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अब नागरिक खुद ही रोक सकेंगे ध्‍वनि प्रदूषण

| Last Updated : 2018-02-26 09:32:31
  • ऐप के जरिए आम लोगों से निगरानी का तंत्र

  • यूपी डेस्‍को के साथ विकसित किया जा रहा ऐप 


Mobile App for Noise Pollution Problem


दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ। 

 

बढ़ते ध्‍वनि प्रदूषण पर न्‍यायालय से लेकर सरकार तक रोक लगाने का प्रयास कर रही है, लेकिन आपेक्षित परिणाम नहीं आ रहे हैं। अब आम लोग खुद ही ध्‍वनि प्रदूषण पर रोक लगा सकेंगे। इसके लिए उत्‍तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक मोबाइल ऐप विकसित कर रहा है। जल्‍द ही यह ऐप विभाग की वेबसाइट पर मौजूद होगा। इसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी होगी। इस तरह ध्‍वनि प्रदूषण से निपटना भी आसान हो जाएगा और लोगों को समस्‍या का समाधान भी होगा। 

उच्‍च न्‍यायालय और सरकार के आदेश के बाद ध्‍वनि विस्‍तारक यंत्रों पर बिना अनुमति के बजाने पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद भी कठोरता से पालन नहीं हो पा रहा है। इसी से निपटने के लिए उत्‍तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सरकारी संस्‍था यूपी डेस्‍को की सहायता से मोबाइल एप विकसित कर रही है। मुख्‍य प्रदूषण पर्यावरण अधिकारी अमित चंद्रा ने बताया कि यूपी डेस्‍को के साथ कई चरणों की बैठक हो चुकी है।

बातचीत पूरी हो चुकी है और अगले सप्‍ताह तक इसे विभाग की वेबसाइट http://www.uppcb.com पर अपलोड कर दिया जाएगा। यहां से कोई भी व्‍यक्ति इसे फ्री में डाउनलोड करते हुए खुद ही आसपास के ध्‍वनि प्रदूषण को जांच सकते हैं। इस ऐप से प्रिंट आउट भी लिया जा सकेगा जो विभाग द्वारा स्‍वत: ही मान्‍यता प्राप्‍त होगा। प्रिंट आउट के जरिए संबंधित क्षेत्र के मजिस्‍ट्रेट से कार्रवाई कराई जा सकेगी। 

शासनादेश में मानक-

ध्‍वनि प्रदूषण नियम 2000 के अनुसार रिहायशी, औद्योगिक, वाणिज्यिक और शांत क्षेत्रों में दिन-रात के समय में अधिकतम ध्‍वनि तीव्रता को निर्धारित किया गया है। रिहायशी क्षेत्रों में दिन के दौरान 55 और रात में 45 डेसीबल,  औद्योगिक क्षेत्रों में दिन के समय में 75, रात में 70 डेसीबल, व्‍यावसायिक क्षेत्रों में दिन में 65, रात में 55 डेसीबल, और शांत क्षेत्रों के लिए दिन में 50 और रात के लिए 40 डेसीबल ध्‍वनि तीव्रता को निर्धारित किया गया है। इसके बाद भी मानकों का पालन नहीं हो पा रहा है।

इसलिए जरूरी हुआ ऐप-

ध्‍वनि प्रदूषण मापने के लिए विभाग के पास भले ही सीमित संसाधन हों, लेकिन बीते डेढ़ महीने में किसी पर भी कार्रवाई नहीं हुई। राजधानी में इस बात की पुष्टि क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी डॉ राम करण ही कर रहे हैं, जबकि पूरे शहर में ध्‍वनि प्रदूषण का स्‍तर खतरे से काफी ऊपर है। जब यह हाल लखनऊ का है तो अन्‍य जनपदों की स्थिति आसानी से समझी जा सकती है। इसी से निपटने के लिए इस तरह के ऐप की आवश्‍यकता पड़ी, जिससे कोई भी अपने क्षेत्र के ध्‍वनि प्रदूषण को माप कर उसके खिलाफ कार्रवाई कर सके। ऐप के प्रिंट आउट को विभाग के अधिका‍री भी नकार नहीं सकेंगे। इसलिए निकट भविष्‍य में ध्‍वनि प्रदूषण के खिलाफ तेज कार्रवाई देखने को मिल सकती है। 

“ध्‍वनि प्रदूषण मापने के उपकरण बेहद सीमित मात्रा में हैं। इससे निपटने के लिए जल्‍द ही एक मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा। इस ऐप के जरिए कोई भी व्‍यक्ति अपने मोबाइल में इंस्‍टॉल करने के बाद आसपास के ध्‍वनि प्रदूषण को जांच सकेगा। इससे प्रिंट आउट भी लिया जा सकेगा। इसी के आधार पर कार्रवाई भी होगी।”

 अमित चंद्रा

मुख्‍य पर्यावरण अधिकारी, उ.प्र.

 



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