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बल खाने लगी है जनाब की पेशानियां

Rising At 8am | 08-Nov-2017 | Posted by - Admin

 

  • जीत की होड़ में दागियों की खिदमत
  • जांच पर भी लगाया जा रहा नया मुलम्मा
   
Latest and Trending Updates over UP Local Body Elections 2017

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

दिन मंगलवार सात नवंबर

भाजपा के मेयर पद प्रत्याशी का नामांकन

 

इस दौरान उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा से पूछा गया कि आखिर भाजपा ने समाजवादी पार्टी छोड़ कर आए पूर्व सपा के एमएलसी बुक्कल नवाब के पुत्र फैसल नवाब को टिकट कैसे दे दिया गया। क्या पार्टी द्वारा दिए गए बयानों से मेल खाता है। सवाल के जवाब में उप मुख्यमंत्री के चेहरे पर तल्खी की लहर दौड़ गई। उन्होंने कहा कि आरोप उनके पिता पर है, पार्षद उम्मीदवार पर नहीं। यह डिबेट का मंच भी नहीं है। यह अलग बात है कि हुसैनाबाद में जिन अवैध निर्माण को लेकर सरकार जांच का दम भर रही है, उनमें एक फैसल नवाब की ही है। सवाल पैना था, इस कारण जनाब उप मुख्यमंत्री भी कुछ तल्ख से दिखे।

दिन बुधवार

केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की पत्रकार वार्ता

 

उनकी प्रेस वार्ता के बीच में इंडिगो एयरलाइन्स के गार्ड द्वारा यात्री से मारपीट के वायरल हो रहे वीडियो की बावत सवाल कर लिया गया। इस पर उनकी भृकुटि कुछ तन गई। जवाब मिला कि यह मेरे मंत्रालय से जुड़ा मामला नहीं है। न ही मैं देखती हूं। अब केवल मंत्री ही नहीं बल्कि प्रशासन के चेहरे पर भी विश्वासपात्र बनने की चाहत में तमाम परेशानियां देखने को मिल रही है।

निकाय चुनाव में मेयर पद के निर्वाचन अधिकारी आरके तिवारी से भाजपा के पूर्व सांसद के मयगार्ड व फ्लीट के बैरीकेडिंग हटाकर प्रवेश दिलाए जाने की बावत पूछा गया तो वह कोई जवाब नहीं दे सकें। उन्होंने ने तो यहां तक कह दिया वह कर क्या सकते हैं। क्या किसी मीडिया वाले को मैं बाहर कर सकता हूं।

दरअसल जनाब की पेशानियां यूं ही बल नहीं खा रही है। जोश थामें थम नहीं रहा है और नियंत्रण लग नहीं पा रहा है। जबकि लोगों की अपेक्षाएं कहीं ज्यादा हैं। इस कारण से सरकार की कथनी और करनी दोनों की बारीक निगरानी हो रही है और इस कारण से बार बार असहज स्थितियां बन रही हैं।

 

दिखने लगा सत्ता का रंग

 

सत्ता में आने से पहले कानून व नियम की बातें करने वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार बने छह महीने से अधिक समय हो रहा है और अब धीरे धीरे वास्तविक रूप भी दिखने लगा है। अंतर सिर्फ इतना है कि पहले अवैध निर्माण समाजवादी बोर्ड लगा होता था और अब भगवा बोर्ड लग रहे हैं। सरकार का आदेश है कि जनप्रतिनिधियों की माकूल सम्मान हों, इस कारण से अधिकारी नतमस्तक होकर गलत को सही ढंग से परिभाषित करने की कला सीखने में जुटे हैं। केवल सरकार ही नहीं बल्कि सरकार के रिश्तेदार –नातेदार का रौब हर तरफ गालिब हो रहा है। इस कारण से सरकारी अमला भी उदासीन नजर आ रहा है। सरकार बनते ही जिन भ्रष्टाचारों की जांच और कार्रवाई की दलीलें दी जा रही थीं, वे फाइलों में सिमट गए हैं। अब उन पर जांच का नया मुलम्मा चढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जनता भी सब जान रही है लेकिन करें क्या जनाब ही आखिर सरकार हैं।

  

 

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