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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

लखनऊ व्यापार मंडल इस बार निकाय चुनाव में अपने पदाधिकारियों अथवा परिवार के सदस्यों का समर्थन करेगा। इसका फैसला शनिवार को व्यापार मंडल की बैठक में हुआ, लेकिन एक सवाल इस बैठक के बाद भी अनुत्तरित रह गया कि मेयर प्रत्याशी पर भाजपा प्रत्याशी संयुक्ता भाटिया को ही समर्थन क्यों, जबकि उसमें स्टेशनरी व्यापार मंडल के महामंत्री गौरव माहेश्वरी की पत्नी प्रियंका माहेश्वरी भी आम आदमी पार्टी से प्रत्याशी हैं।

 

 

इस सवाल पर व्यापार मंडल के पदाधिकारी इसके लिए व्यापारियों को विचार करने की बात कह कर पल्ला झाड़ गए। हालांकि व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में कोई पत्र नहीं जारी किया गया था और जो लोग पत्र जारी होने की बात कर रहे हैं, वह बिलकुल बेबुनियाद है।

 

दरअसल, भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में लखनऊ व्यापार मंडल द्वारा पत्र जारी किए जाने की चर्चा के बाद से ही व्यापार मंडल में तमाम पदाधिकारियों में जबरदस्त रोष दिख रहा था। व्यापारियों का आरोप था कि यह फैसला बिना व्यापार मंडल की बैठक और सदस्यों की सहमति लिए कर दिया गया। इस बात के आम होते ही व्यापार मंडल के अराजनैतिक होने पर ही सवाल खड़े होने लगे थे।

 

 

दरअसल, इसके पहले लखनऊ व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल समाजवादी पार्टी से राज्यसभा पहुंचे, लेकिन उस वक्त भी इस तरह का कोई बात नहीं थी। यह अलग बात थी कि उन्होंने व्यापार मंडल को पूरी तरह से सपाई रंग देने का काम प्रयास किया। इसे लेकर उस वक्त भी व्यापार मंडल मतभेद उभरने लगे थे। बाद में बनवारी लाल कंछल लखनऊ व्यापार मंडल की कमान छोड़ दी थी। वह उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष बने रहे हैं और आज भी हैं।

 

व्यापार मंडल के खुलकर भाजपा के समर्थन में आने की चर्चा के बाद ही मतभेद भी सामने आने लगे थे। केवल भाजपा को समर्थन ही नहीं बल्कि इसमें कई महत्वाकांक्षाओं को भी लेकर भी व्यापारी खिन्न दिखने लगे थे। इसी के मद्देनजर शनिवार को व्यापारियों की बैठक बुलाई गई थी। हालांकि इस बैठक के बाद भी तमाम व्यापारी पूरी तरह से सहमत नहीं दिखे लेकिन फौरी तौर पर इस डैमेज को कंट्रोल कर लिया गया।

 

 

दो पदाधिकारियों में उलझा गणित

नगर निकाय चुनाव में मेयर पद के प्रत्याशियों में दो व्यापारी पदाधिकारियों के खड़े होने के कारण व्यापारियों में कुछ बिखराव जरूर दिख रहा है। दरअसल भाजपा प्रत्याशी संयुक्ता भाटिया स्वंय कारोबारी हैं और उनके पुत्र प्रशांत भाटिया भी लखनऊ  व्यापार मंडल में उपाध्यक्ष हैं।

वहीं आम आदमी से प्रत्याशी प्रियंका माहेश्वरी भी स्टेशनरी कारोबार से जुड़ी हैं और लखनऊ व्यापार मंडल से सम्बद्ध स्टेशनरी व्यापार मंडल में महामंत्री गौरव माहेश्वरी की पत्नी हैं। व्यापार मंडल के कई उपाध्यक्ष उनके साथ हैं।

 

 

साधे जा रहे हैं कई निशानें

निकाय चुनाव में समर्थन को लेकर व्यापार मंडल कई निशाने साध रहा है। इसे लेकर कयास भी कई हैं। दरअसल, व्यापारी वर्ग भाजपा के प्रति पहले से ही भाजपा का वोटर माना जाता रहा है। इस कारण से व्यापारी परोक्ष रूप से भाजपा के ही पक्ष थे और उसके बाद पत्र की बात आने पर यह बात खुल गई।

 

वहीं दूसरी तरफ तमाम व्यापारी नेता इस बात से नाराज हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों ने व्यापारियों से जो वायदे किए थे, एक भी पूरा नहीं हुआ। यहां तक मामूली शौचालय-पानी तक की समस्याएं दूर नहीं की गई जबकि इसके लिखित आश्वासन तक दिए गए थे। वहीं व्यापारियों का एक समूह इसके बहाने की सरकार के जरिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई तक पहुंचाने की फिराक में लगा है।

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