में उद्योगों के विकास के लिए काम करेगी और वहां पर तैयार होने वाले उत्पादों की ब्रांडिंग करेगी और उनके बाजार मुहैया कराएगी। इसका सीधा असर इन व्यवसायों में लगे लोगों पर पड़ेगा और इनकी बिक्री व कारोबार बढ़ने से देश व प्रदेश सरकार को भी राजस्व ज्यादा मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक इस योजना की शुरुआत 24 जनवरी को होने वाले उत्तर प्रदेश दिवस पर की जाएगी।

बिस्कुट के लिए पहचाना जाएगा अमेठी

नेहरु परिवार की पारंपरिक सीट होने की पहचान के साथ दुनिया भर में जाना जाने वाला अमेठी अब बिस्कुट नगरी के तौर पर जाना जाएगा। वन प्रोडक्ट वन डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत सरकार यहां पर बिस्कुट निर्माण उद्योग को प्रोत्साहन देने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में अमेठी में बिस्कुट बनाने के दो बड़े कारखाने हैं। इसके अलावा जगदीशपुर में भी बिस्कुट निर्माण की पांच दर्जन से अधिक फैक्ट्रियां है। सरकार अब इस जिले की पहचान बिस्कुट उत्पादक जिले के तौर पर करने के लिए मशक्कत कर रही है।

दमकेगा सहारनपुर का फर्नीचर

इसी क्रम में सहारनपुर में लकड़ी के काम को भी सरकार प्रोत्साहित करेगी। उसके अंतरराष्ट्रीय बाजार खोजेगी। ताकि कारोबारियों द्वारा तैयार माल आसानी के साथ विदेशों तथा देश में बड़े शहरों तक पहुंच सकें। इससे कारोबार में लगे हजारों परिवार की आय में वृद्धि होगी और उससे उनका जीवन स्तर भी कहीं ज्यादा बेहतर होगा। 

 

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