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गरीबों के आशियाने पर दबंगों का कब्जा

     
  
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  • पूर्व प्रमुख सचिव आवास  पूर्व वीसी का खेल
  • बोर्ड बैठक के जरिए दबंगों को ही कब्जा देने का प्रस्ताव को दे दी गई सहमति

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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

पेट काट कर गरीब लोगों ने एलडीए की बसंतकुंज योजना में अपना आशियाना लिया लेकिन एलडीए के भ्रष्ट अधिकारियों अभियंताओं ने लोगों के आशियाने ही लूट लिए। सरकार और प्रशासन दबंगों के कितना प्रभाव में था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल 16 नवंबर को बसंतकुंज योजना में आश्रयहीनों के लिए बने इन मकानों को दबंगों के देने का फैसला कर लिया गया। 

खास बात यह है कि जिन आश्रयहीन लोगों के मकानों पर कब्जा था, उन्हें कब्जेदारों को ही आवंटित करने के प्रस्ताव पर प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने भी सहमति दे दी। अब ये गरीब लोग अपने मकान के लिए एलडीए के चक्कर काट रहे हैं और एलडीए के पास इस तरह के मकान या योजना फिलहाल है ही नहीं।

दरअसल सारा खेल एलडीए के पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में खेला गया। बसंतकुंज योजना में आश्रयहीन कोटे के लोगों के लिए 1006 आवास बनाए गए थे। इनमें करीब एक तिहाई भवनों पर आसपास के ग्रामीणों तथा दबंगों ने कब्जा कर लिया गया। सरकारी मकानों में इस कब्जे की शिकायतें आवंटी लगातार एलडीए में कर रहे थे। इसके लिए एलडीए के पूर्व वीसी ने कमेटी बनाकर दबंगों को उपकृत करने का खेल रच डाला। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इसे एलडीए बोर्ड की बैठक में रखकर उसे पास कर लिया गया।

बिखर गए सपने

एलडीए के इस फैसले से एक छत की तलाश में सालों तक मशक्कत करने वाले लोगों की सपने एक बार फिर बिखर गए। एलडीए बोर्ड बैठक में भले ही कब्जा करने वालों को नियमित करने का प्रस्ताव जारी कर दिया लेकिन मूल आवंटियों के लिए कुछ नहीं किया। मूल अभी तक एलडीए में अधिकारियों के आगे चक्कर काट रहे हैं। मगर एलडीए के पास जमीनमकान कुछ हो तो दें।

करोड़ो रुपये का खेल

सूत्रों के मुताबिक बसंतकुंज योजना में मूल आवंटियों को बेदखल करने के पीछे करोड़ों रुपये का खेल हुआ। एलडीए के पूर्व वीसी के देखरेख में मनमाफिक तरीके से रिपोर्ट बनी और उसे सहमति भी मिल गई जबकि वास्तविक हकदार अभी भी आश्रयहीन हैं। इसमें कई शिकायतें मुख्यमंत्री तक भी पहुंची हैं।

गले की फांस बना बोर्ड का फैसला

उधर एलडीए बोर्ड के इस फैसले से वर्तमान अधिकारी पेसोपेश में हैं। कारण है कि मूल आवंटियों को इस तरह के बेदखल किया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। एलडीए के सचिव जयशंकर दुबे ने बताया कि पूरे प्रकरण की विधिक जांच कराई जा रही है। सम्यक विचार के बाद ही इस पर कोई फैसला किया जाएगा।


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