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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जूते की सप्लाई का ठेका बिजली विभाग में काम करने वाली कंपनी पावर इंफ्राटेक का मामला जैसे तैसे सरकार ने ठंडे बस्ते में पहुंचाया था कि अब एक नया मामला सामने आ गया है। इस बार कंप्यूटर व इलेक्ट्रानिक उपकरणों की आपूर्ति करने वाले कंपनी अपट्रान को कर्मचारियों की भर्ती का ठेका दे दिया गया। आयुष विभाग द्वारा आयुर्वेदिक कॉलेजों में करीब डेढ़ हजार कर्मचारियों का भर्ती का है। मामला खुला तो अब विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

 

मामला यह है कि आयुर्वेदिक कॉलेजों में करीब डेढ़ कर्मचारियों की भर्ती होनी थी। इस काम के लिए अपट्रान को लगाया गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कार्य पाने वाली कंपनी इसके पहले कंप्यूटर आदि की सप्लाई का काम करती रही है और ऐसे में कर्मचारियों की तैनाती का काम कैसे मिल गया, यह अपने आप में सवाल है। यही नहीं, सरकार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस प्रतिबद्धता का भी नमूना है। इसके पहले सरकारी स्कूलों में बच्चों को बस्ते, जूते मोजे तथा स्वेटर के वितरण में भी तमाम खामियां आ चुकी हैं। अलीगढ़ में हजारों जोड़ो जूते एक ही पैर के मिले थे, जिस पर जिलाधिकारी आपूर्ति करने वाली फर्म के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है। अब नया मामला सामने आने के बाद अधिकारी इसे शासन स्तर से हुआ फैसला बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अपट्रान कर्मचारियों की आपूर्ति करने करार सचिव मुकेश मेश्राम के यहां से किया गया है। इस बावत वहीं बता सकते हैं। उधर इस संबंध में सचिव मुकेश मेश्राम से बात करने का प्रयास किया गया तो वह उनका फोन नहीं उठा।

 

अफसर बना रहे सरकार का मखौल

वाराणसी में दर्दनाक हादसे में अफसरों की लापरवाही सामने आने के बाद मजबूरी में सरकार जरूर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया लेकिन हकीकत में सरकार किसी भी मामले में कार्रवाई तक को तैयार नहीं है। दरअसल वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र होने की वजह से यहां पर कार्रवाई करना अनिवार्य हो गया। मगर इसके बाद जांच क्या होती है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कुशीनगर में हुई स्कूल वैन दुर्घटना है। इस दुर्घटना को करीब तीन सप्ताह बीत गए हैं। मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं सभी स्कूलों वाहनों की जांच और कार्रवाई के आदेश दिए थे। मगर प्रमुख सचिव परिवहन और परिवहन आयुक्त के संरक्षण अधिकारियों ने इसके लिए महज औपचारिकता भर काम किया। राजधानी में तो स्कूल वाहनों की जांच केवल दिखावे भर को भी नहीं हुई। हालांकि अधिकारी गुरुवार से जांच की बात कर रहे हैं लेकिन इससे कितने वाहन दुरुस्त होंगे, यह भविष्य की बात है।

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