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दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।

सड़क सुरक्षा सप्ताह बीते 21 दिन यानी करीब तीन सप्ताह हो चुके हैं लेकिन परिवहन विभाग सप्ताह के आयोजन से ज्यादा मशक्कत में लगा है। मशक्कत हो रही है इस सप्ताह के आयोजन के लिए आवंटित धन एवं एकत्र धन के व्यय के बिल तैयार करने में। हालांकि सप्ताह कितना सार्थक था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गत 23 मई से 30 मई के बीच आयोजित सप्ताह में ही आधा दर्जन से ज्यादा बड़े हादसे हुए। करीब 87 लोगों की मौत हुई। इनमें 13 मासूम स्कूली बच्चे भी थे मगर परिवहन विभाग केवल सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाता रहा। खास बात यह है कि स्कूल वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ही परिवहन विभाग कई बड़े अधिकारी भी सड़क सुरक्षा कार्यक्रम में दिखे, वर्ना मंत्री कर्नाटक चुनाव में थे लिहाजा नौकरशाहों को इसमें शिरकत करने की फुरसत नहीं थीं।

अब जरा गौर करें। सड़क सुरक्षा के तहत आयोजित पहले दिन के कार्यक्रम में कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला रोडवेज के मीटिंग हाल में हुई। इसमें खर्च केवल नाश्ते व बांटे गए फोल्डर का था। इसी तरह से दूसरे दिन कार्यक्रम स्कूलों में था। वहां पर विभिन्न कार्यक्रम हुए और उसमें विजेता बच्चों को पुरस्कार दिए गए। तीसरे दिन का कार्यक्रम हेलमेट सीट बेल्ट से जुड़ा था। बीकेटी के विधायक अविनाश त्रिवेदी का आगमन था और उसके लिए गोमती नगर में पंडाल लगा। बामुश्किल आधे घंटे के कार्यक्रम के बाद बड़े अधिकारी वहां से निकल कर दफ्तर पहुंच गए जबकि बच्चों व विभागीय अधिकारियों ने नाश्ता आदि किया। अगले दिन वाहन चालकों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कैसरबाग बस अड्डे के प्रथम तल पर बने रेस्त्रां में हुआ। यहां बैंगनी गुब्बारों से बच्चे के बर्थडे के माफिक सजावट की गई और आगंतुकों को नाश्ता दिया गया। इस बार भी यहां ना प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला थीं न परिवहन आयुक्त पी गुरुप्रसाद। 

अगले दिन यानी 26 अप्रैल को कुशीनगर हादसा हो गया। 13 मासूमों की जान चली गईं। घटना इतनी दर्दनाक थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सारे कार्यक्रम रद्द कर कुशीनगर पहुंच गए। उनका पहुंचने भर का ही कमाल था कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान विलुप्त चल रहे परिवहन विभाग के शीर्ष अधिकारी भी दिखने लगें। अगले दिन कार्यक्रम वाकथान का था और इसे खुद मुख्यमंत्री ने झंडी दिखा कर रवाना किया। एक दिन पहले ही शाम को मुख्यमंत्री के शामिल होने की सूचना का कमाल यह था कि इसमें सीतापुर व रायबरेली से बच्चों को बुलाकर वाकथान में दौड़ा दिया गया। खैर इस वाकथान के अगले अंतिम दिन महिलाओं की वाहन रैली व सड़क हादसों में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस पूरे एक सप्ताह के कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा कहां की गई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। मुख्यमंत्री के आगमन और प्रमुख सचिव मौजूदगी के बाद अंतिम दो दिन जरूर विभाग में सड़क सुरक्षा जागरुकता कार्यक्रम को लेकर कुछ तेजी दिखाई गई लेकिन उसके पहले तो केवल रस्म अदायगी हुई।

मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद नहीं बदला रवैया

कुशीनगर हादसे के बाद दुखी मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सभी जिलों में स्कूल वाहनों की जांच के आदेश दिए थे लेकिन उसे भी अधिकारी टाल गए। केवल रस्म अदायगी को जांच हुई। दो मई को परिवहन आयुक्त गुरुप्रसाद ने भी इस संबंध में आदेश जारी कर 14 मई तक रिपोर्ट तलब की थी लेकिन मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार तक किसी जिले से रिपोर्ट नहीं नहीं आई है। मुख्यमंत्री की सख्ती का इतना असर जरूर दिखा कि शुरुआती दिनों में ही लापता रहे अधिकारी सड़क सुरक्षा सप्ताह के आयोजनों की समीक्षा करने को आतुर दिखें।

“सभी अधिकारियों को जांच रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश दिए गए थे। अभी ज्यादातर स्थानों से रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद के बाद ही पता चल पाएगा कि कितने वाहनों की जांच की गई। इसमें जांच करने वालों से स्पष्टीकरण जरूर तलब किया जाएगा।”

अनिल कुमार मिश्र

उप परिवहन आय़ुक्त

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