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जीएसटी पर फिर व्यापारी एकता तार–तार

     
  
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  • एक गुट विरोध में तो दो समर्थन में
  • शीर्ष नेता पहुंचे हाशिए पर
  • नेताओं की आह्वान के बावजूद कपड़ा कारोबारियों ने रखी बंदी
GST Protest: Confusion over Protest in Lucknow

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लेकर व्यापार मंडलों की आपसी होड़ और कलह एक बार फिर सामने आ गई है। खास बात यह रही कि दो व्यापार मंडलों के वरिष्ठ नेता भले ही बंदी के विरोध में थे और कारोबार खुला रखने की अपील कर रहे थे लेकिन तमाम कपड़ा कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखें। वहीं बंद का आह्वान करने वालों के लिए एक बेहतर मौका ताकत दिखाने का साबित हुआ। खास बात तो यह है कि कपड़े पर जीएसटी लगाए जाने के विरोध में शुरू से मुखालफत करने वाले नेता भी अपनी दुकान खोले बैठे दिखें।




सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन उत्तर प्रदेश उद्गोय व्यापार प्रतिनिधि मंडल के संसदीय महामंत्री व लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा ने बंदी का समर्थन न करते हुए बाजार खुले रहने की दम भरा था। बावजूद उसके चौक, अमीनाबाद, आलमबाग, निशातगंज, अलीगंज, गोमतीनगर, जनपथ मार्केट आदि तमाम बाजारों में कपड़े की दुकानें बंद रहीं। चौक में सराफा मार्केट पूरी तरह से खुला रहा लेकिन चिकन वस्त्रों की दुकानें बंद रहीं। इसी तरह से लालबाग, निशातगंज, अमीनाबाद, आलमबाग, गणेशगंज आदि बाजारों में वस्त्र कारोबारी बंदी पर रहें। हालांकि काफी दुकानें शाम होते खुल गईं।

पहले ही फिक्स हो गया विरोध

जीएसटी से लगभग हर कारोबारी त्रस्त है। विरोध भी कर रहा है लेकिन व्यापारी नेता इसी आड़ में अपनी दुकानें चमकाने में लगे हैं। यही कारण है कि कुछ समय पहले उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने तमाम व्यापारियों से मुलाकात भी की थी और जीएसटी के लिए समर्थन मांगा था। इसका असर भी दिखा। लखनऊ व्यापार मंडल व उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल बंदी के विरोध में आ गए। यानी सरकार का काम व्यापारियों ने कर दिया। 




खास बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के शीर्ष नेता भी बंदी के पक्ष में थे लेकिन ऐन वक्त पर उनके सिपाहसलारों ने ही धोखा दे दिया। यानी वे बंदी के विरोध में उतर आएं। नतीजा यह रहा कि राजधानी में बंदी का आह्वान फ्लाप रहा। कारोबार पर भी आंशिक असर दिखा। कारण था कि तमाम थोक मंडियां सामान्य रूप से खुलीं थी। बाजारों में भी बंदी कुछ दुकानों तक ही सीमित थीं। यही नहीं, एक व्यापारी नेता ने तो जीएसटी लागू किए जाने की खुशी में गुरुवार मध्यरात्रि आतिशबाजी करने की भी घोषणा कर दी। खास बात यह है कि नेता जी का कारोबार सारे व्यापारी भलीभांति जानते हैं।


दोहराया गया इतिहास

जीएसटी को लेकर व्यापारियों के विरोध का हश्र भी कुछ उसी तरह से रहा जैसा कि वैट लागू होते समय देखा गया था। उस समय उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल में दो फाड़ हो चुके थे। सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी की सरकार के गोद में जाकर बैठे व्यापारी नेता बनवारी लाल कंछल व सुरेंद्र अग्रवाल सरकार के साथ हो गए थे। लिहाजा व्यापार मंडल द्वारा बुलाया गया बंद ज्यादा असर कारक नहीं रहा था। शुक्रवार को फिर वही होड़ दिखाई दीं। अब देखना यह है कि कौन व्यापारी नेता राजनीति में कितनी दूरी तय करेगा।




सरकार फिर जीती एक बार

जीएसटी का समर्थन करने वाले व्यापारी नेताओं पर देखा जाएं तो इसको लेकर दो नेता ही पूरी तरह से इसकी हिमायत में दिख रहे हैं। इनमें एक होजरी व्यापारी है और दूसरे शिक्षा के कारोबार से जुड़े हैं। खास बात यह है कि भाजपा सरकार बनने के बाद ही इनके सुरों में जो बदलाव आया, वह सबसे बढ़िया उनके समर्थक ही जानते है। अब प्रदेश सरकार में व्यापारी कल्याण आयोग–बोर्ड के गठन की भी घोषणा कर रखी है, सो सरकार से नजदीकी बनाने के लिए कोई नुस्खा छोड़ा नहीं जा रहा है। नतीजा व्यापारियों की एकता तोड़ने में सरकार फिर सफल हो गई जबकि व्यापारियों की एकता बिखर गई। खास यह भी है कि इस बार भी व्यापारियों एकता को नेताओं ने तितर बितर किया और इसका कितना लाभ किसे मिलेगा, यह सवाल फिर अहम हो गया है।


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