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आधी बस, आधे मुलाजिम लेकिन खर्चा पूरा

| Last Updated : 2018-03-31 09:29:09

 

  • बढ़ती आय, घटती सुविधाएं
  • हाल-ए-सिटी ट्रासंपोर्ट सर्विस

Irregularities in Transport Department


दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

राजधानी से विभिन्‍न मार्गों की सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस की संचालित बसों की संख्‍या के अलावा कर्मचारी भी आधे रह गए हैं। बावजूद इसके बसों पर होने वाले खर्च में कोई कमी नही आई है। बीते कुछ महीनों में राजधानी के विभिन्‍न मार्गों पर संचालित होने वाली बसों की संख्‍या घटकर आधी हो गई है। इसके चलते बसों के चालक एवं परिचालकों का वेतन भी आधा हो गया है। इसकी एक वजह बसों का आफरूट होना है। बसें तो सीमित संख्‍या में है मगर ड्यूटी करने वालो की संख्‍या सैकड़ों में है। हालाकिं सिटी ट्रांसपोर्ट प्रबंधन के द्वारा चालक परिचालकों की ड्यूटी रोटेशन के तहत लगाई जाती है। इससे उनकी आय में भी भारी गिरावट आई है।

पहले जहां चालक परिचालक अपना निर्धारित किलोमीटर पूरा कर हर महीने आठ हजार से बारह हजार रुपए तक का भुगतान लेते थे वहीं वर्तमान में उनकी आय महज पांच हजार से लेकर सात हजार रुपए तक सिमट गई है। इतनी कम आय होने के चलते उनको अपने परिवार का पालन पोषण करने में काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह हाल तब है जब पहले की अपेक्षा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के घाटे में काफी कमी आई है। बावजूद इसके चालक परिचालकों को महीना बीत जाने के बाद भी समय से वेतन मिलने के लाले पड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पूरा महीना बीत जाता है लेकिन वेतन नही मिलता है। सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के प्रबंध निदेशक आरिफ सकलैन ने बताया कि बीते कुछ महीने में सिटी ट्रासपोर्ट सर्विस की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले सवा करोड़ रुपए का घाटा अब सिमटकर करीब पचास लाख रुपए रह गया है।

उन्‍होने बताया कि बसों के आफरूट होने की वजह से वेतन समेत अन्‍य खर्चों में काफी कमी आई है। कर्मचारियों को सुविधाएं एवं बसों की मरम्‍मत के बारे में उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे सभी चीजों को दुरूस्‍त किया जा रहा है। कुछ दिनों में सभी समस्‍याओं का निस्‍तारण हो जायेगा। उन्‍होने बताया कि सिटी ट्रांसपोर्ट में वर्तमान में करीब 800 चालक परिचालक कार्यरत हैं। सभी अनुबंध के अन्‍तर्गत कार्य कर रहे है। निर्धारित किलोमीटर पूरा करने पर भुगतान किया जाता है। बसों की संख्‍या कम एवं भारी संख्‍या में चालक परिचालकों की घटती आय के सवाल के जवाब में बताया कि रोटेशन के अन्‍तर्गत सभी ड्यूटी दी जाती है। उन्‍होने बताया कि वर्तमान में दुबग्‍गा एवं गोमतीनगर डिपो से करीब 90 बसें आफरूट हैं।

छुटटी के चलते कई मार्गों पर बंद कर संचालन

चार दिनों की छुट्टी होने की वजह से सिटी ट्रांसपोर्ट प्रबंधन ने राजधानी के कई मार्गों पर बसों का संचालन बंद कर दिया। इस वजह से इन बसों से सफर करने वाले आम यात्रियों के साथ ही मासिक पास धारक यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के प्रबंध निदेशक आरिफ सकलैन के निर्देश पर मार्ग नम्‍बर 23 पर चलने वाली कांशीराम योजना से इंट्रीगल यूनिर्वसिटी तक, मार्ग नम्‍बर 13 पर कटी बगिया से चारबाग एवं मार्ग नम्‍बर 44 पर चारबाग से दुर्गागंज चौराहा तक चलने वाली बस को बंद कर दिया गया है। जबकि इन मार्गों पर आवागमन करने वाले यात्रियों की संख्‍या अधिक है। एमडी के इस फरमान से एमएसटी धारक या‍त्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। जबकि यात्रा करने के लिए वह पहले ही पैसा जमा कर देते हैं। बावजूद इसके मासिक पास धारक यात्री को यात्रा करने से वंचित किया जा रहा है।

ठगा महसूस कर रहा मासिक पास धारक

इतनी अधिक मात्रा में सिटी बसों के डिपो में खड़ी हो जाने से इन बसों से सफर करने वाले मासिक पास धारक यात्री अपने को ठगा महसूस कर रहें हैं। सिटी ट्रासंपोर्ट सर्विस की बसों से रोजाना करीब 20 से 25 हजार मासिक पास धारक यात्री सफर करते है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुबग्‍गा एवं गोमतीनगर डिपो में औसतन एक-एक लाख रूपये मासिक पास धारकों का ही जमा होता है। बावजूद इसके उनको यात्रा से वंचित किया जा रहा है।

 



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