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दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

स्कूल का पता न ठिकाना लेकिन एक पत्र के आधार पर वाहन को स्कूल का परमिट। यह भी पता नहीं कि स्कूल पंजीकृत है या अवैध मगर रियायती टैक्स का परमिट जारी। दरअसल स्कूल वाहनों के नाम पर परिवहन विभाग में यह गोरखधंधा वर्षों से चल रहा है। दलाल और कर्मचारियों की मिलीभगत से सहजता से यह परमिट जारी हो रहे हैं और इसका फायदा वाहन स्वामी उठा रहे हैं। जबकि अभिभावकों को इसके लिए काफी ज्यादा भाड़ा अदा करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि स्कूल परमिट धारक निजी वाहनों को स्कूल अपना नहीं मानते जबकि परिवहन विभाग के अधिकारी इन छोटे स्कूल वाहनों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइड लाइन भी पालन नहीं कराते। नतीजतन प्रदेश भर में हजारों की संख्या में अवैध वाहन बिना मानकों के ही स्कूली बच्चों को लाने ले जाने काम कर रहे हैं।

 

ऐसे वाहनों पर अब जल्द ही लगाम लगेगी। परिवहन विभाग में स्कूल वाहनों के लिए अलग नियमावली तैयार की जा रही है। इस नियमावली में स्कूल परमिट लेने वाले छोटे बड़े सभी वाहनों के लिए मानक तय किए जा रहे हैं। यानी इन वाहनों में बच्चों की संख्या से लेकर उनके परमिट शर्त तक स्पष्ट होगी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर तैयार हो रही नियमावली में सभी बिंदुओं को लेकर नियम तय किए जा रहे हैं।

परमिट में ही खेल

दरअसल स्कूली वाहन का परमिट जारी करने में ही खेल चल रहा है। स्कूल वाहन को कांट्रैक्ट कैरिज का परमिट मिलता है। इसके लिए स्कूल के साथ या फिर अभिभावकों के साथ वाहन स्वामी का एग्रीमेंट होना अनिवार्य है लेकिन यह एग्रीमेंट नब्बे फीसद निजी स्कूल वाहनों में है ही नहीं। तमाम वाहन तो ऐसे स्कूलों के नाम पर परमिट लिए हुए हैं, जो या तो बंद हो चुके हैं या फिर उन्हें शिक्षा विभाग से पंजीयन नहीं मिला है। मगर टैक्स की छूट का लाभ इन्हें मिल रहा है और उसके एवज में आऱटीओ दफ्तर में भी फिटनेस से लेकर रिनीवल तक कमाई की जा रही है।

जांच में सामने आई थी सच्चाई

कुशीनगर में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर स्कूली वाहनों की जांच की गई थी लेकिन इस जांच में अधिसंख्य स्कूलों ने अपने यहां किसी निजी वाहन के होने से इंकार कर दिया था। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भी आदेश को केवल स्कूल के नाम पंजीकृत वाहनों के लिए बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया था। हालांकि बाद में प्रबंधन व सरकार के सख्त रुख के बाद जरूर जांच शुरु हुई लेकिन उसकी रिपोर्ट आज तक नहीं मिल सकी है। राजधानी की संभागीय परिवहन अधिकारी विदिशा सिंह के मुताबिक राजधानी में करीब तीन हजार निजी अनुबंधित स्कूल वाहन हैं। इनके पास अनुबंध पत्र होना अनिवार्य हैं और ऐसा न होने पर उन्हें स्कूल परमिट नहीं दिया जा सकता है।

 

"स्कूल वाहनों को लेकर मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री दोनों ही गंभीर है। स्कूली बच्चों को लेकर चलने वाले वाहनों के लिए नई नियमावली भी बनाई जा रही है। अधिकारियों को शत प्रतिशत स्कूली वाहनों की जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जांच की भी जा रही है और सभी वाहनों में अनुबंध पत्र की जांच की जानी है। इसकी रिपोर्ट भी वाहन के पंजीयन नंबर सहित मांगी गई है। इसमें कोताही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।"

बीके सिंह

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन)

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