Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं हैं . .। यह मशहूर गीत आज राजधानी के लिए एकदम सटीक हो गया है। दरअसल राजधानी में आबोहवा ही लोगों की सेहत के लिए हानिकारक हो चुकी है। लगातार बाहर रहने वाले लोग इस जहरीली आबोहवा के कारण बीमार हो रहे हैं लेकिन इस बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने की सारी कवायद नक्कारखाने की तूती की तरह साबित हो रही है। कागजों पर प्रदूषण रोकने की कवायद हो रही है लेकिन हकीकत में कहीं कुछ नहीं हो रहा है।

पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों से निकला धुआं और हवा में शामिल हानिकारक तत्व है। मगर इसे रोकने के लिए शायद कोई विभाग गंभीर नहीं है। यह अलग बात है कि न्यायालय या राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद कुछ तेजी दिखती है लेकिन फिर वह फनां होती है। शायद यही कारण है कि राजधानी के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। राजधानी की लाइफ लाइन कही जाने वाली गोमती नदी में पानी कम और कूड़ा–मलबा ज्यादा दिखाई दे रहा है। मनकामेश्वर घाट हो या फिर कुड़ियाघाट नदी में पानी दिखने बजाए उसमें जमी जलकुंभी नजर आती है। यह अलग बात हर साल गोमती के नाम पर करोड़ो रुपये खर्च किए जाते हैं।

आईटीआरसी द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी में आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। पिछले साल के स्तर से अधिक प्रदूषण हो रहा है। इसमें इंदिरानगर क्षेत्र अव्वल है। यहां पर पिछले साल के मुकाबले ध्वनि और वायु दोनों प्रदूषण बहुत बढ़ा है। इंदिरानगर में ध्वनि प्रदूषण 79.30 डेसीबल तक पहुंच गया है तो पीएम फेक्टर 297 के करीब है। यह पीएम फैक्टर पिछले साल के मुकाबले करीब बीस फीसद ज्यादा है। इसके अलावा गोमतीनगर, अलीगंज और विकास नगर में पिछले साल के मुकाबले पीएम फैक्टर में तेज इजाफा हुआ है। इसी तरह से ध्वनि प्रदूषण भी इंदिरानगर, चौक और चारबाग में बढ़ा है। जो लगातार लोगों को प्रभावित कर रहा है।

 

दस फीसद से ज्यादा बढ़ रहे मरीज

मेडिकल कालेज के पल्मोनरी विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। रोजाना ओपीडी में ही करीब दस फीसद ज्यादा मरीज आ रहे हैं। सांस के जरिए प्रदूषित तत्व फेफड़े में पहुंच रहे हैं और गंभीर बीमारियां दे रहे हैं। ऐसे में लोगों को तो जागरुक किया ही जा रहा है कि बाहर निकलते वक्त मास्क का इस्तेमाल करें।

 

खुली हवा मिलना भी दुश्वार

राजधानी में प्रदूषण का बड़ा कारण अवैध निर्माण भी है। इसके पहले दिसंबर में एनजीटी व कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन, परिवहन तथा प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने खले में रखी निर्माण सामग्री, डीजल चालित वाहनों पर कार्रवाई भी की। कुछ निर्माणों को नोटिस भी दिए गए लेकिन यह केवल कुछ दिन की कवायद थी। नतीजा यह हुआ है कि इंदिरानगर नगर से चौक तक धड़ल्ले से निर्माण चल रहे हैं। घनी आबादियो में बिल्डरों ने कई मंजिला अपार्टमेंट खड़े कर दिए हैं जिसे खुली हवा मिलना भी दुश्वार हो चुका है।

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