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दि राइजिंग न्यूज 

संजय शुक्ल

लखनऊ।


एक देश एक टैक्स की अवधारणा पर देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि बाजार में जीएसटी का बिलिंग साफ्टवेयर पहले से तैयार हैं। इनमें कई निजी कंपनियों ने जीएसटी के नाम पर ही साफ्टवेयर के दाम बढ़ा लिए हैं और पांच–छह हजार का साफ्टवेयर बेच रही हैं। खास बात यह है कि ये वहीं कंपनियां जो अभी तक वैट के तहत बिलिंग साफ्टवेयर दे रही थीं। इस साफ्टवेयर में जो बिलिंग होती दिखती है, वह वास्तव में नहीं होती है। केवल वह बिलिंग ही सामने आती है जो साफ्टवेयर के जरिए निर्धारित की जाती है।


सराफा बाजार हो या फिर किराना –पानमसाला। यहां पर अगर टर्नओवर पर नजर डालें तो ज्यादातर फर्मे पिछले पांच साल में महज पंद्रह से बीस फीसद तक तरक्की कर सकीं है लेकिन कारोबारियों की माली हालत में अमूल चूल परिवर्तन हुआ है। कारण है कि मुनाफा ही नहीं, टैक्स तक वह हजम कर रहे हैं। यह सारा कमाल साफ्टवेयर के जरिए हो रहा है।


चोर पर मोर


बिलिगं साफ्टवेयर देने वाली कंपनियों औऱ कारोबारियों के बीच चोर और मोर वाला संबंध हो गया है। अभी दो महीने पहले कई दुकानदारों के यहां बिलिंग साफ्टवेयर अचानक लाक हो गए। उन पर मैसेज आ गए कि उनके डाटा लाक हो गया है। अब इसे खुलवाने के लिए कंपनी ने भी अपने हिसाब मेहनताना वसूला। दरअसल यह व्यापारियों से पैसे निकलवाने का जरिया भर है। खास बात यह है कि करार के समय डाटा लाकिंग की को शर्त भी नहीं होती लेकिन वार्षिक क्लोजिंग के वक्त यह दिक्कत एकदम से बढ़ जाती है।


बिलिंग साफ्टवेयर की सबसे बड़ी कंपनी टैली के अधिकारी बताते हैं कि निजी बिलिंग साफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियां वास्तविक रिकार्ड को डिलीट करने का आपशन देती है, जिससे वह दोबारा उसका डाटा मिल नहीं पाता। इसी कारण व्यापारियों को यह ज्यादा पंसद आता है और उनका ही ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।


अब तो ट्रेड के आधार पर कंपनियों की एकाधिकार


अमीनाबाद थोक दवा बाजार में वहीं नजदीक स्थित एक बिलिंग साफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनी का एकाधिकार है। सैकड़ों दुकानों पर इसी कंपनी के साफ्टवेयर का इस्तेमाल बिलिंग में हो रहा है। इसी तरह से होटल व रेस्त्रां के लिए वजीर हसन रोड व हजरतगंज की बिलिंग कंपनी का नाम आता है।


सबसे मुख्य पान मसाला, किराना व वनस्पति आदि की बिलिंग के लिए जो कंपनी काम कर रही है, वह सुभाष मार्ग पर स्थित एक कारोबारी के नजदीकी की बताई जाती है। सूत्रों के मुताबिक अंडर बिलिंग से लेकर फेक(फर्जी) बिलिंग का सबसे बड़ा खेल पान मसाला व किराना बाजार में ही चल रहा है। इसी कंपनी कई बाजारों के सराफा प्रतिष्ठानों में भी साफ्टवेयर की आपूर्ति की गई है। 


असल चोरी का तोता


वाणिज्य कर विभाग से लेकर प्रदेश व केंद्र सरकार टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए तमाम कवायद कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि व्यापारी की असल बिक्री –टर्नओवर का रिकार्ड इन्हीं निजी साफ्टवेयर कंपनियों के पास रहता है। दरअसल इन लोगों ने पास ही वास्तविक डाटा होते हैं और उन्हीं के जरिए व्यापारी से पैसा ऐंठते हैं जबकि सरकार को अरबों रुपये की चपत लगा रहे हैं।


"निजी बिलिंग साफ्टवेयर के बारे में मामला संज्ञान में आया है। इनमें कई बिलिंग साफ्टवेयर देने वाली कंपनियों को चिन्हित भी कराया जा रहा है। कुछ मुख्य बाजारों में इस्तेमाल हो रहे बिलिंग साफ्टवेयर की बाबत भी जांच तफ्तीश चल रही है। सुराग मिलते ही इसमें प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।"

डा. बुद्धेश मणि

अपर आयुक्त वाणिज्य कर


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