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जांच अभियान मगर सुविधा अनुसार

| Last Updated : 2017-12-14 10:10:22

 

  • हाल हेलमेट सीट बेल्ट जांच अभियान  
  • सुविधा के अनुसार लक्ष्य पूरा करने के लिए हो रही कार्रवाई

Helmet and Checking Scheme of Government inn Lucknow


दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

हर हफ्ते औसतन दस मौत का सबब बनने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए शुरु हुआ हेलमेट सीट बेल्ट जांच अभियान तीसरे हफ्ते में ही औपचारिकता भर बनकर रह गया। जांच अभियान की जिम्मेदारी केवल पीटीओ (यात्रीकर अधिकारियों) पर आकर टिक गई है। एआरटीओ व आरटीओ पहले की तरह से निर्विकार भाव से से हैं जबकि उप आयुक्त और अपर आयुक्त को जांच से सरोकार नहीं रहता है। कुल मिलाकर बुधवार को हेलमेट सीट बेल्ट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने का अभियान महज  औपचारिकता और सुप्रीम कोर्ट को बरगलाने का जरिया भर बन गया है।

 

प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला ने प्रत्येक बुधवार को वाहनों में सीट बेल्ट व हेलमेट की जांच करने के आदेश दिए थे। इसी क्रम में बुधवार को गोमतीनगर स्थित 1090 चौराहा, अलीगंज व आलमबाग में जांच हुई। इन स्थानों पर पीटीओ नागेंद्र बाजपेयी व अंकिता तो थे लेकिन बाकी लोग गायब थे। खास बात यह है कि हर बुधवार को अभियान के नाम पर प्रवर्तन अधिकारी केवल अपनी सुविधा के मुताबिक जांच कर रहे हैं। कागजी कार्रवाई हो रही है लेकिन इससे अंकुश तनिक भी नहीं लग रहा है।  खास बात यह है कि इस पूरे अभियान में यातायात पुलिस को शामिल नहीं किया जा रहा है।

व्यस्तता बता किनारे हो लिए एआरटीओ

 

यातायात रविशंकर निम के मुताबिक गत बुधवार को वाहनों की जांच के लिए परिवहन विभाग के एआरटीओ बीके अस्थाना से ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाने को कहा गया लेकिन बात हवा में उड़ा दी गई। एआरटीओ व्यस्तता बताकर चले गए। हालांकि उसके बाद औपचारिकता के लिए 1090 वाहनों की जांच भी की गई। खास बात यह कि इस पूरे अभियान में ट्रैफिक पुलिस को दरकिनार कर दिया गया है। जबकि वाहनों की जांच व यातायात नियंत्रण का पूरा काम ट्रैफिक पुलिस के हवाले हैं।

इधर जांच, उधर अवैध संचालन

 

खास बात यह है कि बुधवार दोपहर परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी गोमतीनगर में जांच कर रहे थे। जांच अधिकारियों के सामने से ओवर लोड स्कूली वाहन निकल रहे थे लेकिन उसकी जांच की नहीं जानी थीं, लिहाजा उन्हें रोका तक नहीं गया। दरअसल हेलमेट –सीट बेल्ट की जांच करने वाले अधिकारी बाकी सारे यातायात नियम को लेकर आँखें मूंद लेते हैं। लिहाजा उनके सामने कुछ भी होता रहें, ध्यान नहीं दिया जाता। यही हाल हेलमेट व सीट बेल्ट का भी है। इसकी जांच के लिए सप्ताह में एक दिन तय है और उसके अलावा कभी प्रवर्तन दल जांच के लिए नहीं निकलते। लिहाजा राजधानी में अवैध संचालन से लेकर स्कूली वाहनों में ओवरलोडिंग धड़ल्ले से हो रही है। नियम विपरीत स्कूली वाहन संचालित हो रहे हैं लेकिन उन्हें रोकने –जांचने की जहमत परिवहन विभाग नहीं उठाता।

लक्ष्य पूरा करने भर को अभियान

 

प्रदेश में सड़क हादसों में बढ़ते मौत के आंकड़ों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लगी फटकार के बाद परिवहन विभाग ने आनन फानन प्रत्येक बुधवार को हेलमेट सीट बेल्ट की जांच का अभियान शुरू कर दिया लेकिन लक्ष्य के साथ। यानी अधिकारियों को चालानों का लक्ष्य तक दे दिया गया। उन्हें चालान करना रहता है लिहाजा अधिकारी केवल गिनती पूरी करने का काम कर रहे हैं। इससे जागरुकता कितनी आएगी, इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है।

सीयूजी भी निरुत्तर , अधिकारी गायब

 

बुधवार को परिवहन विभाग की जांच के संबंध में जानकारी के लिए संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) विदिशा सिंह को उनके सीयूजी नंबर 8005441021 पर फोन किया गया तो उसका जवाब भी नहीं मिला। वैसे यह सामान्य प्रक्रिया है। उनका फोन अमूमन उठता नहीं है। हालांकि उप परिवहन आय़ुक्त अनिल कुमार मिश्र ने इस संबंध में कुछ बोलने से इंकार दिया। बाद में जांच अभियान में हुई कार्रवाई विवरण जरूर उन्होंने दिया।



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