Home Rising At 8am GST Implementation In India

गुजरात चुनाव: पालनपुर सिटी के एक बूथ का EvM मशीन खराब

भारत अपने वैश्व‍िक दाय‍ित्वों को बखूबी निभा रहा है: पीएम मोदी

गुजरात चुनाव: पहले एक घंटे में करीब 7 प्रतिशत वोटिंग

गुजरात चुनाव: अरुण जेटली ने वोट डाला

पटना: मगध महिला कॉलेज में जींस, मोबाइल और पटियाला ड्रेस पर बैन

जीएसटी का नाम पर टैक्स चोरी बेलगाम

Rising At 8am | 06-Dec-2017 | Posted by - Admin

 

  • कम होने लगा सरकार को मिलने वाला राजस्व
  • आम आदमी को भी नहीं मिली राहत
   
GST Implementation in India

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होते वक्त केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दूध –दही मक्खन से लेकर दवाओं तक के दाम कम होने के सपने दिखाए थे। तमाम रोजमर्रा का सामान सस्ता हो जाने के दावे किए गए थे लेकिन जीएसटी लगने के बाद ये तमाम दावे हवा में दिखाई दे रहे हैं। टैक्स की दरें भले ही कम हो गईं हो लेकिन रेस्त्रां में खाने से लेकर दवाओं के दाम बीस फीसद तक महंगे हो गए। दूध –दही की कीमतें कम तो नहीं हुई, अलबत्ता आटा –नून-लकड़ी तक महंगी जरूर हो गई।

 

कामर्शियल टैक्स विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जीएसटी रिटर्न दाखिल होने लगें और उनकी नियमित जांच होने लगे तो इसका आंकलन किया जा सकें। अभी तो सामान्य रूप से रिटर्न दाखिल हो रहे हैं न ही प्रवर्तन कार्य हो रहा है। लिहाजा मुनाफाखोर हावी हो चके हैं। वैसे बाजारों पर नजर डालिए तो साफ दिखता है कि जीएसटी लगने के बाद फुटपाथ – सेल की बाजार जरूर एकदम से बढ़ गई है। कार –ठेले पर बिकते रेडीमेड वस्त्र। चारबाग पार्सल घर के बाहर लगा टैक्स चोरी के माल के ढेर सरकार की सारी हकीकत बयां कर देते हैं। बाजारों में पंजीकृत व्यापारी भले ही कारोबार कम होने की दलीलें दे रहे हैं लेकिन बिना पंजीयन केवल नंबर में काम करने वाले व्यापारियों की पौ बारह है। कूरियर एजेंट से लेकर चारबाग स्टेशन पर रहने वाले रेलवे दलाल अब ट्रांसपोर्टर बन गए हैं। धड़ल्ले से बिना बुकिंग का माल मंगाया और बाहर भेजा जा रहा है। सरकार टैक्स चोरी कम हो जाने का ढोल पीटती दिख रही है।

ई वे बिल में भी फर्जीवाड़ा

 

जीएसटी में पचास हजार रुपये से अधिक के माल की खरीद फरोख्त पर ई वे बिल अनिवार्य है। पिछले दिनों राजधानी में कानपुर से आ रहे सुपारी लदे ट्रक को जांच के लिए रोका गया तो उसमें मिला ई वे बिल कई बार इस्तेमाल शुदा मिला। यानी एक ई वे बिल पर कई ट्रक सुपारी मंगा ली गई। यह बात अपर आयुक्त को दी गई लेकिन कार्रवाई फिलहाल सिफर है। यही हाल सरसों का तेल, रिफाइंड, वनस्पति घी, रेडीमेड, स्टील आदि में भी चल रहा है। ई वे बिल का सबसे ज्यादा दुरुपयोग पान मसाला कारोबारी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कानपुर व राजधानी में पान मसाला से मिलने वाला राजस्व पैंतीस फीसद के करीब कम हो चुका है। जबकि उत्पादन में किसी तरह की कमी नहीं आई। दाम भी सभी उत्पादों के दस से पंद्रह फीसद तक बढ़ चुके हैं।

केवल कागजी बन गया एंटी प्राफिट एक्ट

 

दाम नियंत्रण व आम लोगों को जीएसटी में टैक्स दरों की कमी के प्रतिफल में लाभ दिलाने के लिए सरकार ने एंटी प्राफिट एक्ट पास तो करा लिया लेकिन उसका धेला भर फायदा फिलहाल आम आदमी तक नहीं पहुंचा है। एक्ट की नाकामी की सबसे बड़ा सुबूत दवाओं तथा अन्य रोजमर्रा उपयोग की वस्तुओं की कीमतों से लगाया जा सकता है। दाम किसी का कम नहीं हुआ। व्यापारियों का मुनाफा जरूर बढ़ गया। आम आदमी महंगाई से जूझ रहा है।

दरअसल अभी जीएसटी की व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य नहीं हो सकी है। अभी तो कारोबारियों के रिटर्न ही फाइल नहीं हो पा रहे हैं। इन रिटर्न के परीक्षण की भी कोई नियमित व्यवस्था नहीं हो पाई। लिहाजा कारोबारी कहां पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। कहां ज्यादा कीमतें वसूल रहे हैं या टैक्स चोरी कर रहे हैं, इसका आंकलन नहीं हो पा रहा है। जब व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी, तब इसका असर भी देखने को मिलेगा।

अध्यक्ष

वाणिज्य कर सेवासंघ  

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555








TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll





Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news




sex education news