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करारी हार के बाद जीएसटी प्रहार

| Last Updated : 2018-03-17 10:27:12

 

  • विश्व बैंक ने भारत लागू जीएसटी को बताया सबसे जटिल
  • कारोबारी शुरु से ही कर रहे इसका विरोध 

Merchants Complaints over GST in India


दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

लोकसभा चुनावों में बंपर जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार को अब उपचुनावों में हार के साथ ही जीएसटी को लेकर प्रहार भी झेलने पड़ रहे हैं। विश्वबैंक ने अपनी रिपोर्ट में भारत में जीएसटी की प्रक्रिया को सबसे जटिल बताया है। विश्व बैंक के मुताबिक विश्व में केवल पांच देशों में ही जीएसटी की पांच दरें हैं। इसके अलावा भारत में कई उत्पाद इससे भी बाहर हैं यानी उन पर टैक्स की दरें राज्य अथवा केंद्र सरकार तय करते हैं। खास बात यह है कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू के वक्त से ही इसकी जटिलता को लेकर देश भर में व्यापारी विरोध में थे। टैक्स प्रक्रिया के जटिलता के कारण व्यापारी आज भी खुश नहीं है। वैसे इसका अंदाजा पिछले दिनों हुए गुजरात चुनाव में भी देखने को मिला था। हालांकि वह भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने में जरूर सफल हुई लेकिन उसे चुनाव के ठीक पहले जीएसटी में संशोधन करने पड़े थे।

 

सरकार ने एक देश एक टैक्स की अवधारणा को साकार करने की मंशा से जीएसटी लागू किया था। नोटबंदी के करीब सात महीने बाद सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया। खास बात यह है कि जीएसटी लागू होने के बाद पहला झटका सरकार को जीएसटी पोर्टल के जरिए लगा जब पोर्टल ही ओवरलोड होने से हैंग होने लगा। इसी तरह से ई वे बिल के ले मसौदा अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हो सका है। केवल सिस्टम ही नहीं बल्कि वर्तमान में तो केंद्रीय व राज्यस्तरीय अधिकारियों के बीच ही काम को लेकर विवाद जारी है। यानी सरकार करीब नौ महीने बाद अभी पूरा मैकनिज्म तक विकसित नहीं कर सकी है। इसे लेकर दोनों की संवर्गों के अधिकारियों टकराव जारी है और इसका पूरा फायदा टैक्सचोर उठा रहे हैं। खास बात यह है कि जीएसटी लागू होन के बाद सरकार का राजस्व भले ही नहीं बढ़ा है लेकिन अधिकारियों की जेब जरूर भारी होने लगी है।

(अमरनाथ मिश्र)

जीएसटी को लेकर विश्वबैंक की रिपोर्ट पर लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री तथा उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के संसदीय महामंत्री अमरनाथ मिश्र का कहना है कि व्यापारी तो शुरू से ही जीएसटी की जटिलताओं का विरोध कर रहे थे। सरकार अरबो रुपये जीएसटी पोर्टल खर्च दिए लेकिन वह कितना कारगर साबित हो रहा, इसे कभी नहीं देखा गया। हालांकि सिस्टम की दिक्कतों को नजरअंदाज कर व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इसके कारण व्यापार करना जटिल हो गया है।

 

(संजय गुप्ता)

उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता के मुताबिक जीएसटी लागू होने के साथ ही व्यापारी समस्याएं झेल रहे हैं। पहले जीएसटीएन पोर्टल की समस्या और उसके बाद विभिन्न टैक्स दरों को लेकर दिक्कतें। व्यापारियों को व्यापार से ज्यादा समय अपनी लेखा-बही तैयार लगने में जाया करना पड़ रहा है। ई वे बिल लागू करने के कारण व्यापारियों का शोषण और बढ़ गया है।

(जितेंद्र सिंह चौहान)

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के संगठन मंत्री व स्टेशनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक जीएसटी की अनियमित दरों के कारण हर वर्ग के व्यापारी  परेशान हैं। सिस्टम काम नहीं कर रहा है और व्यापारियों को प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया। ऐसे में केवल व्यापारियों का उत्पीड़न और दोहन हो रहा है। इसका परिणाम भी आने वाले समय जरूर देखने को मिलेगा। स्टेशनरी के थोक कारोबारी नीटू सेठी के मुताबिक देश में एक तरफ बच्चों को निशुल्क और सस्ती सुलभ शिक्षा की बात होती है लेकिन बच्चों की कापी-पेसिंल, स्टेशनरी कलर –वर्कबुक आदि में ही टैक्स दरों की इतनी विषमता है कि आम आदमी के लिए बच्चों की कापी किताब खरीदना महंगा हो गया है। जीएसटी लागू होने के बाद कंपनी से ट्रांसपोर्टर तथा एकाउंटेंट लेकर विभागीय अधिकारियों तक की फीस में इजाफा हो गया है। इसका खामियाजा व्यापारी और आम उपभोक्ता भुगत रहे हैं।

 

(श्याम मूर्ति गुप्ता)

सीमेंट व्यापार संघ के अध्यक्ष श्याम मूर्ति गुप्ता के मुताबिक देश में व्यापारी जिन दिक्कतों व जटिलताओं को लेकर आंदोलित थे और विरोध कर रहे थे, विश्वबैंक ने उन्हीं दिक्कतों को अपनी रिपोर्ट में रखा है। जीएसटी दरें ज्यादा हैं और प्रक्रिया कठिन है। बड़ी संख्या ऐसे व्यापारियों की हैं जो सीए, वकील और एकाउंटेंट का खर्च नहीं उठा सकते हैं लेकिन सरकार आर्थिक सुधार की दलील दे रही है। सीमेंट व्यापार संघ के मनीष लटकानी भारत गांव में बसता है। देश में करीब बीस फीसद व्यापारी ही पंजीकृत है। ग्रामीण इलाकों में आज भी परचून से लेकर दवा और बाकी सामान तक एक ही दुकान पर बिकता है। ऐसे में सरकार कैसे जीएसटी लागू करेगी, यह अपने आप में अहम है। सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया लेकिन नतीजा यह है कि अपंजीकृत व्यापारी उसी तरह से काम कर रहे हैं, बस सरकारी विभागों में वसूली बढ़ गई है।

 

(पवन मनोचा)

उत्तर प्रदेश युवा व्यापार समन्वय समिति के अध्यक्ष पवन मनोचा के मुताबिक तरफ सरकार एक देश एक टैक्स का दम भर रही है लेकिन टैक्स की दरें पांच हैं। यही नहीं, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखा गया है और इसका सीधा असर आम लोगों पर दिखता है। खास बात है कि चुनावी मौसम में पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने की अटकलें जरूर लगती है लेकिन फिर नतीजा ढाक के तीन पात रहता है। युवा व्यापारी समन्वय समिति के मनीष अरोड़ा के मुताबिक पहले नोटबंदी और उसके बाद बिना पूर्व तैयारी –प्रशिक्षण के लागू जीएसटी ने व्यापारियों की परेशान कर डाला है। व्यापार में कमी आई है और तमाम दिक्कतें पंजीकृत व्यापारी ही झेल रहे हैं। इसका असर आने वाले चुनावों में जरूर दिखेगा। सरकार के आश्वासनों से व्यापारी ऊब चुके हैं जबकि अधिकारी उत्पीड़न का कोई भी मौका छोड़ने को तैयार नहीं है।

 

जीएसटी लागू किए जाने के पहले मुकमल्ल तैयारियां न होने के कारण आज यह हालत है। जीएसटी पोर्टल से लेकर केंद्र व राज्यों के अधिकारियों के कार्यविभाजन तक में तमाम खामियां हैं। सरकार भी फैसला लेने में डावांडोल होती दिखती है। लिहाजा जीएसटी एक्ट का कंप्लाइंस भी नहीं पूरी तौर पर नहीं हो पा रहा है। इसके अपेक्षित परिणाम भी नहीं मिल रहे हैं और तमाम दिक्कतें सामने आ रही हैं।

मनोज त्रिपाठी

अध्यक्ष

वाणिज्य कर सेवासंघ

 व्यापारी जीएसटी के विरोध में कतई नहीं है। व्यापारी ऐसी व्यवस्था चाहता है जो पारदर्शी हो, सरल हो मगर सरकार ने जो व्यवस्था लागू की है, वह जटिलताओं से भरी है। ऐसे में रिटर्न दाखिल करने ही व्यापारियों को तमाम दिक्कतें झेलनी पड़ रही है और उनका उत्पीड़न हो रहा है। इस कारण से लागू होने के बाद से ही विरोध भी हो रहा है।

राजेंद्र अग्रवाल

अध्यक्ष

लखनऊ व्यापार मंडल

 

 



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