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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

पश्चिम उत्तर प्रदेश में डीजल पंप सेट से तैयार होने वाले जुगाड़ वाहनों के बारे आपने जरूर सुना होगा। इन वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से रोक लगनें के आदेश भी सालों पहले दिए थे। वहां पर इनकी संख्या जरूर सीमित हुई लेकिन परिवहन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और नकारा ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी से राजधानी में जुगाड़ वाहन दौड़ रहे हैं। यहां पर जुगाड़ वाहन सामान ढोने वाले ठेलों को बनाया गया है। इन ठेलों में कबाड़ –पुराने स्कूटरों के इंजन लगाए गए हैं। खास बात यह है कि इन ठेलों में हैंडल स्कूटर –मोटर साइकिल के हैं और बाकी हिस्सा ठेले का।

 

डालीगंज से लेकर चारबाग रेलवे स्टेशन तक ये जुगाड़ वाहन दिखाई देते हैं। खास कर थोक मंडियों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर चौराहे ये ठेले गुजरते हैं और ट्रैफिक पुलिस कर्मी केवल उनसे वसूली करके ही मस्त है। दूसरी तरफ परिवहन विभाग के अधिकारी केवल हाईवे पर लूट में ही ज्यादा व्यस्त दिखते हैं। नतीजतन उन्हें जांच का समय तक नहीं मिल पाता है। सड़क पर जांच के अभाव के चलते ही अब जुगाड़ मालवाहक भी सड़क दिखाई देने लगे हैं।

कई स्थानों पर बन रहे हैं जुगाड़

राजधानी में सीतापुर रोड, हरदोई रोड और कुर्सी रोड पर कई कारीगर जुगाड़ रिक्शा तैयार कर रहे हैं। इनकी कीमत सात से आठ हजार रुपये की है। इसके लिए पुराने स्कूटर का स्क्रैप खरीदा जाता है और फिर उसके इंजन को दुरुस्त करते उसे ठेले में फिट कर दिया जाता है। खास बात यह है कि इस ठेले में ब्रेक केवल अगले पहिए में होता है। जबकि इसकी रफ्तार से आसानी से तीस किमी प्रतिघंटा से अधिक तक रहती है। ऐसे में अचानक ब्रेक लगाने पर इसके पलटने का खतरा कहीं ज्यादा होता है लेकिन इसे देखने वाला कोई है ही नहीं। इसके अलावा इन वाहनों के जरिए भारी सामान बहुत कम मेहनत और समय में वांछित स्थान तक पहुंच जाता है, जिससे कि श्रमिक और ठेले वाले इसे बनवाने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं। यही कारण है कि इनकी संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

जुगाड़ वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगा रखा है। इनका संचालन हो ही नहीं सकता है। राजधानी में अगर इन वाहनों का संचालन हो रहा है तो जल्द ही जांच करा कर उन्हें बंद कराया जाएगा। साथ इन वाहनों को बनाने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अनिल कुमार मिश्रा

उप परिवहन आयुक्त

  

 

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