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दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

पाकिस्तान में 25 जुलाई को मतदान होना है। इस बार के चुनाव में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है, जो पाकिस्तान में इससे पहले कभी नहीं हुआ। आइए जानते हैं उन बातों के बारे में-

निर्वाचित सरकार किसी असैन्य सरकार को सौंपेगी सत्ता

पाकिस्तान में किसी प्रधानमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। पाकिस्तान में सैन्य विद्रोह का इतिहास रहा है। यहां पहला आम चुनाव वर्ष 1970 में हुआ था। इस बार के चुनाव के बाद पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा दूसरा मौका होगा, जब एक निर्वाचित सरकार किसी असैन्य सरकार को सत्ता सौंपेगी।

तीन बार पीएम बनने वाले नहीं लड़ सकते चुनाव

इस बार एक ऐसे राजनेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं है, जो पाकिस्तान में तीन बार प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाल चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) ने साल 2013 का चुनाव जीता था। पिछले साल अदालत ने उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य पाया और भ्रष्टाचार के मामले में हाल ही में उन्हें 10 साल क़ैद की सजा सुनाई है। नवाज शरीफ इन आरोपों से इनकार करते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से इसके लिए सेना को जिम्मेदार बताते हैं।

उग्र समूहों को मुख्यधारा की राजनीति में आने का मौका

ये चुनाव इस लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है कि इसमें अति दक्षिणपंथी और अतिवादी उम्मीदवार बड़ी संख्या में चुनाव लड़ रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में इस बात की चिंता जताई जा रही है कि उग्र समूहों को मुख्यधारा की राजनीति में आने का मौका दिया जा रहा है। इस चुनाव में ईशनिंदा एक बड़ा मुद्दा है जिसके लिए पाकिस्तान में मौत की सज़ा का प्रावधान है।

चुनाव में महिला प्रत्‍याशियों की बड़ी संख्‍या

ये चुनाव इस मायने में भी खास है कि इस बार पहले के मुकाबले कहीं अधिक महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं। पूरे देश में संसद की 272 सीटों पर लगभग 171 महिला उम्मीदवार खड़ी हुई हैं। इनमें अली बेगम का नाम भी शुमार है जो पुरुष प्रधान कबायली इलाके से चुनाव लड़ रही पाकिस्तान की पहली महिला उम्मीदवार हैं।

वैसे पाकिस्तान में चुनाव आयोग का एक नियम ये भी कहता है कि किसी चुनावी क्षेत्र में 10 प्रतिशत से कम महिलाओं की भागीदारी हुई, तो चुनावी प्रक्रिया रद्द कर दी जाती है।

पहली बार ट्रांसजेंडर्स को भी मौका

इस बार के चुनाव में ट्रांसजेंडर्स को भी राजनीति में हाथ आजमाने का मौका मिला है। पांच ट्रांसजेंडर्स उम्मीदवारों को आम चुनाव लड़ने की इजाजत दी गई है। ट्रांसजेंडर्स, पाकिस्तान में बेहद अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जिन्हें साल 2013 में चुनाव लड़ने की अनुमति पहली बार दी गई थी। स्थानीय खबरों में कहा गया है कि इस बार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की निगरानी के लिए ट्रांसजेंडर्स की सेवाएं भी ली जाएंगी।

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