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बड़े बड़े आरटीओ सड़क सुरक्षा में फिसड्डी

Rising At 8am | 03-Jan-2018 | Posted by - Admin

 

  • राजधानी लखनऊ सहित आठ संभागीय प्रवर्तन अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब
  • प्रतिकूल प्रवष्टि दिए जाने की संकेत
   
Irregularities in RTO in Lucknow

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) का कार्यभार लेकिन सड़क हादसे रोकने से लेकर सड़क सुरक्षा तक के काम में फिसड्डी। लगातार उदासीन रवैया दिखाने वाले प्रदेश के आठ संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) पर अब प्रतिकूल प्रवष्टि की तलवार लटक रही है। दरअसल केंद्रीय सड़क सुरक्षा कमेटी की लगातार निगरानी के बाद इन अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया था। इस पर भी वाराणसी और अलीगढ़ के संभागीय अधिकारियों से आजतक अपना स्पष्टीकरण भेजा ही नहीं है। वहीं गोरखपुर के संभागीय अधिकारी से स्पष्टीकरण भेजने के बजाए स्पष्टीकरण देने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया है। ऐसे अधिकारियों पर अब कार्रवाई की तलवार लटकती दिख रही है। खास बात है कि संभागीय अधिकारियों की इस उदासीनता के लिए संबंधित जोनल अधिकारी ( उप परिवहन आयुक्त) को भी जिम्मेदार माना जा रहा है और ऐसे में उन पर कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।

परिवहन आयुक्त कार्यालय के मुताबिक प्रदेश में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या और हादसों में होने वाली मौतों में इजाफे के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से लेकर उच्चतम न्यायालय से सख्त रुख दिखाया है। लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए गठित केंद्रीय सड़क सुरक्षा कमेटी भी लगातार सड़क सुरक्षा की दिशा में होने वाले कार्यकलापो पर नजर रखे हुए हैं। बावजूद इसके प्रदेश के परिवहन अधिकारियों के रवैये में सुधार कम ही दिख रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 11 सहायक संभागीय प्रवर्तन अधिकारियों तथा आठ यात्रीकर अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया था लेकिन उनमें भी पचास फीसद ने अपने स्पष्टीकरण तक नहीं दिए हैं। इसमें मैनपुरी, चित्रकूट, पीलीभीत, कुशीनगर, संत रविदास नगर, हाथरस, आजमगढ़, महोबा, फर्रूखाबाद, अमेठी और संभल के एआरटीओ (प्रवर्तन) शामिल हैं। इसके अलावा मैनपुरी, चित्रकूट, कुशीनगर, हाथरस, आजमगढ़, महोबा, अमेठी और संभल के यात्रीकर अधिकारियों से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया था।

 

इनसे मांगा गया स्पष्टीकरण

 

आदेश के बावजूद अनुपालन में ढिलाई

प्रदेश में सड़क सुरक्षा के मद्देनजर प्रत्येक बुधवार को हेलमेट –सीट बेल्ट के लिए जांच अभियान चलाना अनिवार्य कर दिया गया है लेकिन प्रदेश भर में इस अभियान के नाम पर सिर्फ औपचारिकता हो रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार तीन जनवरी 2018 को ही शाम चार बजे तक पूरे प्रदेश में पांच हजार से भी कम चालान हुए थे। राजधानी में ही अभियान यात्रीकरण अधिकारियों के सहारे चलता दिखा। इतना जरूर था कि सुबह आरटीओ दफ्तर के परिसर के पास ही जांच शुरू हो गई थी और एआरटीओ प्रशासन राघवेंद्र सिंह व यात्रीकर अधिकारी नागेंद्र वाजपेयी ने यहां पर दर्जनों चालान किए। खास बात यह है कि विभिन्न काम से आरटीओ आने वाले लोग व कई कर्मचारी ही बिना हेलमेट –सीट बेल्ट के पकड़े गए। हालांकि बाकी प्रवर्तन शाखा एआरटीओ जांच में नहीं दिखे। इतना जरूर रहा कि शाम को गोमतीनगर अभियान के दौरान एक एआरटीओ प्रवर्तन जांच करते दिखे। खास बात यह है कि अभियान के दौरान होने वाली पूरी कार्रवाई की निगरानी भी चल रही थी और पूरे प्रदेश में हर घंटे होने वाले चालानों की निगरानी की जा रही है। ऐसे में कई अधिकारियों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

सड़क सुरक्षा के नाम पर मजाक

सुप्रीम कोर्ट ने कामर्शिलय वाहनों के लिए स्पीड गवर्नर अनिवार्य कर दिया है। एक फरवरी 2017 से इसे अनिवार्य रूप से लागू हो जाना चाहिए था लेकिन प्रदेश का परिवहन विभाग इसे आज तक लागू नहीं करा पाया है। खास बात यह है कि इस संबंध में परिवहन अधिकारी भी इसे अब अनिवार्य बताते हैं लेकिन शासन से इसकी संस्तुति को लेकर चुप्पी साध लेते हैं। ऐसे में सरकार में बैठे परिवहन विभाग के अधिकारियों व मंत्री तक की मंशा पर अपने आप ही सवाल खड़ा हो जाता है।

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