Actress katrina Kaif and Mouni Roy Visited Durga Puja Pandal

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

फबिंग…एक ऐसी परिस्थिति जिससे हम सब क्रिएट करते हैं। इसका मतलब उस स्थिति से है जब आप सामने खड़े व्यक्ति की अनदेखी कर अपने मोबाइल पर लगे रहते हैं। यह जानी मानी परिस्थिति है। वो सामान्य स्थिति है जब किसी से मुलाकात के दौरान उनके पास एक टेक्स्ट मैसेज आता है, फिर वो अपने ईमेल और अन्य सोशल मीडिया ऐप्प देखने में व्यस्त हो जाते है और आप वहां बैठे उनका इंतज़ार करते रहते हैं। एक खास अनुभव के बाद ब्रिटेन की केंट यूनिवर्सिटी के वरोत ने खुद ही “फबिंग” के पीछे मानसिक स्थिति पर रिसर्च किया और पाया कि इससे आपकी मानसिक स्थिति और लोगों से ताल्लुकात दोनों ही प्रभावित होते हैं।

ट्रिप चल रही थी और फबिंग कर रहे थे दोस्‍त

वो कहते हैं, “मुझे बहुत सालों के बाद एक लंबी छुट्टी मिली तो मैंने अपने हाई स्कूल के दोस्तों के साथ थाईलैंड के खुबसूरत इलाकों का कार्यक्रम बना लिया क्योंकि पिछले 10 सालों में हम एक साथ कहीं नहीं गए थे।" "मैं इस ट्रिप को लेकर बहुत उत्साहित था, लेकिन दुर्भाग्यवश तीन दिन और दो रात के लिए बनाया गया यह कार्यक्रम वैसा नहीं था जैसा कि मैंने सोचा था।" "इस पूरे ट्रिप के दौरान मेरे सभी दोस्त अपने गर्दन झुकाए स्मार्टफोन में व्यस्त रहे। उस ट्रिप की यादों में उनके चेहरे से ज्‍यादा उनके सिर मेरे जेहन में हैं।"

 

फबिंग का असर

वो कहते हैं, "बहुत सारी उलझनों को लेकर उस ट्रिप से मैं घर लौटा और इस सोच में पड़ गया कि क्या मेरे दोस्तों का वो व्यवहार सामान्य था? आखिर क्या हुआ है उन्हें? क्या होगा अगर इस दुनिया में रहने वाले अधिकतर लोग ऐसा ही व्यवहार दिखाने लगें?" "और फिर मैंने इसकी पढ़ाई करने के लिए पीएचडी प्रोग्राम के लिए अप्लाई कर दिया।" "रिसर्च के दौरान हमने पाया कि सामने वाले व्यक्ति पर फबिंग का बहुत नकारात्मक असर पड़ता है। बातचीत के दौरान फबिंग से सामने वाला व्यक्ति कम संतुष्ट होता है। वो बातचीत के दौरान खुद को कम जुड़ा हुआ महसूस करता है।

अगर बार बार हो

अगर कोई इसे बार बार कर रहा हो तो सामने वाले व्यक्ति का उसमें यकीन कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में मनोदशा नकारात्मक हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति के साथ फबिंग की घटना बार बार होती है तो वो इसका ज़िक्र लोगों से करता है और ऐसे में यदि पाता है कि बातचीत के दौरान अपने फोन पर लगे रहना आज आम बात है तो वो खुद भी ऐसा करना शुरू कर देता है।

 

थाइलैंड, एशियाई देशों और यूरोप में मोबाइल के इस्तेमाल में बहुत बड़ा फर्क है। थाईलैंड में लोग पांच घंटे प्रतिदिन अपने मोबाइल फोन पर लगे रहते हैं वहीं इंग्लैंड में यह दो से ढाई घंटा है। यानी थाईलैंड में ब्रिटेन की तुलना में फबिंग करने वालों की संख्या बहुत अधिक है।

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