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विधायक के बहाने, सरकार पर निशाने

| Last Updated : 2018-04-12 09:42:27

 

  • सपा से लेकर कांग्रेस तक हुई मुखर

  • कई संगठन भी उतरे सरकार के खिलाफ


Ground Report on Unnao rape and Murder Case


दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष पर तीखे कटाक्ष कर आड़े हाथ लेने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार उन्नाव के माखी से विधायक के बहाने विपक्षियो के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी और कई संगठन सरकार के खिलाफ खुलकर उतर आए हैं। सरकार के लिए विधायक भी गले ही हड्डी साबित हो रहे हैं। रही सही कसर भाजपा के साथ शामिल दलित व अन्य दलों के सांसद पूरी कर रहे हैं। दरअसल इसके पहले दलित आंदोलन को लेकर हुई हिंसा के चलते सरकार निशाने पर आ गई थी और उसके बाद उन्नाव कांड। मामले के तूल पकड़ने के साथ ही सरकार की किरकिरी भी हो रही है। वहीं विपक्ष हावी दिखाई दे रहा है।

 

दरअसल उन्नाव से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक युवती ने दस महीने पहले दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इस मामले को दस महीने तक पुलिस दबाए रहीं। वहीं दबंग विधायक की शह पर पुलिस ने पीड़िता के पिता को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस घटना से आहत युवती ने पिछले मुख्यमंत्री आवास पर आत्मदाह का प्रयास किया तो मामला सुर्खियों में आ गया। इस घटना को लेकर अभी कार्रवाई शुरु ही हुई थी कि पीड़िता के पिता की पिटाई से मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी उसके शरीर 14 चोट के निशान मिले और पिटाई से आंत फटने की बात सामने आईं। उसके बाद से ही यह मामला सुर्खियों में चल रहा है। मामला सीधे सत्तारुढ़ भाजपा के विधायक से जुड़ा होने के कारण हर पार्टी इस मुद्दे को भुनाने में जुट गई है। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी विरोध प्रदर्शन में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री पर ही सीधे तौर पर विधायक को बचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

यही नहीं, इस पूरी घटना से जुड़े वीडियो –आडियो भी सामने आ रहे हैं और इस कारण से विधायक की भूमिका भी सवालों में आ गई है। उधर, इस दौरान शाहजहांपुर से भाजपा के नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे चिन्मयानंद पर दुराचार का मामला वापस लेने के आदेश के बाद विपक्षी सरकार के खिलाफ ज्यादा मुखर है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री लेकर मुख्यमंत्री तक एक तरफ बेटी बचाओ का नारा दे रहे हैं और दूसरी तरफ बेटियों के साथ नाइंसाफी करने वालों को बचाने के लिए सरकार सारे हथकंडे अपना रही है। नतीजा यह है कि अब कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक इन मुद्दों पर सरकार को घेरने में लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने तो इन घटनाओं को सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है। वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के गुरुवार को उन्नाव जाने की चर्चा भी गर्म हो गई है।

 

डैमेज कंट्रोल के लिए हुआ मंथन

दूसरी तरफ दलिता आंदोलन और उसके बाद विधायक पर दुराचार के आरोप तथा पीड़िता के पिता की मौत के मामले से हुए डैमेज को कंट्रोल करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को राजधानी में पहुंचे। एजेंडा पूरी तरह से तय था और अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमित शाह पहले गोमतीनगर स्थित समता मूलक चौराहे पहुंचे और संत ज्योतिबा फुले के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर देऱ शाम तक बैठकें होती रही। इसमें सुहेलदेव पार्टी से विधायक एवं मंत्री ओमप्रकाश राजभर, बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले और सोनभद्र से अपना दल विधायक हरिराम द्वारा मुख्यमंत्री व सरकार को लेकर उठाए जा रहे सवालों के जवाब खोजे जाते रहें। दरअसल भाजपा में दलितों के प्रतिनिधियों द्वारा किए जाने अंदरूनी हमलों के बाद उन्नाव विधायक का प्रकरण सामने आने के बाद भाजपा पूरी तरह से बैकफुट पर दिखाई दे रही है। सरकार की कार्यप्रणाली पहले से ही सवालों में रही है। इन सारी स्थितियों ने विपक्षियों को भी हमलावर होने का मौका दे दिया है।



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