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दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

आशियाना के औरंगाबाद में तीन दिन तक पुलिस-वन विभाग और तेंदुए की आंख मिचौली के बाद आखिरकार खूनी संघर्ष हुआ और पुलिस की गोली से बीते शनिवार को तेंदुए की मौत हो गई। घटना क्रम के तुरंत बाद इंस्‍पेक्‍टर आशियाना त्रिलोकी सिंह सहित कई पुलिसकर्मी वन विभाग के निशाने पर आ गए थे। अब वन विभाग के अधिकारियों ने वन्‍य जीव अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं राजधानी की मुस्‍तैद पुलिस ने इसे साहसिक एनकांउटर करार दे दिया।

हालांकि किरकिरी होने के बाद मामले की न्‍यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अब पूरे मामले के बाद वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठें हैं जो जांच के बाद सामने आएंगे। 

प्रधान मुख्‍य वन संरक्षक एसके उपाध्‍याय ने घटनाक्रम पर अफसोस जताते हुए कहा कि जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। पुलिस ने यदि मौके पर धैर्य और शांति का परिचय दिया होता तो परिणाम कुछ दूसरा होता। हम लोग तेंदुए को बेहोश कर आसानी से पकड़ सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी है उन्‍हें बख्‍शा नहीं जाएगा। यह एक गंभीर क्षति है और वन विभाग के लिए बेहद दु:खद है।

 

 

औरंगाबाद में 15 फरवरी को सुबह तेंदुआ देखे जाने का मामला सामने आया तो पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। पहले दिन वन कर्मियों ने तेंदुए की पुष्टि करने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी। चार से अधिक पिंजरे और जाल लगाकर तेंदुआ पकड़ने का प्रयास किया जाने लगा। हालांकि जैसे ही रात हुई पुलिस और वन विभाग के अधिकारी वापस लौट गए।

अगले दिन वन विभाग ने पुलिस की सहायता लेने से इनकार करते हुए सेना से मदद मांगी। सेना घटना स्‍थल पर पहुंची और तेंदुआ पकड़ने के लिए जोर युद्ध स्‍तर पर अभियान शुरू किया गया। वन कर्मियों ने अपनी बेहोश करने वाली बंदूक से कई राउंड फायरिंग की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने नाटकीय ढ़ंग से तेंदुए को मार गिराया था।

पुलिस ने बताया अदम्‍य साहस

औरंगाबाद में तेंदुआ आया और जब वन विभाग पकड़ने में नाकामयाब हुआ तो पुलिस की गोली से बेजुबान की हत्‍या हो गई। शाम होते-होते राजधानी पुलिस ने हत्‍याकांड को अदम्‍य साहस करार दे दिया। जबकि ना तो गोली चलाने का कोई आदेश था और ना ही पुलिस से तेंदुआ पकड़ने का सहयोग लिया जा रहा था। पुलिस की थ्‍योरी के मुताबिक तेंदुआ ने सबसे पहले नियाज के घर में धावा बोला और वह मुन्‍ना को घायल करते हुए भाग निकला। रास्‍ते में खैरनिन्‍सा आईं तो उन्‍हें भी तेंदुए ने घायल कर दिया। साथ ही पड़ोस में रहने वाले रजी को भी घायल करते हुए भाग निकला। इसी बीच इंस्‍पेक्‍टर ने तेंदुए को रोकने का प्रयास किया तो उसने हमला बोल दिया।

इस पर इंस्‍पेक्‍टर ने तेंदुआ को गोली मार दी। इसके बाद भी वह भागते हुए सिद्द‍िक के घर की छत पर चढ़ गया। उप निरीक्षक जैदी ने भी अपना नंबर बढ़ाने के चक्‍कर में फायरिंग कर दी। घायल और बदहवाश हुआ तेंदुआ पास के ही सरीफ के घर में घुस गया। यहां पर महिलाओं ने चीख पुकार मचाई तो इंस्‍पेक्‍टर घर में घुस गए। इसी बीच तेंदुए ने इंस्‍पेक्‍टर पर फिर से हमला किया तो उन्‍होंने धक्‍का देकर किचन में बंद कर दिया। 

“तेंदुआ मामले पर एक रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। हमारे विभाग की ओर से तेंदुआ को जान से मारने का कोई आदेश नहीं था, इसके बाद भी यह घटनाक्रम हुआ। इसके लिए इंस्‍पेक्‍टर आशियाना की जांच होगी। जिस समय तेंदुए के मारे जाने की सूचना मिली थी, उस समय हमारे पास कोई गवाह नहीं था, लेकिन अब सभी को पता है कि तेंदुआ को इंस्‍पेक्‍टर की गोली लगी थी। यदि पुलिस सहनशीलता, संवेदनशीलता और सहयोग बनाए रखती तो हम लोग तेंदुए को जिंदा ही पकड़ लेते।”

एसके उपाध्‍याय

प्रधान मुख्‍य वन संरक्षक

“जैसे ही तेंदुआ घर में घुसा तो हम लोग पकड़ने गए, लेकिन उसने अचानक ही हमला कर दिया। भिड़ंत हुई तो किसी तरह से उसे रसोई में धकेलते हुए दरवाजा बंद कर दिया।”

त्र‍िलोकी सिंह  

इंस्पेक्टर आशियाना

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