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बंद गोदाम –प्रतिष्ठान की ताला तोड़ कर हो सकेगी जांच

Rising At 8am | 02-Jan-2018 | Posted by - Admin

 

  • जीएसटी के तहत मिला वाणिज्यकर अधिकारयों को अधिकार
  • कारोबारियों की नींद उड़ी
   
Latest and Trending Updates over GST Implementation in India

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

जांच के दौरान अमूनन गोदाम –प्रतिष्ठान बंद कर भाग जाने वाले टैक्स चोर कारोबारियों की अब खैर नहीं है। दरअसल कामर्शियल टैक्स विभाग में अब जांच अधिकारियों को बंद गोदाम – प्रतिष्ठान का ताला तोड़ने का भी अधिकार दे दिया गया है। अधिकारियों को जांच में यह अधिकार मिलने के बाद अब कारोबारियों की नींद भी उड़ गई है। व्यापार मंडल तो इसे व्यापारियों का उत्पीड़न करने वाले कदम तक करार दे रहे हैं।

 

अभी तक मूल्य संवर्धित अधिनियम (वैट) के अंतर्गत छापे या जांच के दौरान वाणिज्य कर अधिकारियों को बंद गोदाम या प्रतिष्ठान को खुलवाने के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति की आवश्यकता होती थी। उसके बाद ही जांच के लिए उन्हें खुलवाया जा सकता था। यही कारोबारियों की रामबाण साबित हो रहा था। अमूमन छापे या जांच की सूचना मिलने पर कारोबारी प्रतिष्ठान बंद कर इधर-उधर हो जाते थे। या फिर अनुमति मिलने में अड़ंगा लगाकर अपने हिसाब से प्रकरण को मैनेज कर ले जाते थे। यही कारण था कि कई बार छापा मारने गई वाणिज्य कर विभाग की टीमों को बैरंग ही वापस होना पड़ता था।

अब टैक्सचोरों की खैर नहीं

वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस अधिकार के मिलने के बाद टैक्स चोरों पर ज्यादा बेहतर ढंग से शिकंजा कसना कुछ आसान हो जाएगा। दरअसल अब छापे के बाद अधिकारी सूचना पुख्ता होने पर गोदाम या प्रतिष्ठान की ताला खोल कर भी उसकी जांच कर सकेंगे। हालांकि उसकी प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी लेकिन अब केवल ताला लगा देने भर से ज्यादा प्रभावित नहीं पाएगी। लिहाजा इससे टैक्सचोरी करने वाले पर कुछ तो अंकुश लगेगा।

बढ़ेगा टकराव  

गुड्स एंड सर्विस टैक्स के अंतर्गत अधिकारियों को असीमित अधिकार दिए जाने को लेकर व्यापारियों औऱ विभाग के बीच टकराव के आसार भी बढ़ते दिख रहे हैं। लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा के मुताबिक जीएसटी में मैजिस्ट्रियल पावर कामर्शियल टैक्स अधिकारी को दिए गए हैं। संयुक्त आयुक्त और उसके ऊपर के अधिकारियों सील तोड़ने से लेकर व्यापारियों को हिरासत में देने तक अधिकार है। यह अधिकार वह अपने अधीनस्थ को भी ट्रांसफर कर सकता है। इसके लिए कोई पत्र आदि की आवश्यकता नहीं है और केवल वाट्सएप के  जरिए भी कामर्शियल टैक्स अधिकारी व्यापारी गिरफ्तार करा सकता है। इस तरह से अधिकारों का हस्तांतरण होने से इसका दुरुपयोग बढ़ने की पूरी संभावना है। इससे व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ेगा। व्यापार मंडल शुरू से ही इसका विरोध करता रहा है। इस संबंध में जीएसटी इम्पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष से लेकर वित्तमंत्री अरुण जेटली तक को ज्ञापन दिए गए। ज्ञापन में मांग की गई है कि इस तरह के उत्पीड़न वाले प्रावधान समाप्त किए जाएं।

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