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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

इस बार सर्दियों में बैंड बाजे सुनाई देंगे न ही बारातें होंगी। ग्रहों की दशाओं के चलते ऐसा होगा। उधर, सर्दियों में सहालग न होने के कारण सबसे ज्यादा चिंतिंत व्यापारी है। कारण है कि सहालग के मौसम में तकरीबन सभी सामानों की खरीदफोरख्त होती है और कारोबार बढ़ जाता है। कारोबारियों को भी सहालग शुरु होने का इंतजार रहता है लेकिन इस बार सर्दियों में ऐसा नहीं है।

 

पंडित शिवशंकर पांडेय के मुताबिक इस बार 31 अक्टूबर को गुरु अस्त हो रहा है। इस कारण से अक्टूबर में विवाह की सहालग नहीं होंगी। इसी तरह से नवंबर महीने में शुक्र अस्त होंगे। इन दोनों ही ग्रहों के अस्त रहने के कारण ही इस बार सर्दियों में सहालग नहीं हो रही है। महज नवंबर दिसंबर में तो बस 15 दिसंबर को सहालग हो सकती है लेकिन वह भी बहुत अच्छी नहीं है। कारण है कि उसी दिन से खरमास लग जाएगा। ऐसे में केवल शारदीय नवरात्र के दौरान ही विवाह होंगे। उसके पहले पितृपक्ष होंगे। यानी इस साल केवल जुलाई तक ही सहालग है। सर्दियों में सहालग ने होने के कारण सबसे ज्यादा चिंता में व्यापारी ही दिखते हैं। कारण है कि सहालग में थोक बाजार हो या फिर फुटकर बाजार हर तरफ बढ़िया खरीदारी होती है। इस दौरान सभी तरह की चीजों की खरीद होती है और बाजार में खासी तेजी दिखाई देती है लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं देखने को मिलेगा।

बाजार को झटका

लखनऊ सराफा एसोसिएशन के संरक्षक कैलाश चंद्र जैन तथा महामंत्री प्रदीप अग्रवाल के मुताबिक आभूषणों व जेवरों की सबसे ज्यादा बिक्री सहालग में ही होती है लेकिन इस बार सहालग बहुत ही कम है। इस कारण से इस बार इनकी बिक्री प्रभावित होना स्वाभाविक है। रेडीमेड वस्त्रों के कारोबारी बलवीर सिंह अरोड़ा के मुताबिक सर्दियों के मौसम में सहालग के चलते बाजारों में जमकर खरीदारी होती है। शादी आदि के मौके पर बच्चों से लेकर हर उम्र के लोगों के वस्त्रों की खरीदारी होती है। इस बार सर्दियों में क्रेज केवल दीपावली पर्व का ही रहेगा। अन्यथा उसके बाद सीजनल बाजार में जो चमक दिखे। लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्र के मुताबिक सहालग को केवल इलेक्ट्रानिक्स, कपड़ों या जेवर से नहीं देखा जा सकता है। वैवाहिक समारोहों के दौरान सूप से लेकर पत्तल तक की डिमांड होती है और उनकी बिक्री होती है। आसापस के ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति राजधानी से ही होती है और सहालग न होने के कारण इसका असर थोक बाजारों पर भी दिखेगा। कारण है कि जब डिमांड ही नहीं होगी तो व्यापारी खरीदेगा क्यों।

जुलाई बाद दिखेगा सन्नाटा

कारोबारियों के मुताबिक इस बार जुलाई में सहालग समाप्त होने के बाद बाजारों में सन्नाटा ही दिखेगा। कारण है कि उसके बाद सहालग है ही नहीं। व्यापारी नेता हरिश्चंद्र अग्रवाल के मुताबिक जुलाई में मानसून के चलते बाजारों में बहुत तेजी नहीं रहती है। उसके बाद फिर क्रेज नवरात्र, दीपावली और सहालग होता है। इन तीनों के आसपास होने के कारण ही बाजारों में तेजी देखने को मिलती है लेकिन इस बार शायद से नहीं होगा। इस काऱण से वर्ष 2018 के उत्तरार्ध में बाजारों में मंदी ही दिखने की आशंका है।

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