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दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।

गुरुवार को आईटी चौराहे के नजदीक विवेकानंद अस्पताल ओवरब्रिज के पास बने ग्लोबल अस्पताल में शार्ट सर्किट से आग लग गई। आग से बचने की प्रयास में एक बच्ची गिर गई और उसकी रीढ़ ही हड्डी टूट गई। दमकल विभाग के मुताबिक अस्पताल में आग के इंतजाम दुरुस्त नहीं थे। मगर चिकित्सकों की ऊंची पहुंच के चलते आग की पूरी घटना एक बार फिर दबा दी जाएगी। वैसे यह पहला मामला नहीं है। राजधानी में किंग जार्ज मेडिकल कालेज में ही पिछले एक साल में आग लगने की कई घटनाएं हुई। उसके बावजूद अभी तक केजीएमयू में अग्निसुरक्षा इंतजाम पूरे नहीं है। न ही उसके पास फायर विभाग की एनओसी है।

दरअसल केवल इन अस्पतालों की बात क्यों की जाएं। अग्निसुरक्षा के लिहाज से राजधानी तमाम स्कूल भी सुरक्षित नहीं है। पिछले दिनों इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख दिखाया था। उसके बाद स्कूलों में अग्निसुरक्षा की जांच (फायर आडिट) करा उसकी रिपोर्ट 45 दिन में तलब की है। इस आदेश को भी एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन किसी स्कूल जांच नहीं की गई। फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसके सभी संबंधित फायर स्टेशनों को सूचित कर दिया गया है। जल्द ही अधिकारी वहां पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेंगे।

अनिवार्य है फायर विभाग की एनओसी

बहुमंजिला आवासीय अपार्टमेंट, अस्पताल, स्कूल, होटल और रेस्त्रां आदि के लिए फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र आवश्यक होता है। बिना इसके इनका संचालन नहीं किया जा सकता है। मगर उदासीनता का आलम यह है कि एनओसी के नाम पर केवल वसूली का खेल चल रहा है। दमकल अधिकारी मौके तक जाते हैं न उसकी कोई रिपोर्ट तैयार करते हैं। सारी कवायद नोटिस भेजने और उसके बाद होने वाली वसूली तक ही सीमित रह जाती है। उल्लेखनीय है कि करीब दो साल पहले न्यायालय के एक आदेश के बाद राजधानी में तमाम फैक्ट्री, अपार्टमेंट व अस्पताल को दमकल विभाग ने नोटिस जारी किए थे। वहां फायर सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त कराने के निर्देश दिए थे। नोटिस जारी होने के बाद कुछ समय तो सरगर्मी रहीं लेकिन उसके बाद सारा मामला ठंडा पड़ गया।

तंग गलियों में खड़े हो गए अवैध अपार्टमेंट

लखनऊ विकास प्राधिकरण में व्याप्त भ्रष्टाचार और दमकल विभाग की उदासीनता के चलते तंग गलियों में कई मंजिला अवैध अपार्टमेंट खड़े हो चुके हैं। इनका निर्माण लगातार हो रहा है। मगर यहां पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार विभाग के अधिकारी केवल अपनी जेब भरने में ही मशगूल है। उल्लेखनी है कि पिछले अमीनाबाद मुमताज मार्केट में हुए अग्निकांड में यह बात सामने आई थी। उसके बाद जिलाधिकारी की फटकार के फायर विभाग ने जांच शुरू की लेकिन भ्रष्टाचार के चलते हुआ कुछ नहीं। अलबत्ता मुमताज मार्केट के बेसमेंट में न कहीं खुला स्थान –वेंटीलेटर थे, वहां नई दुकानें जरूर बन गईं।

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