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दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

बिहार के मुजफ्फरपुर में बच्चियों के रेप मामले लगातार आग पकड़ता जा रहा है। यह बात साफ हो गई है कि 44 में से 29 बालिकाओं का रेप हुआ, आठ की रिपोर्ट आनी बाकी है और दो की हालत ऐसी नहीं थी कि मेडिकल कराया जा सके। उनकी जांच बाद में होगी। एक बच्‍ची की हत्‍या कर उसे दफनाने की भी बात सामने आ रही है और ऐसी भी खबर है कि 2015 तक चार लड़कियां गायब भी हुई हैं।

 

बिहार सरकार ने इस पूरे कांड की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट के बाद जो पहली गिरफ्तारी हुई वो थी ब्रजेश ठाकुर की। वही ब्रजेश ठाकुर, जिसके एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति की ओर से बालिका गृह चलाया जा रहा था।

ब्रजेश ठाकुर रहने वाला मुजफ्फरपुर का ही है। इसके पिता राधामोहन ठाकुर ने 1982 में मुजफ्फरपुर से एक हिंदी अखबार शुरू किया था। इस अखबार का नाम था प्रात: कमल। राधामोहन ठाकुर की पत्रकारों के बीच अच्छी पहुंच थी। बिहार में छोटे अखबारों को शुरू करने वाले शुरुआती नामों में से एक नाम राधामोहन ठाकुर का भी था।

 

धीरे-धीरे राधामोहन ठाकुर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लेने शुरू कर दिए। इन विज्ञापनों से राधामोहन ठाकुर ने खूब पैसे बनाए और फिर उसे रियल स्टेट में लगा दिया। वो रियल स्टेट का शुरुआती दौर था, तो राधामोहन ठाकुर ने इससे भी खूब पैसे बनाए।

ब्रजेश ने संभाली कमान

जब पिता की मौत हो गई, तो विरासत संभालने का जिम्मा आया ब्रजेश ठाकुर पर। पैसे पहले से ही थे और पिता का रसूख भी था। इसलिए ब्रजेश के हाथ में कमान आते ही उसने रियल स्टेट के कारोबार से एक कदम आगे बढ़कर राजनीति में हाथ आजमाना शुरू कर दिया। 1993 में जब बिहार के एक चर्चित नेता आनंद मोहन ने जनता दल से अलग होकर अपनी पार्टी बिहार पीपल्स पार्टी बनाई तो ब्रजेश ठाकुर उसमें शामिल हो गया।

 

सम्राट से डर गया ब्रजेश

1995 में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए, तो ब्रजेश ठाकुर मुजफ्फरपुर के कुड़हानी विधानसभा सीट से बिहार पीपल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ गया। उसके सामने थे लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के दिग्गज नेता बसावन प्रसाद भागवत, लेकिन इस चुनाव में बिहार का एक और बाहुबली मैदान में था। उस बाहुबली का नाम था अशोक सम्राट। अशोक सम्राट के बारे में कहा जाता है कि बिहार के अपराध जगत में 90 के दशक में एके 47 की जो पहली खेप पहुंची थी, वो अशोक सम्राट के पास ही पहुंची थी, जिससे बरौनी में जीरोमाइल के पास एक ठेकेदार की हत्या की गई थी। इस हत्या के बाद से ही अशोक सम्राट का उत्तरी बिहार में सिक्का चलने लगा था।

इसी अशोक ने सीधे-सीधे ब्रजेश ठाकुर को चुनाव न लड़ने की धमकी दी। जब तक सम्राट अशोक की धमकी पर ब्रजेश ठाकुर नाम वापस लेता, नाम वापसी का दिन बीत गया था। इसके बाद ब्रजेश ठाकुर ने खुद को चुनाव से अलग कर लिया। जब नतीजा आया तो बसावन प्रसाद भागवत चुनाव जीत गए थे और ब्रजेश ठाकुर को 202 वोट मिले थे। 2000 के विधानसभा चुनाव में भी ब्रजेश ठाकुर एक बार फिर से कुड़हानी से ही चुनाव लड़ने उतरा। इस बार उसे अशोक सम्राट की धमकी का डर नहीं था, क्योंकि हाजीपुर पुलिस ने अशोक सम्राट को एक मुठभेड़ में मार गिराया था। ब्रजेश ने जमकर चुनाव प्रचार किया और खूब पैसे खर्च किए, लेकिन वो जीत नहीं सका।

 

इस बार भी बसावन प्रसाद भागवत ने ब्रजेश को मात दी, लेकिन इस चुनाव में ब्रजेश दूसरे नंबर पर आ गया था। उसे 32,795 वोट मिले थे, जबकि बसावन प्रसाद को 48,343 वोट मिले थे। 2005 में ब्रजेश ठाकुर फिर से चुनाव लड़ता, उससे पहले ही 2004 में बिहार पीपल्स पार्टी के मुखिया आनंद मोहन ने अपनी पार्टी का कांग्रेस के साथ विलय कर दिया। इसके बाद ब्रजेश ठाकुर के चुनाव लड़ने के रास्ते बंद हो गए।

सियासी रसूख कम नहीं

ब्रजेश ठाकुर की आनंद मोहन से नज़दीकी बरकरार रही। इसके साथ ही राजद और जदयू के नेताओं के साथ भी ब्रजेश ठाकुर का उठना-बैठना जारी रहा। इसी बीच ब्रजेश ठाकुर ने अपने अखबार प्रात: कमल का मालिक अपने बेटे राहुल आनंद को बना दिया। कागज़ात के मुताबिक ब्रजेश खुद उस अखबार में सिर्फ पत्रकार है। स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक 2005 में जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो ब्रजेश ठाकुर ने मुजफ्फरपुर में अपने घर बेटे राहुल आनंद के जन्मदिन की पार्टी दी।

 

इस पार्टी में शामिल होने के लिए उस वक्त के बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहुंचे थे। ब्रजेश के सियासी रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रात: कमल जैसे अखबार को भारी सरकारी विज्ञापन मिलने लगे और उसे बिहार सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त पत्रकार का तमगा भी मिल गया।

आनंद मोहन के साथ हर हाल में खड़ा रहा ब्रजेश

जब आनंद मोहन को गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की हत्या में जेल हो गई, तो भी ब्रजेश ठाकुर आनंद मोहन से मिलने जेल में जाता रहा। इतना ही नहीं, जब-जब आनंद मोहन की जेल बदली हुई, ब्रजेश आनंद मोहन के साथ खड़ा दिखा।

 

अखबार शुरू किए

इसी बीच 2012 में ब्रजेश ठाकुर ने एक अंग्रेजी का अखबार भी शुरू कर दिया। इस अखबार का नाम है News Next, जिसकी एडिटर इन चीफ हैं ब्रजेश ठाकुर की बेटी निकिता आनंद। इसके अगले ही साल ब्रजेश ठाकुर ने अपना एनजीओ शुरू किया, जिसका नाम है सेवा संकल्प एवं विकास समिति। इस एनजीओ के बैनर तले ब्रजेश ठाकुर ने बालिका गृह की शुरुआत कर दी। इस बीच उसने ऊर्दू का भी एक अखबार लॉन्च कर दिया, जिसका नाम है हालात-ए-बिहार। अब तीनों अखबार प्रात: कमल, News Next और हालात-ए-बिहार के साथ ही बालिका गृह का भी संचालन एक ही बिल्डिंग से होने लगा, जो ब्रजेश ठाकुर के घर से सटी हुई है। तीनों ही अखबारों को बिहार सरकार की ओर से विज्ञापन मिलते हैं और अब भी तीनों ही अखबार हर रोज छपते हैं।

मरा नहीं सियासी कीड़ा

ब्रजेश ठाकुर के अंदर का सियासी कीड़ा मरा नहीं था। उसकी खुद की सियासी पारी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई, जिसके बाद उसने अपने बेटे राहुल आनंद को 2016 में जिला परिषद के चुनाव में कुड़नी से उतार दिया। चुनाव हुआ और राहुल आनंद ने जीत भी दर्ज कर ली। इसके बाद से लगातार ब्रजेश ठाकुर सेवा संकल्प एवं विकास समिति एनजीओ चलाता रहा, जिसमें बालिका गृह भी चलता था।

 

रेप केस में आ सकते हैं कई नाम

बालिका गृह की 44 बच्चियों में से 29 बच्चियों के साथ रेप हुआ है। आठ बच्चियों की मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है। दो बच्चियों की हालत ऐसी नहीं थी कि उनकी मेडिकल जांच करवाई जा सके। इसलिए उनका मेडिकल बाद में होगा। इस बालिका गृह में एक बच्ची की हत्या कर शव दफनाने की भी बात सामने आई है, जिसके लिए बालिका गृह की खुदाई की गई है और वहां की मिट्टी को जांच के लिए भेजा गया है। डीजीपी केएस द्विवेदी के मुताबिक 2013 से 2015 के बीच इस बालिका गृह से चार बच्चियों के गायब होने की भी पुष्टि हो चुकी है। मामला अब सीबीआई के हाथ में जाने वाला है, जिसके बाद ब्रजेश ठाकुर जैसे और भी सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं।

 

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