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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

मुख्‍यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर जब राजधानी के सेक्‍सोलॉजिस्‍ट एसके जैन की शिकायत हुई तो ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद पता चला कि जिन डिग्रियों के सहारो डॉ. एसके जैन सेक्‍स रोगों का उपचार कर रहे थे वह वास्‍तव में कोई डिग्री ही नहीं है। इतना ही नहीं वह खुद को स्‍वयंभू और वंशानुगत डॉक्‍टर बताते हुए लोगों पर प्रभाव भी बनाते रहे हैं। हालांकि जब मामला खुला तो स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने छापेमारी करते हुए दस्‍तावेजों को जब्‍त किया और उनकी डिग्री की जांच कराई।

जांच में पता चला कि लखनऊ विश्‍वविद्यालय से उनके पास आयुर्वेदाचार्य की डिग्री है और इस डिग्री पर सेक्‍स रोग करने का कोई अधिकार नहीं है। अब उप मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी एसके रावत ने डॉ. एसके जैन, पीके जैन और एके जैन के सेक्‍स क्‍लीनिक के सभी बोर्डों को हटवा दिया है। इसके लिए इन कथित सेक्‍सोलॉजिस्‍टों ने एक शपथ पत्र भी दिया है।

बर्लिंगटन स्थित सेक्‍स क्‍लीनिक पर एफएसडीए ने 25 जनवरी को छापेमारी की थी। इस दौरान एसके जैन क्लीनिक में जहां हड़कंप मच गया तो वहीं कई मरीज अपना मुंह छिपाकर भागते नजर आए। टीम ने जैसे ही अंदर प्रवेश किया तो यहां पर बिना लेबल के तेल व दवाओं की बोतलों से दीवारें सजी थी। लेबल न होने के कारण ना तो यह पता चल पा रहा था कि इन दवाओं में क्‍या प्रयोग किया गया है और ना ही दवाओं की अंतिम तिथि पता चल पा रही थी। टीम ने रंग बिरंगी दवाओं सहित कई सैंपल लिए और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा दिया। डॉक्‍टर के डिग्री की जांच के लिए लखनऊ विश्‍वविद्यालय भेज दिया गया।

इसके कुछ ही दिन बाद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम ने इस क्‍लीनिक पर छापेमारी कर दी, लेकिन इस बार टीम को क्‍लीनिक के कर्मचारियों ने अर्दब में लेने का प्रयास किया। हालांकि जब उप मुख्‍यचिकित्‍साधिकारी एसके रावत ने पुलिस को बुलाने की बात कही तब जाकर कर्मचारियों की अराजकता बंद हुई। यहां पर उन्‍हें भारी अनियमितता मिली। कई दस्‍तावेजों को अपने साथ लेकर वह चारबाग के एके जैन सेक्‍सक्‍लीनक पहुंच गए। यहां पर भी ऐसा ही हाल था ना डिग्री ना दवाओं की जानकारी। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम डिग्री लेकर उपस्थित होने की नोटिस जारी करते हुए क्‍लीनिकों में ताला लगा दिया। इसके बाद एसके-एके जैन ने अपने सेक्‍सोलॉजिस्‍ट के सारे बोर्ड हटवाने का शपथ पत्र और डिग्री सौंपी। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जांच में आयुर्वेदाचार्य की डिग्री सही निकली लेकिन इसके माध्‍यम से वह सेक्‍स रोगों का उपचार नहीं कर सकते हैं। एसके रावत ने बताया कि यदि यह डॉक्‍टर सेक्‍स रोगों का उपचार करते पाए गए तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। 

डिग्री जांच पर एफएसडीए फेल-

एफएसडीए के ड्रग इंस्‍पेक्‍टर रमाशंकर ने बर्लिंग्‍टन स्थित डॉ. एसके जैन क्लीनिक पर 25 जनवरी को मारा था।  इसके कई दिनों बाद उन्‍हें डॉक्‍टर ने अपनी डिग्री दिखाई जिसकी जांच के लिए उन्‍होंने लखनऊ विश्‍वविद्याल भेज दिया। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने डिग्री की जांच भले ही करवा ली हो लेकिन एफएसडीए आज तक डिग्री की जांच ही करवा रहा है। रमाशंकर ने बताया कि जो डिग्री जांच के लिए विश्‍वविद्यालय भेजी गई थी उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई। अब सवाल यह है कि जब स्‍वास्‍थ्‍य विभाग कम समय में डिग्री की जांच करवा सकता है तो एफएसडीए क्‍यों नहीं। एक बार फिर इंस्‍पेक्‍टर ने जल्‍द ही जांच कराने का दम भरा है।

लोग आएं तो हो और सख्‍त कार्रवाई-

उप मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी एसके रॉवत ने बताया कि यदि आम लोग सीधे डॉक्‍टर की शिकायत लेकर उनके पास आएं तो वह इसमें और अधिक कार्रवाई कर सकते हैं। क्‍योंकि इससे सीधे छापेमारी करने में आसानी होगी और कोई सामने भी होगा जिससे अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित की जा सकती है। उन्‍होंने बताया कि यदि कोई अपना नाम भी गोपनीय रखना चाहता है तो उसका नाम भी किसी को नहीं बताया जाएगा।

“एके जैन कोई सेक्‍सोलॉजिस्‍ट नहीं हैं। इनके पास ऐसी कोई डिग्री नहीं है। हालांकि इन्‍होंने आयुर्वेदाचार्य की जो डिग्री दिखाई थी उसकी जांच कराने पर पता चला कि यह डिग्री सही है, लेकिन सेक्‍स रोगों का उपचार करने के लिए इस डिग्री की कोई मान्‍यता नहीं है, क्‍यों‍कि आयुर्वेदाचार्य की डिग्री में सेक्‍सोलॉजिस्‍ट की कोई डिग्री ही नहीं होती। इसलिए शहर भर में एसके जैन के सेक्‍सोलॉजिस्‍ट वाले बोर्डों को उतरवा लिया गया है। एके जैन-पीके जैन ने भी शपथ पत्र दिया है कि उन्‍होंने अपने सारे बोर्ड हटा लिए हैं।”

एसके रावत

उप मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी

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