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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी और उसके बाद गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू होने के बाद से ही बाजारों में रहा धन का संकट असर इस बार धनतेरस पर भी दिखा। यह अलग बात है कि खरीदारी जमकर हुई लेकिन जिन सेक्टरों में ज्यादा पैसा व्यय होता था, वहां इस बार मायूसी ही दिखी। पिछले एक दशक में धनतेरस पर सबसे ज्यादा कारोबार रियल इस्टेट में होता था लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। निवेशक बाजार से गायब हो चुके हैं और बिल्डर रेरा के प्रावधान और सरकारी निगरानी के कारण असहज है। नतीजा यह है कि इस बार रियल इस्टेट कारोबार में कोई खास कारोबार नहीं हुआ। यही हाल सराफा बाजार का भी रहा। पहली बार ऐसा था कि जब बैंकों से सोने के सिक्के नहीं बिके। बिके तो नाममात्र को।

 

दरअसल यह ये ट्रेंड इस बार बाजार का रहा। कारोबारियों के मुताबिक रियल इस्टेट सेक्टर ही ऐसा है जिसमें तेजी रहती है तो पूरा बाजार उम्दा चलता है। कारण है कि पैसे का फ्लो बहुत तेजी से होता है। निवेशक से बिल्डर, उसके बाद सप्लायर, फिर मजदूर तक पैसा पहुंचता है। वहीं पैसा बाजारों में आता है लेकिन इस बार ऐसा कुछ था ही नहीं। रियल कारोबार नोटबंदी के बाद से ही लडखड़ाया हुआ है। उसके बाद जीएसटी और रेरा एक्ट से रही कसर पूरी हो गई। तमाम प्रोजेक्ट रुक गए। जिन लोगों ने पैसा लगा भी रखा है, वह अपने भवन –फ्लैट के आवंटन के लिए धक्के खा रहे हैं।

इसी तरह से बाजार में तेजी और पैसे का फ्लो का अंदाजा सराफा मार्केट से भी लगता है। कारण है कि नगद पैसे के बाद ज्वैलरी व सोने को ही निवेश के बेहतर जरिया माना जाता है लेकिन इस पर भी सरकार ने निगरानी बैठा दी है। नतीजा यह है कि निवेशक यहां भी नहीं रहें। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण इस बार बैंकों द्वारा सिक्के जारी न किया जाना ही है। केवल छोटे –बड़े निवेशक ही नहीं बल्कि थोक सराफा कारोबारी भी बैंकों से दूर हैं। नतीजा यह है कि बैंकों से बुलियन की खरीद बहुत कम रही। जबकि बाजारों में सोने की कोई कमी भी नहीं है।

 

खुलने लगी है सरकारी दावों की पोल

 

कालेधन पर लगाम लगाने की सरकार के तमाम दावों की पोल सराफा बाजार से ही खुल जाती है। सवाल यह है कि बैंक से सोना लिया नहीं जा रहा तो थोक सोने का बाजार (बुलियन कारोबार) कैसे हो रहा है। कारोबारी कौन सा सोना बेच रहे हैं और वह कहां से आ रहा है। उल्लेखनीय है कि बाजार में तस्करी का सोना खपाए जाने की बात तो काफी समय से चल रही हैं। कई प्रतिष्ठित बुलियन कारोबारी तो इस बार कारोबार से ही विरत चल रहे हैं। ऐसे सरकार मशीनरी पर भी सवाल उठता है कि आखिर बाजार में इतनी आसानी से तस्करी का सोना कैसे पहुंच रहा है। हालांकि कई बड़े कारोबारी तस्करी का सोना सहजता से बाजारों में पहुंचने का दावा करते हैं। पिछले दिनों इस संबंध में एक पत्र भी चौक थाने से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजा गया। हालांकि पुलिस ने इसकी जांच भी फौरी तौर पर निपटा लीं लेकिन इसके पीछे बाजार के ही कुछ कारोबारियों का हाथ बताया जा रहा।

यह सही है कि बाजार में पूंजी की कमी है। इसका असर बाजार ही नहीं बल्कि कारोबार पर भी दिख रहा है। लोग परंपरा के तौर पर खरीदारी कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि रियल इस्टेट कारोबार बुरी तरह से लड़खड़ा गया है। जबकि यह वह कारोबार था जिससे गांव से आने वाले मजदूर से लेकर शहरों के सप्लायर, ठेकेदार सभी जुड़े थे। यहां से पैसा सबके हाथ में पहुंचता था और फिर वही बाजार में आता था। इससे पैसे का फ्लो बढ़ता था। इस बार ऐसा नहीं है। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा वर्ग ही इस बार दीपावली मना रहा है जबकि निचला तबका परेशान है।

नटवर गोयल

प्रदेश अध्य़क्ष

अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन

 

 

 

 

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