Home Rising At 8am Latest And Trending Updates Of Accidents On Highway

चेन्नई: पत्रकारों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर किया विरोध प्रदर्शन

मुंबई: ब्रीच कैंडी अस्पताल के पास एक दुकान में लगी आग

कर्नाटक के गृहमंत्री रामालिंगा रेड्डी ने किया नामांकन दाखिल

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हथियारों के साथ 3 लोगों को किया गिरफ्तार

11.71 अंक गिरकर 34415 पर बंद हुआ सेंसेक्स, निफ्टी 10564 पर बंद

साल दर साल, हादसे दर हादसे  

Rising At 8am | 31-Dec-2017 | Posted by - Admin

 

  • बेकाबू रफ्तार लील रही है जिन्दगी
  • साल बीत गया लेकिन नहीं लग पाए स्पीड गवर्नर
   
Latest and Trending Updates of Accidents on Highway

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

आगरा एक्सप्रेस वे पर तीन दिन में तीन हादसें। आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत। हादसों की वजह बेकाबू रफ्तार। एक प्रशिक्षु आइएएस भी टायर फटने के कारण हादसे का शिकार हुए और जान भी चली गई लेकिन परिवहन विभाग और अधिकारी नया साल मनाने में ही व्यस्त रहें। दरअसल प्रदेश में सड़क हादसों को लेकर सरकार और परिवहन महकमे की गंभीरता का आलम इसी से लगाया जा सकता है कि साल दर साल हादसे बढ़ रहे हैं लेकिन व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का आदेश शासन से विभाग तक नहीं पहुंच पाया है। लिहाजा वाहन चालक भी अंधाधुंध वाहन दौड़ा रहे हैं। साल भर में प्रदेश में 19500 के करीब मौत के बाद सरकार फिलहाल आंख पर काला चश्मा लगाए मृत्यु की गिनती गिनने में लगी है। हादसे लगातार हो रहे हैं लेकिन बचाव के इंतजाम कार्यालयों के एसी दफ्तर में हो रहे हैं। परिणाम सड़क पर दिख रहा है।

 

खास बात यह है कि इस रफ्तार की चपेट में केवल निजी वाहन चालक ही नहीं है बल्कि इसमें सरकारी बसें तक शामिल हैं। रोडवेज की करीब 12000 बसों में महज बीस –पचीस फीसद में ही स्पीड गवर्नर है, वह भी इस कारण क्योंकि उच्चतम न्यायालय वर्ष 2015 के बाद की बसों में स्पीड गवर्नर होना अनिवार्य कर रखा है। अन्यथा बाकी बसें वैसे ही फर्राटा भर रही हैं। अधिकारी कमीशनखोरी में टेंडर जारी करने के लिए जमीन तैयार करने में जुटे हैं। इसी तरह से प्रदेश में स्कूली वाहन से लेकर बसें, यात्री वाहन व कामर्शियल वाहन सभी बिना गवर्नर के चल रहे हैं। यानी स्पीड पर कोई लगाम नहीं है।

परिवहन आयुक्त कार्यालय के अधिकारी बताते हैं कि वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का फैसला हो चुका है। केवल वाहनों की फिटनेस के वक्त स्पीड गवर्नर की जांच को अनिवार्य किया जाना है। इसका प्रस्ताव शासन को कई महीने पहले भेजा जा चुका है लेकिन वहा से आदेश की संस्तुति नहीं हुई है। लिहाजा वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लग गए रहे हैं। खास बात यह है कि शासन की इस सुस्त रफ्तारी का शिकार केवल यात्री व कामर्शियल वाहन ही नहीं बल्कि स्कूली वाहन तक हैं। राजधानी में छह हजार से ज्यादा स्कूली वाहन बिना स्पीड गवर्नर के ही संचालित हो रहे हैं। समय बचाने के लिए यह बच्चों की जान से खिलवाड़ करने में भी जरा नहीं चूकतें।

 

दस महीने बाद भी ढाक के तीन पात

हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दो फरवरी 2017 को वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया। हालांकि स्पीड गवर्नर को लेकर 2015 से ही कवायद चल रही थी। इसकी मियाद को कई बार बढ़ाया गया लेकिन फरवरी 2017 में इसे अनिवार्य कर दिया गया। कई राज्यों ने इसके बाद स्पीड गवर्नर को अनिवार्य भी कर दिया लेकिन प्रदेश में दस महीने बीतने के बाद भी इस आदेश को लागू नहीं किया। इसकी वजह थी कि पहले सरकार टेंडर के माध्यम से स्पीड गवर्नर लगाने की प्रक्रिया कर रही थी लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने टेंडर को समाप्त कर दिया। उसके बाद फरवरी 2017 से अनिवार्य भी कर दिया। मगर प्रदेश में अभी तक स्पीड गवर्नर लगाने का आदेश नहीं हो पाया। इस मामले में परिवहन विभाग के आलाधिकारी भी शासन का मसला बताकर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं।

कई स्कूल वाहन हुए हादसा ग्रस्त

कानपुर रोड पर बिजनौर मोड़ के पास पिछले दिनों एक इंजीनियरिंग कालेज की तेज रफ्तार बस पलट गई। करीब एक दर्जन बच्चे चोटिल हुए। मगर परिवहन विभाग पर इसका कोई प्रभाव पड़ा न शासन की नींद टूटी। इसी तरह से सुल्तानपुर रोड पर बच्चों को ले जाने वाली वैन उलट गई। सीतापुर में तो तेज रफ्तार स्कूली वाहन टेंपो से ही टकरा गया। मगर विभाग निरविकार भाव से शासन से स्पीड गवर्नर को अनिवार्य किए जाने की संस्तुति का इंतजार कर रहा है।

 

बंद कमरे से सड़क सुरक्षा

कहने को भारत सरकार के निर्देश पर परिवहन विभाग में एक सड़क सुरक्षा का महकमा बन गया है। पूरी इकाई काम कर रही है लेकिन केवल दफ्तर में। दरअसल सड़क सुरक्षा में तीन ई यानी इंजीनियरिंग, एजुकेशन और इमरजेंसी ट्रामा तीन चीजें शामिल हैं लेकिन हकीकत में इनमें ही कोई तालमेल नहीं है। लिहाजा सड़क सुरक्षा काम केवल कागज पर हो रहा है। इस कारण से भी हादसों पर प्रभावी रूप से कोई लगाम नहीं लग पा रही है।

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555







TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll

Merchants-Views-on-Yogi-Government-One-Year-Completion




Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news