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Rising At 8am | 09-Dec-2017 | Posted by - Admin

 

  • नफे नुकसान की गणित में गौड़ हो गए विकास –रोजगार के मुद्दे
   
Latest and Trending Updates over Gujarat Vidhan Sabha Elections

दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

आपको उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव जरूर याद होगा। गुजरात में विकास के दावों और बेरोजगारी को दूर करने के माडल के तौर पर शुरू हुआ लेकिन खत्म होते होते चुनाव गुजरात के गधों पर जाकर टिक गया। भले ही वह गुजरात पर्यटन के लिए विज्ञापन का मामला था लेकिन सियासी दिग्गजों ने उसे खूब भुनाया। नतीजा भी देखने को मिला। अब गुजरात में चुनाव हो रहा है और वहां माडल बन रहा है उत्तर प्रदेश यानी यूपी। यहां पर भी सियासतदां विकास और तरक्कीपसंद राज्यों में शुमार गुजरात में चुनाव पहले चरण के मतदान होते होते पाकिस्तान व आईएसआई तक पहुंच गया है। पहले असंभ्रांत शब्दों की लंबी फेरहिस्त और अब पाकिस्तान से चुनाव की निगरानी के चर्चे। मकसद कुल मिलाकर लोगों को गुमराह कर उनका वोट हासिल करना है।

दरअसल गुजरात में पिछले 22 सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही है लेकिन सरकार अपनी उपलब्धियां बताने के बजाए वहां पर कांग्रेस के चरित्र पर ही हमला करने में लगी है। हिंदू कार्ड के जरिए मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की पुरजोर कोशिश हो रही है। कारण है कि वहां पर चुनावी माहौल को लेकर सभी सियासी दलों में बेचैनी है। भाजपा ज्यादा खामोशी है क्योंकि भाजपा को पाटीदारों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है और उनके नेता भी वे हैं जो भाजपा के शासनकाल में बड़े हुए और अब नेता भी बन गए हैं। जानकारों के मुताबिक युवाओं की बड़ी जमात की पैरवी कर रहे ये युवा चेहरे गुजरात के चुनाव में अहम रोल अदा करने जा रहे हैं। इसी को लेकर भाजपा में बेचैनी ज्यादा है। जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश से ही तमाम युवा नेता गुजरात में लगातार प्रवास कर रहे हैं। वहां पर लोगों का मन टटोल रहे हैं और मशक्कत कर रहे हैं।

हर तरह के हथकंडे

 

गुजरात के चुनाव में इस बार हर तरह के हथकंडे देखने को मिल रहे हैं। नेताओं के वंशजों से लेकर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई तक चुनाव में मतदाताओं को अपने पक्ष मे करने का हथियार बन गई है। प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल हो रहा है और प्रधानमंत्री उन अपशब्द के वाणों के सहारे ही मतदाताओं का वोट व सहानभूति पाने की कवायद में लगे हैं। संसद के माननीय सदस्य एक दूसरे को हर तरह के तंज कर रहे हैं। इन हथकंडो के जरिए कोशिश मतदाताओं को मुद्दे से भटकाने की हो रही है। अब देखने वाली बात यह है कि मतदाता का रुख आखिर क्या रहता है। दरअसल पहले चरण का मतदान शनिवार को संपन्न भी हो गया। पहले चरण में वोटिंग में बढ़िया हुई और माना जाता है कि ज्यादा मतदान हर बार कुछ परिवर्तन जरूर लाता है। देखना होगा कि यह परिवर्तन कैसा होगा। 

फिर हिंदुत्व कार्ड के सहारे भाजपा

 

गुजरात में मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए भाजपा अपने 22 साल के कार्यकाल के बजाए पूरी तरह से हिंदूवादी छवि को ही उभारने में लगी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गुजरात में स्टार प्रचारक के तौर सक्रिय हैं। ध्रुवीकरण के लिए उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का रिपोर्ट कार्ड हर शहर में प्रस्तुत किया जा रहा है। कांग्रेस की असफलता और अन्य विपक्षी दलों की पराजय का उल्लेख किया जा रहा है। भाजपा को ही देश में विकास करने वाली पार्टी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है लेकिन उसमें विकास के काम नहीं बताए जा रहे हैं बल्कि दूसरों की नाकामी गिनाई जा रही है। ऐसे में गुजरात चुनावों को लेकर कयास भी तेज हैं।

 

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