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दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ। 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स के विरोध को लेकर व्यापारियों की गुटबंदी एक बार फिर नजर आने लगी है। खास बात यह है कि एक संगठन ने जीएसटी के खिलाफ 30 जून को भारत बंद का आह्वान किया है लेकिन बाकी संगठन फिलहाल इससे दूर ही नजर आ रहे हैं। वैसे भी पिछले कुछ सालों में प्रदेश के व्यापारिक संगठनों का इतिहास भी एक दूसरे को दगा देने वाला ही रहा है। 

वैट लगने के वक्त भी कुछ इसी तरह की स्थिति थी और प्रदेश में सबसे बड़े संगठन का दम भरने वाले संगठन का एकगुट सहित कई व्यापारी नेता सरकार के साथ खड़े हो गए थे। इस कारण से अब यह भारत बंद कितना सफल होगा, यह देखने वाली बात होगी। खास बात यह है कि जीएसटी को लेकर सबसे पहले बिगुल फूंकने वाले उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारी भी फिलहाल इस पर कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। बंद के समर्थन और विरोध को लेकर फिलहाल रणनीति तय करने का दम भरा जा रहा है।

दरअसल जीएसटी के प्रावधानों व आधी अधूरी तैयारियों के साथ जीएसटी लगाए जाने के विरोध में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने तीस जून को भारत बंद का आह्वान किया है। इसके लिए व्यापारियों ने तैयारियां भी तेज कर दी है। खास बात यह है कि कपड़ा व्यापार, बर्तन व्यापार, बिजली उपकरण व्यापार से लेकर एमएफसीजी कारोबारी तक जीएसटी के प्रावधानों व दरों का विरोध कर रहे हैं लेकिन उनका संगठन फिलहाल चुप्पी साधे हैं। 

हालांकि इस मामले में लखनऊ इलेक्ट्रिक मर्चेंन्ट्स एंड कांट्रैक्टर एसोसिशएन (लेमका) ने जरूर 30 की बंदी का पूर्ण समर्थन किया है। यही नहीं, जीएसटी की गुत्थी को अनसुलझा करार दे लेमका ने अपनी प्रतिनिधियों से कंपनियों से पूरी बिलिंग का प्रावधान जानने के बाद ही आर्डर देने की अपील की है। इसी तरह से कपड़ा व्यापारी भी जीएसटी लगाए जाने के खिलाफ हैं। इसके विरोध में मंगलवार को वाराणसी सहित प्रदेश के कई शहरों में कपड़ा कारोबार बंद रहा लेकिन राजधानी में इस पर रत्तीभर भी असर नहीं देखने को मिला। इसका एक मुख्य कारण कपड़ा व्यापारियों का एकमत न होना भी है। यही नहीं, कपड़ा व्यापार मंडल को लेकर लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा भी स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहते।

दूसरी तरफ अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने कहा है कि जीएसटी व्यापारियों पर थोपा जा रहा है। इसकी तैयारी भी पूरी नहीं है लेकिन सरकार इसे लागू करने जा रही है जबकि व्यापारियों की तमाम परेशानियां जस की तस हैं। यही नहीं, जीएसटी में जो प्रावधान किए गए हैं, उनसे व्यापारियों का शोषण होना तय है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। संगठन के महामंत्री सुरेश छबलानी के मुताबिक बंद को सफल बनाने के लिए पूरे प्रदेश में व्यापारी जनसंपर्क कर रहे हैं और बंद ऐतिहासिक होगा।


दर्द है लेकिन होड़ ज्यादा

खास बात यह है कि कपड़ा व्यापारी जीएसटी को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोशित हैं। मुसलसल विरोध जता रहे हैं, ज्ञापन दे रहे हैं लेकिन बंदी में शामिल नहीं हो रहे हैं। इसका वजह व्यापारिक संगठनों के बीच की होड़ है। काफी व्यापारी तो अब यह मान कर चल रहे हैं कि जीएसटी तो लगना ही है, फिर विरोध का फायदा क्या है। इसी तरह से प्रदेश सरकार की उपलब्धियों की कसीदें पढ़ने में मसरूफ एक संगठन तो जीएसटी के समर्थन में ही खडा दिख रहा है। वहीं प्रदेश में सबसे बड़े संगठन का दावा वाले व्यापार मंडल फिलहाल अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं है। यानी बंद कितना सफल होगा, इस अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं। 

 

 

 

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