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दि राइजिंग न्यूज़ 

संजय शुक्ल                               

लखनऊ ।  

परिवहन दफ्तर में नियमों और कायदों की किस तरह से धज्जियां उड़ाई जाती हैं, इसका ताजा तरीन नमूना अलीगढ़ संभागीय दफ्तर हैं। यहां पर कार्यरत बाबुओं ने नियमों को कुछ इस तरह से बेंचा कि बीस साल के लिए जारी होने वाला वन टाइम लाइसेंस सीधे पचास साल तक की उम्र के लिए जारी कर दिया गया। खास बात यह है कि यह खेल पिछले कई दशकों से चल रहा था और अधिकारी भी आंख मूंद कर लाइसेंस जारी कर रहे थे। मामला कोई दो महीने पहले सामने आया तो दफ्तर में हड़कंप मच गया। हालांकि इसे लिपकीय त्रुटि करार दिया जा रहा है। लेकिन अहम सवाल यह है कि लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत संभागीय निरीक्षक (आरआई) अथवा एआरटीओ ही होतें हैं तो फिर यह लिपकीय त्रुटि कैसे करार दी जा सकती है। उधर, मामला संज्ञान में आने के बाद अपर परिवहन आयुक्त (प्रशासन) एके अग्निहोत्री ने प्रकरण की जांच कराने का दावा किया है।

इस तरह से हुई गड़बड़

मोटर यान अधिनियम के तहत ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन करने वालों के लिए वन टाइम बीस साल तक का लाइसेंस जारी करने का प्रावधान है। यानी 18 वर्ष की आयु में आवेदक को लाइसेंस मिल रहा है तो वह 38 वर्ष की आयु तक लाइसेंस पा सकता है। उसके बाद नियमानुसार उसका समय–समय पर रिनीवल का प्रावधान होता है। इसी तरह आवेदक की आयु 30 वर्ष है तो वह 50 वर्ष तक लाइसेंस हासिल कर सकता है। यानी वन टाइम लाइसेंस की अवधि बीस साल ही होती है। मगर अलीगढ़ में अधिकतम बीस या पचास वर्ष की अवधि की विवेचना को ही बदल गया। यानी लाइसेंस सीधे पचास साल की आयु तक के लिए जारी कर दिए गए। इन लाइसेंस की संख्या भी हजारों में बताई जा रही है। जनवरी 2018 में मामला खुला तो विभाग में हड़कंप मच गया। नोटिस बोर्ड पर चस्पा करा दिया गया कि इस तरह के लाइसेंस फर्जी हैं और उन्हें तत्काल नए तरीके से जारी कराया जाए। अन्यथा नियमानुसार पेनाल्टी की वसूली जाएगी।

ऐसे पकड़ में आया मामला

दरअसल प्रदेश भर में वाहन लाइसेंसों को आनलाइन करने की प्रक्रिया का काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए पुराने लाइसेंसों को डाटाबेस पर फीड किया जा रहा है। अलीगढ़ में रिनीवल के लिए आने वाले लाइसेंस साफ्टवेयर पर रिजेक्ट किए जाने के बाद मामले की पड़ताल शुरू की गई तो मामला खुला। उधर, इतना बड़ा गोरखधंधा सामने आने के बाद परिवहन अधिकारी भी बैकफुट पर दिखाई दे रहे हैं। अलीगढ़ के संभागीय परिवहन अधिकारी राधे श्याम सिंह इसे लिपकीय त्रुटि करार दे रहे हैं। उनके मुताबिक क्लर्क लोगों ने बीस साल की अवधि या पचास वर्ष की आयु तक की बात को स्पष्ट नहीं समझा, जिससे यह गड़बड़ी हुई। आरटीओ के मुताबिक इसमें जिन क्लर्क द्वारा ऐसा किया गया है, वे भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कोई वित्तीय त्रुटि भी नहीं हुई है।

जांच के आदेश

उधर अलीगढ़ में ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने के मामले में अपर परिवहन आयुक्त आशुतोष अग्निहोत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लाइसेंस जारी करने कि लिए क्लर्क जिम्मेदार नहीं होता है और लाइसेंस प्रदाता अधिकारी आरआई अथवा एआरटीओ ही होता है। ऐसे में इस पूरी अवधि के दौरान जो अधिकारी पदों पर तैनात रहे, उनकी भूमिका की जांच कराई जाएगी।

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