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घर तक पहुंचने लगी निजीकरण की चिंगारी

Rising At 8am | 31-Mar-2018 | Posted by - Admin

 

  • निजीकरण से पहले निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कवायद

  • सरकार के खिलाफ तेज हुई लामबंदी

   
Latest Updates over Nijikaran in Lucknow Electricity Department

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

राजधानी सहित प्रदेश के पांच शहरों में बिजली आपूर्ति के निजीकरण के फैसले की चिंगारी अब  भारतीय जनता पार्टी के घर तक पहुंचने लगी है। भाजपा की नीतियों से खिन्न उनकी ही बहराइच से सांसद सावित्री भाई फुले ने तो निजीकरण के विरोध में आंदोलन की घोषणा शुरू कर दी है और इसे पिछड़े–दलितों के खिलाफ करार दे दिया। केवल इतना ही भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अब इस मामले में समाजवादी पार्टी सहित अन्य दल भी लामबंद हो रहे हैं जबकि कर्मचारियों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है।

बहराइच से सांसद सावित्री भाई फुले रविवार को हुंकार रैली की घोषणा करते हुए कहा कि आरक्षण को लेकर भाजपा की नीतियां ठीक नहीं कही जा सकती हैं। निजीकरण का फैसला भी पिछ़ड़े व दलित वर्ग के अभियंताओं कर्मियो के लिए घातक है और इसका विरोध किया जाएगा। समाजवादी पार्टी नेता सुनील कुमार साजन ने भी सरकार के बिजली के निजीकरण के फैसले पर विरोध जताते हुए कहा कि यह कुछ बड़े घरानों को सोची समझी साजिश के तहत फायदा पहुंचाने की कवायद ही नजर आती है।

वजह है कि बिजली के निजीकरण का फैसला अभी कैबिनेट स्तर पर हुआ है और आगे की प्रक्रिया लंबित है लेकिन सरकार पहली अप्रैल से ग्रामीण क्षेत्र अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के बिजली के बिलों में इजाफा कर रही है। वह भी सीधे 34 फीसद से ज्यादा का। यानी पहले जो उपभोक्ता महीने में 300 रुपये महीना देते थे, उन्हें अब 400 रुपये महीना बिल अदा करना होगा। यह दोनों ही बातें आपस में विरोधाभासी हैं। इससे सरकार के मंशा पर सवाल जरूर खड़े होते हैं।

 

अभियंता–कर्मचारी तैयार कर रहे माहौल

बिजली के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारी –अभियंता भी निजीकरण के खिलाफ सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी  संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में प्रदेश भर में अभियंता कर्मचारी –अभियंता निजीकरण के खिलाफ आंदोलन पर हैं। वर्क टू रूल के तहत पिछले 12 दिन से कर्मचारी संघर्षरत हैं। कर्मचारियों ने बिजली के निजीकरण का निर्णय स्थगित न होने पर आरपार के आंदोलन करने की घोषणा की है।

वहीं उत्तर प्रदेश पावर आफीसर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में भाजपा सांसद सावित्री भाई फुले, समाजवादी पार्टी नेता सुनील कुमार साजन सहित अन्य प्रतिनिधियों को निजीकरण के खिलाफ ज्ञापन दिया। यही नहीं, आगरा में मुख्य अभियंता एके त्यागी के नेतृत्व अभियंताओं –कर्मचारियों के प्रतिनिधि मंडल ने ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा से मिलकर उन्हें विरोध ज्ञापन दिया।

निजीकरण यानी लूट का सौदा

उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली के निजीकरण के फैसले को लूट की सोची समझी साजिश करार दिया है। समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे के मुताबिक आगरा में टोरेंट कंपनी द्वारा 4600 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हो चुका है। यह बात सीएजी रिपोर्ट में स्पष्ट हो चुकी है लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके पहले बिलिंग के नाम पर एचसीएल कंपनी द्वारा बिलिंग में सौ करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया गया लेकिन कुछ न हुआ।

सरकार आंख मूंद कर निजीकरण का फैसला कर रही है जो सीधे तौर पर कुछ घरानों को फायदा पहुंचाना भर दिखाई देता है। समिति के सदस्यों ने कहा है कि निजीकरण के आड़ में शहरी बिजली के दामों में भी इजाफा करने की गुपचुप तैयारी हो रही है। इसका खामियाजा प्रदेश के करोड़ो उपभोक्ताओं को ही झेलना पड़ेगा।

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