Coffee With Karan Sixth Season Teaser Released

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

महानगर में स्थित एक संभ्रांत व्यक्ति के यहां पर एक सियासी पार्टी के मेयर प्रत्याशी की कुछ विशेष समुदाय के लोगों के साथ मीटिंग। मीटिंग में शामिल होने वालों कई होटलों की चेन वाले कारोबारी, बेकरी कारोबारी, कुछ वस्त्र कारोबार से जुड़े लोग। अमूमन यह लोग सत्तारुढ़ पार्टी के आयोजन में दिल खोल कर झूमते दिखते हैं लेकिन यहां उनकी मौजूदगी से पार्टी में बुलाए गए कई लोग हैरत में पड़ गए। कई लोग तो वे थे जो सांसद से लेकर कई मंत्रियो के घर तक देखे जाते रहे हैं और अब दूसरे रंग में दिख रहे थे। पार्टी के बाद पूरे सहयोग का भरोसा भी दिलाया गया। लोगों को प्रभावित करने के कुछ टिप्स भी दिए गए जिससे बिरादरी के बाकी लोग भी आसानी से पक्ष में लाए जा सकते हैं।

दरअसल यह किसी एक पार्टी की बात नहीं है बल्कि चुनावी मौसम में फायदा उठाने के लिए हर पार्टी में कुछ इसी तरह की कवायद चल रही है। निराला नगर, इंदिरानगर, आशियाना से लेकर रायबरेली रोड पर स्थित एल्डिको कालोनी तक लोगों को पक्ष में करने के लिए दूसरे दलों के विभीषणों की तलाश चल रही है। अपनी जवाबदेही से बचने के लिए सत्तारुढ़ पार्टी भी कालोनियों व इलाकों में सभाएं तक कुछ प्रभावशाली लोगों के जरिए लोगों को साधने का प्रयास कर रही है। जबकि विपक्षी दूसरी पार्टी की कमजोर कड़ी के बहाने उसमें सेंध लगाने का मौका खोज रहे हैं। इसके लिए हर पार्टी प्रयास कर रही है। उल्लेखनीय है कि इसका प्रमाण पिछले दिनों व्यापारियों के बीच ही देखने को मिला था जब व्यापारी समर्थन को लेकर कई गुटों में बंट गए। अंदरखाने की सेटिंग का कमाल यह रहा कि प्रस्ताव भी भाजपा के पक्ष में पास हो गया और लोगों की शिकायत भी दूर हो गई। जबकि अपने ही संगठन के लोगों को समर्थन के लिए खुद आकर मिलने व सहयोग मांगने की शर्त लागू कर दी गई। इस पूरी कवायद का मकसद एक प्रतिद्वंदी संगठन को नीचा दिखाना भर माना जा रहा है।

इन्हीं के जरिए अब सियासी दल अपना उल्लू साध रहे हैं। दरअसल इसके लिए गली मोहल्लों से लेकर वार्डों तक में ऐसे लोगों को तलाशा जा रहा है जिन्हें विपक्षी पार्टी का कमिटेड वोटर माना जाता रहा है। उन्हीं के जरिए विपक्षी दल में सेंध लगाने का जुगाड़ कर रहे हैं। इसके लिए हर तरीके से सहयोद लिया –दिया जा रहा है। हजरतगंज में ही एक वार्ड में प्रत्याशी कार्यकर्ताओं को पांच सौ रुपये – दो लीटर वाहन का तेल व नाश्ता तक मुहैया करा रहे हैं। जबकि पुराने शहर में मयखानों पर रात में सियासी कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो रही है।

कमिटेड वोट के सहारे जंग

 

नगरीय निकाय चुनाव में इस बार प्रचार वैसे तो काफी सुस्त दिख रहा है। वजह है कि इस बार हर पार्टी अपने कमिटेड वोटर व कार्यकर्तांओं पर फोकस कर रही है। उन्हीं को सहेजने में लगी है और दूसरे को तोड़ने में। इसके लिए युद्धस्तर पर बैठक हो रहीं है। कई स्थानों पर पांच साल से न हो पाई मरम्मत भी कुछ घंटों में हो रही है। इसके लिए हर पैंतरा आजमाया जा रहा है।

 

 

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